भारी बारिश और बाढ़ ने मचाई तबाही, अब तक 17 लोगों की मौ'त...सूरत में कुदरत का कहर

Edited By Updated: 09 Jul, 2026 11:00 PM

natural disaster in surat 17 killed in rain and floods

गुजरात के सूरत जिले में पिछले कुछ दिन में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 17 लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस दौरान 3,600 से ज्यादा लोगों को बचाया गया और 4,300 से अधिक लोगों को शहर के निचले इलाकों से...

नेशनल डेस्कः गुजरात के सूरत जिले में पिछले कुछ दिन में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 17 लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस दौरान 3,600 से ज्यादा लोगों को बचाया गया और 4,300 से अधिक लोगों को शहर के निचले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हालात की समीक्षा के लिए बैठक की और सूरत में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए 500 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। निचले इलाकों में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाला पानी अब धीरे-धीरे कम हो रहा है और स्थिति सामान्य हो रही है।

सूरत के आपदा विभाग के उप मामलतदार साजिद मेरुजे ने मीडिया से कहा, "अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें तीन की मौत ग्रामीण क्षेत्रों में और आठ की शहर में हुई है। इसके अलावा, आज शहर में छह और शव मिले हैं। उनकी पहचान और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी है।"

अधिकारियों ने बताया कि बुधवार सुबह समाप्त हुए 24 घंटे में सूरत में 358 मिलीमीटर बारिश हुई थी। उन्होंने कहा कि इससे शहर में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। अधिकारियों ने कहा कि हालांकि इसके बाद बारिश से राहत मिली और बृहस्पतिवार सुबह तक शहर में केवल एक मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने भारी बारिश से पैदा हुई बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए सूरत के अलथान स्थित एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल के साथ बैठक की।

मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर लिखा, "राज्य सरकार सूरत में बार-बार होने वाली बाढ़ की समस्या का क्रीक क्षेत्र के विकास के जरिए स्थायी समाधान करने और दीर्घकालिक योजना के लिए 500 करोड़ रुपये देगी।" उन्होंने कहा, "अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी विभाग आपस में तालमेल बनाकर प्रभावी ढंग से काम करें और भविष्य में क्रीक में आने वाली बाढ़ को रोकने के लिए ठोस योजना तैयार करें।"

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