प्रधानमंत्री का जाति जनगणना टालने का इरादा है: कांग्रेस

Edited By Updated: 30 Apr, 2026 11:28 AM

the prime minister intends to postpone the caste census congress

कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जाति जनगणना को टालने का इरादा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि जाति जनगणना की मांग के लिए कांग्रेस पर ''अर्बन नक्सल की सोच'' होने का आरोप लगाने के लिए प्रधानमंत्री...

नेशनल डेस्क: कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जाति जनगणना को टालने का इरादा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि जाति जनगणना की मांग के लिए कांग्रेस पर ''अर्बन नक्सल की सोच'' होने का आरोप लगाने के लिए प्रधानमंत्री को पार्टी के नेतृत्व से माफी मांगनी चाहिए। रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''आज से ठीक एक साल पहले मोदी सरकार ने घोषणा की थी कि आगामी जनगणना में पूरी आबादी की जातिगत गणना को शामिल किया जाएगा।
 

प्रधानमंत्री के इस नाटकीय 'यू-टर्न' से जुड़ी हाल की घटनाओं का क्रम है।'' उन्होंने कहा, ''21 जुलाई 2021 को गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में भाजपा सांसद रक्षा निखिल खडसे (अब मंत्री) द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कहा था कि भारत सरकार ने नीति के रूप में जाति-आधारित जनगणना नहीं करने का निर्णय लिया है।'' कांग्रेस नेता के अनुसार, 21 सितंबर 2021 को मोदी सरकार ने उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका (सिविल) संख्या 841/2021 में एक हलफनामा दायर करते हुए कहा कि अदालत द्वारा जाति-आधारित जनगणना कराने का कोई भी निर्देश सरकार द्वारा पहले ही लिए गए नीतिगत निर्णय में हस्तक्षेप के समान होगा।

रमेश ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को जाति जनगणना के विषय पर लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए यह भी कहा, ''16 अप्रैल, 2023 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नियमित जनगणना के हिस्से के रूप में जाति जनगणना की मांग की थी। 28 अप्रैल, 2024 को एक टेलीविज़न नेटवर्क को दिए साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जाति जनगणना की मांग 'अर्बन नक्सल' सोच का संकेत है।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को अपने इस आरोप के लिए कांग्रेस के नेतृत्व से माफी मांगनी चाहिए।

रमेश ने कहा, ''इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उन्हें देश की जनता को यह बताना चाहिए कि 30 अप्रैल 2025 को जब उन्होंने जाति जनगणना की घोषणा की, तब उन्होंने अपने मन को "अर्बन नक्सल" सोच से दूषित होने कैसे दिया।'' उन्होंने कहा, ''पूरा एक साल बीत चुका है। यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि यह जातिगत गणना किस प्रकार की जाएगी। इस विषय पर न तो विपक्षी दलों और राज्य सरकारों के साथ कोई संवाद हुआ है और न ही इस क्षेत्र के विशेषज्ञों से कोई सार्थक चर्चा की गई है।'' उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने पांच मई, 2025 को भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था और उस पत्र का संज्ञान तक नहीं लिया गया। रमेश ने कहा, ''उस पत्र में उठाए गए मुद्दे आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं। बल्कि हाल ही में समाप्त हुए संसद के विशेष सत्र के बाद वे और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं, जहां यह स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री जाति जनगणना को टालने का पूरा इरादा रखते हैं।'' 

 

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