प्रधानमंत्री छोटे दल के कार्यकर्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं - महिला आरक्षण विधेयक पर बोले कांग्रेस सांसद

Edited By Updated: 20 Apr, 2026 07:53 AM

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कांग्रेस सांसद Syed Naseer Hussain ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का व्यवहार एक राष्ट्रीय नेता जैसा नहीं, बल्कि एक छोटे पार्टी कार्यकर्ता जैसा लग रहा है।...

नेशनल डेस्क: कांग्रेस सांसद Syed Naseer Hussain ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का व्यवहार एक राष्ट्रीय नेता जैसा नहीं, बल्कि एक छोटे पार्टी कार्यकर्ता जैसा लग रहा है। हुसैन ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस बिल को आगे बढ़ाने का फैसला राजनीतिक फायदे के लिए लिया, खासकर आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए, जैसे Tamil Nadu और West Bengal।

उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन करती है, जो पहले ही 2023 में पारित हो चुका है। लेकिन इसे लागू करने के लिए जनगणना जरूरी है, ताकि सही आंकड़ों के आधार पर सीटों का निर्धारण किया जा सके। यह विवाद तब बढ़ा जब प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने संसद में इस प्रयास की 'हत्या' कर दी और इसके लिए जनता उन्हें चुनाव में जवाब देगी।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस, Trinamool Congress, Samajwadi Party और DMK जैसे दल महिलाओं को सशक्त होते नहीं देखना चाहते, क्योंकि इससे उनके पारिवारिक राजनीतिक ढांचे पर असर पड़ेगा। लोकसभा में संविधान संशोधन बिल पर वोटिंग हुई, जिसमें 298 सांसदों ने समर्थन किया जबकि 230 ने विरोध किया। इसके बावजूद बिल पारित नहीं हो सका। इसके बाद सरकार ने इससे जुड़े अन्य दो बिल-डिलिमिटेशन और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन-को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला लिया।

इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और उनमें 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की योजना थी। विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन (Delimitation) के तरीके से सहमत नहीं हैं। कुल मिलाकर, महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है, और इसका असर आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकता है।

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