'ICU में भर्ती पिता को देखने आए थे, खुद कफ़न ओढ़ सो गए...', पढ़ें दिल्ली अग्निकांड की वो दर्दनाक दास्तान

Edited By Updated: 04 Jun, 2026 12:08 PM

three generations of a family wiped out in delhi hotel fire

बीते दिन राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई थी। यहाँ एक होटल में लगी भीषण आग ने एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। दरअसल यह परिवार साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती अपने एक बुजुर्ग सदस्य का हालचाल...

नेशनल डेस्क: बीते दिन राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई थी। यहाँ एक होटल में लगी भीषण आग ने एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। दरअसल यह परिवार साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती अपने एक बुजुर्ग सदस्य का हालचाल जानने दिल्ली आया हुआ था, लेकिन बुधवार को लगी इस आग में परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई।  

पिता के करीब रहने के लिए रुके थे होटल में

जानकारी के लिए बता दें कि 70 साल के राधेश्याम अग्रवाल पिछले कुछ समय से गंभीर बीमारी के चलते साकेत के मैक्स अस्पताल के ICU में वेंटिलेटर पर हैं। पिता की नाजुक हालत की खबर मिलते ही उनका बेटा विवेक अग्रवाल अपनी माँ प्रेमलता, पत्नी तर्जनी और दोनों बेटियों के साथ दिल्ली पहुंचे थे। अस्पताल के नजदीक रहने और बुजुर्ग पिता की हर पल देखभाल करने के उद्देश्य से उन्होंने पास के ही 'फ्लरिश स्टेज' होटल में कुछ कमरे किराए पर लिए थे। बताया जा रहा है कि विवेक की एक बेटी तो विशेष रूप से अपने दादाजी को देखने के लिए बेंगलुरु से हवाई जहाज से दिल्ली आई थी।

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रिश्तेदारों को किया गया वो 'आखिरी फोन'

बुधवार की सुबह जब पूरा शहर सो रहा था, तभी तड़के होटल में अचानक आग लग गई और देखते ही देखते चारों तरफ जहरीला धुआं फैल गया। दम घुटने और अफरातफरी के बीच विवेक अग्रवाल ने दिल्ली के कोटला में रहने वाले अपने एक रिश्तेदार को फोन लगाया। घबराई हुई आवाज में उन्होंने सिर्फ इतना कहा "यहाँ आग लग गई है..."। इसके बाद फोन कट गया और फिर कभी विवेक की आवाज सुनाई नहीं दी।

मामा-मौसी भी बने हादसे का शिकार

यह त्रासदी सिर्फ विवेक के सगे परिवार तक ही सीमित नहीं रही। राधेश्याम अग्रवाल की गंभीर स्थिति को देखते हुए विवेक के मामा अशोक गोयल, मौसी कमला और मौसा जिमरी भी ढाढस बंधाने के लिए उसी होटल में आकर ठहरे थे। आग की लपटों और धुएं ने इन सभी को अपनी चपेट में ले लिया और किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला।

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अपनों की तलाश में भटकते रहे रिश्तेदार

बुधवार सुबह से ही एम्स ट्रॉमा सेंटर, मैक्स अस्पताल और एम्स मॉर्च्युरी के बाहर चीख-पुकार मची हुई थी। परिवार के करीब 40 से ज्यादा रिश्तेदार बदहवास हालत में अपनों की तस्वीरें मोबाइल में दिखाकर डॉक्टरों और पुलिस से उनकी सलामती की दुआ मांग रहे थे। हर कोई इस उम्मीद में था कि शायद कोई चमत्कार हो जाए, लेकिन शाम होते-होते प्रशासन ने 8 लोगों की मौत की पुष्टि कर दी और सारी उम्मीदें आंसुओं में बह गईं।

 

 

 

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