Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 25 Mar, 2026 07:19 PM

महाराष्ट्र के Jalna जिले से किसानों की परेशानी की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। टमाटर के गिरते दामों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। हालात इतने खराब हो गए कि एक किसान ने गुस्से और निराशा में अपनी पूरी उपज सड़क पर फेंक दी।
नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र के Jalna जिले से किसानों की परेशानी की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। टमाटर के गिरते दामों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। हालात इतने खराब हो गए कि एक किसान ने गुस्से और निराशा में अपनी पूरी उपज सड़क पर फेंक दी।
एक एकड़ की खेती, हजारों का खर्च… लेकिन कमाई शून्य
धारकल्याण गांव के किसान अमर काकड़े ने करीब एक एकड़ में टमाटर की खेती की थी। इस फसल पर उन्होंने 40 से 45 हजार रुपये तक खर्च किया था। मौसम भी अनुकूल रहा, जिससे पैदावार अच्छी हुई और बेहतर मुनाफे की उम्मीद जगी। लेकिन जब वे अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचे, तो जो भाव मिला, उसने सारी उम्मीदें तोड़ दीं।
मंडी में ₹4-5 किलो का भाव, किसान का फूटा गुस्सा
किसान जब Chhatrapati Sambhajinagar और जालना की कृषि मंडियों में पहुंचे, तो व्यापारियों ने टमाटर का दाम सिर्फ 4 से 5 रुपये प्रति किलो बताया। इतना कम रेट सुनते ही किसान का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने करीब 25 क्विंटल टमाटर सड़क पर फेंक दिए। यह कदम उनकी नाराजगी और सिस्टम के प्रति आक्रोश को दर्शाता है।
लागत भी नहीं निकल रही, मजदूरी-भाड़ा सब घाटे में
किसान का कहना है कि इस कीमत पर तो मजदूरी, ट्रांसपोर्ट और खेती में लगी लागत भी नहीं निकल पा रही है। वर्तमान स्थिति में एक कैरेट (20-23 किलो) टमाटर की कीमत केवल 150 से 200 रुपये मिल रही है, जो औसतन 5-7 रुपये प्रति किलो बैठती है। किसानों का कहना है कि कम से कम 500-600 रुपये प्रति कैरेट का भाव ही उन्हें घाटे से बचा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय हालात का असर, बढ़ी सप्लाई
किसानों का आरोप है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण टमाटर का निर्यात प्रभावित हुआ है। इससे घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतों में भारी गिरावट आ गई। नवंबर में लगाई गई फसल अब औने-पौने दाम पर बिक रही है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है।
सरकार से किसानों की सीधी मांग
किसान अब सरकार से मांग कर रहे हैं कि टमाटर समेत अन्य सब्जियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया जाए। साथ ही उन्हें ऐसा बाजार उपलब्ध कराया जाए, जहां उन्हें उनकी उपज का सही दाम मिल सके।
बढ़ती चिंता, और भी किसान आ सकते हैं संकट में
जालना की यह घटना केवल एक किसान की नहीं, बल्कि पूरे इलाके के किसानों की पीड़ा को उजागर करती है। यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले दिनों में और भी किसान ऐसी मुश्किल स्थिति का सामना कर सकते हैं।