हर साल अरबों खर्च फिर भी सड़कें टूटीः भारत की तरह ब्रिटेन भी परेशान, गड्ढे भरना नेताओं के बस की बात क्यों नहीं?

Edited By Updated: 10 May, 2026 05:09 PM

why politicians can t fix potholes permanently

भारत की तरह ब्रिटेन भी सड़कों के गड्ढों की समस्या से जूझ रहा है। वहां भी हर साल अरबों रुपये खर्च होने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ गड्ढे भरने की राजनीति से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि मजबूत और टिकाऊ सड़क...

London: भारत की तरह अब ब्रिटेन भी सड़कों के गड्ढों की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। वहां भी लोग खराब सड़कों और बार-बार होने वाली अस्थायी मुरम्मत से परेशान हैं। ब्रिटेन में हुए एक सर्वे में लोगों ने खराब सड़कों को सबसे बड़ा स्थानीय मुद्दा बताया। यह स्थिति भारत जैसी ही है, जहां हर बारिश के बाद टूटी सड़कें और गड्ढे चर्चा का विषय बन जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, सड़कें समय के साथ कमजोर हो जाती हैं। भारी वाहनों का दबाव, बारिश और ठंड सड़क में दरारें पैदा करते हैं। बाद में यही दरारें बड़े गड्ढों में बदल जाती हैं। भारत में मानसून और ब्रिटेन में सर्द मौसम इस समस्या को और बढ़ा देता है।

 

ब्रिटेन में  ज्यादातर जगहों पर गड्ढों को सिर्फ ऊपर से भर दिया जाता है। कुछ समय बाद सड़क फिर टूट जाती है। बिल्कुल भारत की तरह वहां भी लोग प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं कि हर साल खर्च होने के बावजूद सड़कें क्यों नहीं सुधर रहीं। रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन की करीब 17 प्रतिशत सड़कें खराब हालत में हैं और उन्हें ठीक करने में अरबों पाउंड खर्च होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पैबंद लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि मजबूत सड़क निर्माण और समय पर रखरखाव जरूरी है।

 

 ब्रिटेन में अब AI और नई तकनीक के इस्तेमाल की बात हो रही है ताकि सड़क की कमजोरी पहले ही पता लगाई जा सके और गड्ढे बनने से पहले मुरम्मत हो सके।विशेषज्ञों का कहना है कि गड्ढे अचानक नहीं बनते। समय के साथ सड़क का डामर कमजोर हो जाता है। फिर भारी वाहनों के दबाव और बारिश का पानी सड़क में दरारें पैदा करता है। सर्दियों में पानी जमने और पिघलने से ये दरारें बड़ी होकर गड्ढों में बदल जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को सिर्फ गड्ढे भरने के बजाय पूरी सड़क व्यवस्था सुधारनी होगी। मजबूत सड़कें बनानी होंगी और समय रहते उनकी जांच व मरम्मत करनी होगी।

 

नई तकनीक और AI की मदद से सड़क की कमजोरी पहले ही पता लगाई जा सकती है। इससे गड्ढे बनने से पहले ही मुरम्मत की जा सकेगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अगर समय पर सड़क रखरखाव किया जाए तो लंबे समय में काफी पैसा बच सकता है। साथ ही बार-बार डामर इस्तेमाल करने से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर सरकार सिर्फ अस्थायी मरम्मत करती रही तो आने वाले समय में गड्ढों की समस्या और गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकारें सिर्फ दिखावटी मरम्मत के बजाय लंबे समय की योजना बनाएं, तो लोगों को राहत मिल सकती है और सड़क हादसे भी कम हो सकते हैं।

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