Kalashtami May 2026: महादेव के बटुक अवतार की पूजा से मिटेंगे सारे कष्ट, जानें शत्रुओं पर विजय पाने की अचूक विधि

Edited By Updated: 09 May, 2026 08:47 AM

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Kalashtami May 2026: जानें, कालाष्टमी 2026 पर भगवान बटुक भैरव की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र। महादेव के इस सौम्य अवतार की पूजा से शत्रुओं पर विजय और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

Kalashtami May 2026: सनातन धर्म में कालाष्टमी का व्रत भगवान शिव के रौद्र रूप 'काल भैरव' को समर्पित है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी दिन उनके सबसे सौम्य और बाल स्वरूप बटुक भैरव की पूजा का भी विधान है?  वर्ष 2026 में मई महीने की 9 तारीख को कालाष्टमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से बटुक भैरव की उपासना करते हैं, उनके जीवन से न केवल नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं, बल्कि उन्हें सुख-सौभाग्य का वरदान भी मिलता है।

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शिवपुराण के अनुसार भैरव को शिव का पूर्णरूप बतलाया गया है। काल भैरव परम साक्षात रुद्र का ही रूप हैं। शास्त्रों में मुख्यतः अष्ट भैरव की गणना की जाती है। इनके नाम बटुक भैरव, क्रोध भैरव, दंडपाणि (शूल पाणी), भूत भैरव (भीषण भैरव), कपाल भैरव, चंड भैरव, आसितांग भैरव व आनंद भैरव मिलते हैं। 

कालों के काल महाकाल अर्थात महाकालेश्वर भगवान शिव महादेव हैं। वह लिंग रूप में निराकार ब्रह्म के द्योतक हैं और सर्वत्र विराजमान हैं। भूतभावन भगवान भैरव को शिव का अवतार माना गया है अत: वह शिव स्वरूप ही हैं और उनके साकार रूप हैं। भैरव सम्पूर्णत: परात्पर शंकर ही हैं। भैरव की महत्ता असंदिग्ध है, वह आपत्ति-विपत्ति विनाशक एवं मनोकामना पूर्ति के देव हैं। वैसे तो संसार में भैरव के कई रूप सुख्यात हैं, परंतु उनमें दो अत्यंत प्रसिद्ध हैं : 1. काल भैरव और 2 बटुक भैरव-आनंद भैरव।

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कालाष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त 
इनकी पूजा सुबह या फिर रात 10 बजे के बाद करना शीघ्र फलदायी होता है। घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।

कालाष्टमी पूजा विधि: भैरव के चित्र का विधिवत पूजन करें। सरसों के तेल का दीप करें, लोहबान की धूप करें, काजल चढ़ाएं। नीले फूल चढ़ाएं, रेवड़ियों का भोग लगाएं तथा किसी माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग प्रसाद रूप में वितरित करें। 

कालाष्टमी पूजा मंत्र: ह्रीं नील वर्णों दण्ड पाणि: भैरव नमः॥

ध्यान रहे काल भैरव की पूजा में श्री बटुक भैरव अष्टोत्तर शत-नामावली का पाठ ज़रूर करें। मान्यता है इन्हें प्रसन्न करने के लिए श्री बटुक भैरव मूल मंत्र का पाठ करना भी शुभ होता है। जो भी इनकी उपासना करता है श्री काल भैरव उसकी दसों दिशाओं से स्वयं रक्षा करते हैं।

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कालाष्टमी चमत्कारी भैरव मंत्र-
'ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं'।
भैरव जयंती पर इन चमत्कारी मंत्र का जाप करने से दूर होगी हर समस्या।

कालाष्टमी पर भैरव बाबा को लगाएं इन वस्तुओं का भोग
दही-बड़ा :
तमसिक आहार माना गया है, जिससे उग्र ऊर्जा शांत होती है एवं जीवन में संतुलन आता है।

इमरती : मिठाई रूप में प्रिय भोग, इससे घर में शान्ति-समृद्धि का आगमन होता है।

शराब : परंपरागत रूप से पर्व में शामिल। भक्त मानते हैं कि इसे अर्पित करने से ऋण, भय और बाधाएं दूर होती हैं।

काले तिल से बनी चीजें : जैसे तिल-लड्डू, गजक, रेवड़ी। इनसे शनि ग्रह और अन्य दोषों से मुक्ति मिलती है।

उड़द की खिचड़ी : सरल आहार के रूप में अर्पित, जिससे इच्छाएं पूरी होती हैं व बिगड़े कार्य बनते हैं।

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