Edited By Radhika,Updated: 01 Jan, 2026 11:51 AM

क्या आप सोच सकते हैं कि आप सोएं 4 तारीख को और जब अगली सुबह उठें तो तारीख सीधे 11 दिन आगे की हो। यानि की कैलेंडर पर 15 तारीख हो? सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन इतिहास के पन्नों में इसका जिक्र मिलता है। साल 1582 में...
10 Missing Days 1582: क्या आप सोच सकते हैं कि आप सोएं 4 तारीख को और जब अगली सुबह उठें तो तारीख सीधे 11 दिन आगे की हो। यानि की कैलेंडर पर 15 तारीख हो? सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन इतिहास के पन्नों में इसका जिक्र मिलता है। साल 1582 में दुनिया के एक बड़े हिस्से ने अपनी ज़िंदगी के 10 दिन हमेशा के लिए खो दिए थे। आइए जानते हैं उस 'कैलेंडर सुधार' की कहानी, जिसने पूरी दुनिया की घड़ी और तारीख बदल दी।
11 मिनट की वो चूक, जो भारी पड़ गई
1582 से पहले यूरोप में 'जूलियन कैलेंडर' का चलन था, जिसे 45 ईसा पूर्व में जूलियस सीजर ने लागू किया था। इस कैलेंडर में एक साल 365.25 दिन का माना जाता था। लेकिन विज्ञान कहता है कि एक सौर वर्ष (Solar Year) वास्तव में 365.2422 दिन का होता है। जूलियन कैलेंडर और सौर वर्ष के बीच महज 11 मिनट का अंतर था।
देखने में यह मामूली लग सकता है, लेकिन हर साल जुड़ते-जुड़ते 16वीं शताब्दी तक यह अंतर 10 दिनों का हो गया। नतीजा यह हुआ कि ऋतुओं का चक्र बिगड़ने लगा। चर्च के लिए सबसे बड़ी समस्या 'ईस्टर' की तारीख को लेकर थी, जो Spring Equinox से जुड़ी होती है। खगोलीय रूप से जो घटना 21 मार्च को होनी चाहिए थी, वह कैलेंडर के हिसाब से 11 मार्च तक खिसक गई थी।
जब पोप ने 'मिटा दिए' 10 दिन
इस गड़बड़ी को ठीक करने के लिए इटली के खगोलशास्त्री एलोइसियस लिलियस ने एक नया प्रस्ताव दिया, जिसे पोप ग्रेगरी XIII ने स्वीकार किया। उन्होंने आदेश दिया कि 4 अक्टूबर 1582 के ठीक अगले दिन को 15 अक्टूबर माना जाए। इस तरह इतिहास से 5 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक की तारीखें हमेशा के लिए 'लापता' हो गईं।
इस बदलाव का जमकर विरोध हुआ। मजदूरों ने 10 दिनों की अतिरिक्त सैलरी मांगी, तो खगोलविदों ने शिकायत की कि उनके पिछले सारे रिकॉर्ड बेकार हो गए। ब्रिटेन, रूस और ग्रीस जैसे देशों ने इसे 'कैथोलिक तानाशाही' बताते हुए सदियों तक स्वीकार नहीं किया। ब्रिटेन ने 1752 में इसे अपनाया, जबकि रूस ने 1918 में जाकर अपनी तारीखें बदलीं।
लीप ईयर का नया गणित और 'जनवरी' का उदय
पोप ग्रेगरी ने न केवल तारीखें बदलीं, बल्कि लीप ईयर का नियम भी बदल दिया। अब हर वह साल जो 400 से विभाज्य नहीं है (जैसे 1700, 1800, 1900), वह लीप ईयर नहीं माना जाएगा, भले ही वह 4 से कटता हो। इसके साथ ही नए साल की शुरुआत को मार्च से बदलकर जनवरी कर दिया गया। भारत में भी अंग्रेजों के शासन के दौरान आधिकारिक कामकाज के लिए इसी ग्रेगोरियन कैलेंडर को लागू किया गया, जबकि यहां पहले से ही खगोलीय रूप से सटीक 'विक्रम संवत' और 'शक संवत' प्रचलित थे।
क्या आज का कैलेंडर पूरी तरह सटीक है?
हैरानी की बात यह है कि आज हम जिस कैलेंडर को मानते हैं, वह भी 100% सटीक नहीं है। ग्रेगोरियन कैलेंडर आज भी सौर वर्ष से 26 सेकंड पीछे चलता है। इस सूक्ष्म अंतर के कारण हर 3,300 साल में यह कैलेंडर एक दिन आगे निकल जाएगा। यानी साल 4909 तक हमें फिर से अपनी तारीखों में एक दिन का सुधार करना पड़ सकता है।