Bihar Politics: नीतीश कुमार ने BJP के सामने रखी ये बड़ी शर्त, पटना से दिल्ली तक मची सियासी हलचल

Edited By Updated: 06 Mar, 2026 01:17 PM

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बिहार की सियासत में इन दिनों एक बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए नामांकन पत्र दाखिल करवा दिया है। बिहार की सियासत छोड़ने के बीच नीतीश ने BJP के सामने कुछ ऐसी शर्तें रखी हैं, जिससे यह साफ...

नेशनल डेस्क: बिहार की सियासत में इन दिनों एक बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए नामांकन पत्र दाखिल करवा दिया है। बिहार की सियासत छोड़ने के बीच नीतीश ने BJP के सामने कुछ ऐसी शर्तें रखी हैं, जिससे यह साफ संदेश जाता है कि वे पटना से दूर रहकर भी बिहार की सत्ता पर अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहते।

सत्ता के समीकरणों में बदलाव की सुगबुगाहट

वर्तमान में बिहार सरकार का ढांचा JDU और BJP के बीच बंटा हुआ है। जहां मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार हैं, वहीं बीजेपी के पास दो उपमुख्यमंत्री (सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा) के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष और बेहद महत्वपूर्ण 'गृह विभाग' की जिम्मेदारी भी है। नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक करियर में पहली बार गृह विभाग जैसे अहम पोर्टफोलियो को अपने पास से जाने दिया था, लेकिन अब वे इसे वापस पाने की रणनीति बना रहे हैं।

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नीतीश कुमार की 'बड़ी शर्त' क्या है?

JDU सूत्रों के हवाले से जो खबर सामने आई है, उसके मुताबिक नीतीश कुमार ने साफ किया है कि यदि बीजेपी का कोई नेता सीएम बनता है, तो शक्ति संतुलन को बरकरार रखने के लिए पुरानी व्यवस्था को उलटना होगा। उनकी मांग है कि

  1. गृह विभाग: यह विभाग वापस जेडीयू के पास आए।
  2. दो उपमुख्यमंत्री: नई सरकार में दोनों डिप्टी सीएम जेडीयू कोटे से हों।
  3. विधानसभा अध्यक्ष: यह गरिमामय और निर्णायक पद भी जेडीयू को ही मिले।

इन शर्तों से स्पष्ट है कि नीतीश कुमार चाहते हैं कि भले ही चेहरा बीजेपी का हो, लेकिन शासन की असल चाबी जेडीयू के हाथों में रहे।

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निशांत कुमार की एंट्री और बीजेपी की चुनौती

सियासी गलियारों में एक और बड़ी चर्चा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें नई सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, ताकि राज्य में जेडीयू और परिवार की विरासत सुरक्षित रहे। हालांकि, बीजेपी के लिए इन शर्तों को मानना इतना आसान नहीं होगा। पार्टी के लिए गृह विभाग और स्पीकर का पद छोड़ना अपनी राजनीतिक जमीन को कम करने जैसा होगा। दो डिप्टी सीएम की मांग पर तो सहमति बन सकती है, लेकिन अन्य दो मांगों पर पेंच फंसना तय माना जा रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 'सत्ता हस्तांतरण' के इस खेल में कौन बाजी मारता है और बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन बनता है।

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