Edited By jyoti choudhary,Updated: 06 Mar, 2026 01:14 PM

ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका के लिए एक नई चिंता सामने आई है। अमेरिका के रणनीतिक तेल भंडार (ऑयल रिजर्व) में कमी के कारण देश अब तेल की कीमतों में संभावित झटके के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो गया है। विश्लेषकों का कहना है कि Donald Trump के...
बिजनेस डेस्कः ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका का रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) पहले की तुलना में काफी कम हो गया है, जिससे तेल की कीमतों में संभावित झटके का खतरा बढ़ गया है। Donald Trump द्वारा अपने पूर्ववर्ती Joe Biden के कार्यकाल में खाली हुए तेल भंडार को पूरी तरह दोबारा भरने का फैसला न लेने के कारण यह जोखिम और बढ़ गया है।
दरअसल, United States और Israel की ओर से Iran के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है। इस संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर करीब 3.25 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के रणनीतिक तेल भंडार में फिलहाल लगभग 415 मिलियन बैरल तेल बचा है, जो देश की खपत के हिसाब से लगभग 20 दिनों की जरूरत ही पूरी कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रणनीतिक तेल भंडार का इस्तेमाल आम तौर पर आपातकालीन स्थिति में बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति देकर कीमतों को स्थिर करने के लिए किया जाता है लेकिन भंडार कम होने के कारण अमेरिका के पास तेल की कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने के लिए पहले जितनी क्षमता नहीं रह गई है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में संघर्ष लंबा खिंचता है या तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है। इसका असर सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।