Bhalchandra Sankashti Chaturthi Vrat Katha: आज पढ़ें भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा, राह में आ रही बाधाएं होंगी दूर

Edited By Updated: 06 Mar, 2026 09:15 AM

bhalchandra sankashti chaturthi vrat katha

Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है, जिन्हें विघ्नहर्ता और संकटों को दूर करने वाला देवता माना जाता है। चैत्र...

Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है, जिन्हें विघ्नहर्ता और संकटों को दूर करने वाला देवता माना जाता है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाने वाली संकष्टी चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखने तथा पूजा करने से गणपति बप्पा प्रसन्न होकर जीवन के सभी संकट दूर करते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

PunjabKesari Bhalchandra Sankashti Chaturthi Vrat Katha

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का महत्व
सनातन शास्त्रों के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से जीवन के संकट दूर होते हैं। कार्यों में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं। 
परिवार में सुख और समृद्धि आती है। बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है। भालचंद्र स्वरूप में गणेश जी के मस्तक पर चंद्रमा का विशेष महत्व बताया गया है, इसलिए इस दिन चंद्र दर्शन भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

PunjabKesari Bhalchandra Sankashti Chaturthi Vrat Katha

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय सभी देवता किसी बड़े संकट से घिर गए। संकट से मुक्ति पाने के लिए वे भगवान शिव के पास पहुंचे। उस समय उनके साथ माता पार्वती, उनके पुत्र भगवान कार्तिकेय और श्री गणेश भी उपस्थित थे।

देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे उनके संकट को दूर करें। उनकी बात सुनकर भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों से पूछा कि उनमें से कौन देवताओं की समस्या का समाधान कर सकता है।

दोनों पुत्र इस कार्य के लिए तैयार हो गए। तब भगवान शिव और माता पार्वती ने एक उपाय सोचा। उन्होंने कहा कि जो पहले पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करके लौट आएगा, वही देवताओं की सहायता करेगा।

यह सुनते ही भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। दूसरी ओर, गणेश जी ने विचार किया कि उनका वाहन मूषक (चूहा) है, इसलिए वे पृथ्वी की परिक्रमा जल्दी नहीं कर पाएंगे। तब उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया।

उन्होंने अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती की सात बार परिक्रमा की और अपने स्थान पर बैठ गए।

जब कार्तिकेय जी पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटे, तो उन्होंने देखा कि गणेश जी पहले से ही वहां बैठे हैं। तब भगवान शिव ने समझाया, 
“माता-पिता में ही समस्त संसार का वास होता है, इसलिए उनकी परिक्रमा करना पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है।”

गणेश जी की बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें देवताओं के संकट दूर करने के लिए भेजा। तभी से गणेश जी को विघ्नहर्ता और संकटों को हरने वाला देवता माना जाता है।

PunjabKesari Bhalchandra Sankashti Chaturthi Vrat Katha

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
भक्त इस दिन निम्न विधि से पूजा करते हैं:
दोपहर को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
दूर्वा, मोदक, लाल फूल और सिंदूर अर्पित करें।
गणेश मंत्र और व्रत कथा का पाठ करें।
रात में चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलें।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर विशेष मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” इस मंत्र का जप करने से गणेश जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत कथा पढ़ना या सुनना अत्यंत आवश्यक माना गया है, क्योंकि इससे व्रत पूर्ण माना जाता है और भक्त को इसका पूर्ण फल मिलता है।

PunjabKesari Bhalchandra Sankashti Chaturthi Vrat Katha

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

 

 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!