Edited By Ramkesh,Updated: 16 Jul, 2026 02:50 PM

सरकार ओटीटी मंचों पर रिलीज होने वाली फिल्मों के प्रमाणन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमावली 2021 में बदलाव करने पर विचार कर रही है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। यह कदम 'सतलुज' फिल्म को लेकर हुए विवाद के बीच उठाया जा रहा है, जिसे बिना किसी मंजूरी...
नेशनल डेस्क: सरकार ओटीटी मंचों पर रिलीज होने वाली फिल्मों के प्रमाणन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमावली 2021 में बदलाव करने पर विचार कर रही है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। यह कदम 'सतलुज' फिल्म को लेकर हुए विवाद के बीच उठाया जा रहा है, जिसे बिना किसी मंजूरी के रिलीज किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ओटीटी मंच पर किसी भी फिल्म के रिलीज़ होने से पहले सेंसर बोर्ड से अनिवार्य प्रमाणन और मंजूरी लेने का नियम लागू करने पर विचार कर रही है जिसके लिए आईटी नियमावली में संशोधन जरूरी है।
'जी5' के खिलाफ कार्रवाई करने पर विचार कर रही केंद्र सरकार
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार बिना सेंसर वाली फिल्म 'सतलुज' दिखाने को लेकर 'जी5' के खिलाफ कार्रवाई करने पर विचार कर रही है क्योंकि यह फिल्म अब भी फिल्म प्रमाणन सेंसर बोर्ड (सीबीएफसी) के पास विचारार्थ लंबित है और इसमें कई 'काटछांट' का सुझाव दिया गया था। हालांकि, अभी ओटीटी सामग्री सीबीएफसी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है। यह फिल्म तीन जुलाई को रिलीज होने के दो दिन बाद 'जी 5' मंच से हटा दी गयी थी।
बिना प्रमाणन के निजी जगहों पर फिल्म को दिखाए
सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते इस संबंध में आदेश दिया था। बिना प्रमाणन के निजी जगहों पर 'सतलुज' फिल्म को दिखाये जाने के बारे में सरकारी अधिकारी ने कहा कि यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह कानून का पालन सुनिश्चित करे और उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ कार्रवाई करे। हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी यह फ़िल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है। उन्होंने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में हज़ारों अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार की जांच की थी और 1995 में कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने उनका अपहरण करने के बाद उनकी हत्या कर दी थी।
'सतलुज' को लेकर हो रहा है राजनीतिकरण
'सतलुज' फिल्म पंजाब में गुरुद्वारों समेत कई जगहों पर दिखायी जा रही है और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 का तीसरा हिस्सा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को ओटीटी सामग्री की निगरानी के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनयम की धारा 69ए लगाने का अधिकार देता है क्योंकि यह सामग्री सीबीएफसी के दायरे में नहीं आती है। धारा 69ए सरकार को भारत की संप्रभुता और अखंडता, रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी देशों के साथ दोस्ताना संबंध और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे आधारों पर ऑनलाइन सामग्री को प्रतिबंधित करने का अधिकार देती है।
फ़िल्म 'सतलुज' की जांच के लिए बनाई गई समिति
सरकारी सूत्रों के अनुसार, दिलजीत दोसांझ की फ़िल्म 'सतलुज' की सामग्री की जांच के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई समिति ने सिफारिश की है कि ऑनलाइन स्ट्रीमिंग मंच पर इसके सार्वजनिक प्रदर्शन पर लगी रोक जारी रहनी चाहिए, क्योंकि कथित तौर पर यह फ़िल्म भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ है।