अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर एवं हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की पहल 'अपने संविधान को जानें' विषय पर आयोजित हुआ सेमिनार

Edited By Updated: 28 Mar, 2026 01:03 AM

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देश के युवाओं विशेषकर गैर-कानूनी (Non-Law) पृष्ठभूमि के छात्रों को भारतीय संविधान की आत्मा और उसके दर्शन से अवगत कराने के उद्देश्य से आज महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (MAIMS) में "अपने संविधान को जानें" विषय पर एक भव्य सेमिनार का...

(डिजिटल डेस्क ): देश के युवाओं विशेषकर गैर-कानूनी (Non-Law) पृष्ठभूमि के छात्रों को भारतीय संविधान की आत्मा और उसके दर्शन से अवगत कराने के उद्देश्य से आज महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (MAIMS) में "अपने संविधान को जानें" विषय पर एक भव्य सेमिनार का आयोजन किया गया।

इस वैचारिक महाकुंभ का आयोजन डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार) एवं हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। उल्लेखनीय है कि आम जनमानस तक संविधान की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में इन दोनों संस्थाओं की यह पाँचवीं संयुक्त पहल है।
 
आयोजकों के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लॉ के छात्रों से इतर आम छात्रों को भी संविधान से जोड़ना है। इससे पूर्व दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय, कालिंदी महाविद्यालय, राजधानी महाविद्यालय और हंसराज कॉलेज में इस कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन हो चुका है, जिसमें अब तक 1000 से अधिक छात्र लाभान्वित होकर प्रमाण पत्र प्राप्त कर चुके हैं।
 
हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष सुधाकर पाठक ने अपने विजन को साझा करते हुए बताया कि अकादमी का प्रयास इस कार्यक्रम को दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रत्येक महाविद्यालय तक पहुँचाना है। वहीं, डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आकाश पाटिल ने उत्साहजनक शुरुआती रुझानों का हवाला देते हुए कहा कि यह पहल न केवल विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों तक, बल्कि बहुत जल्द स्कूली स्तर तक भी विस्तृत की जाएगी।
 
महाराजा अग्रसेन तकनीकी शिक्षा सोसायटी (MATES) के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. नंदकिशोर गर्ग एवं अध्यक्ष विनीत कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र के पश्चात एक गहन द्विपक्षीय परिचर्चा का आरंभ हुआ, जिसमें उपस्थित विद्वानों ने संविधान के विविध आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला:
 
आकाश पाटिल (निदेशक, डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर) ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने ओजस्वी उद्बोधन में श्री पाटिल ने जन-जन तक संविधान की पहुँच सुनिश्चित करने में अंबेडकर मेमोरियल और इंटरनेशनल सेंटर की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने 'Gen-Z' (नई पीढ़ी) के लिए इतिहास की प्रासंगिकता पर बल देते हुए 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 2026 तक की ऐतिहासिक यात्रा का सजीव चित्रण किया। उन्होंने संविधान निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति के सूक्ष्म योगदान, इसके ऐतिहासिक, वर्तमान और भविष्य के परिप्रेक्ष्य तथा डॉ. बी.आर. अंबेडकर के युगान्तकारी योगदान पर विस्तृत चर्चा की।
 
सुधाकर पाठक (अध्यक्ष, हिंदुस्तानी भाषा अकादमी) ने संविधान सभा के भीतर हुए गहन वैचारिक मंथन और राष्ट्र व धर्म के उत्कृष्ट समन्वय से तैयार हुए भारतीय संविधान की विकास यात्रा को श्रोताओं के समक्ष रखा। उन्होंने मूल संविधान की प्रति में उकेरी गई भारतीय संस्कृति की ऐतिहासिक कलाकृतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भाषा, नैतिकता और सुसंस्कारों को अपने जीवन का आधार बनाएँ। अपने अभिभाषण में उन्होंने संविधान निर्माण में 'मातृ शक्ति' (महिलाओं) के अविस्मरणीय योगदान को विशेष रूप से नमन किया।
 
संस्थान की निदेशक डॉ. ढींगरा ने MAIMS द्वारा संवैधानिक जागरूकता के लिए चलाई जा रही विभिन्न पहलों से अवगत कराया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे महाविद्यालय में छात्रों को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि नैतिकता और राष्ट्रवाद के आदर्शों के साथ जोड़कर एक सशक्त और जिम्मेदार नागरिक बनाने का कार्य किया जा रहा है।
 
उदय सिंह राठौर ने संविधान के 'बेसिक स्ट्रक्चर डॉक्ट्रिन' (मूल संरचना सिद्धांत) की महत्ता को समझाते हुए कहा कि यही सिद्धांत भारतीय लोकतंत्र को उसकी सबसे बड़ी ताकत प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि "राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा", बल्कि एक सामान्य नागरिक की भी सत्ता और लोकतंत्र में समान भागीदारी होगी। उन्होंने विशेष रूप से अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) का उल्लेख किया, जिसे डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
 
आधुनिक युग की चुनौतियों पर बात करते हुए अंकित देव अर्पण अर्पण ने साइबर लॉ और निजता के अधिकार (Right to Privacy) के बीच के संबंधों को स्पष्ट किया। उन्होंने IT Act 2000 और हाल ही में आए DPDP Act 2023 (Digital Personal Data Protection Act) को अभिव्यक्ति की आज़ादी और निजता से जोड़कर एक शानदार विश्लेषणात्मक चर्चा की। उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि एक आदर्श नागरिक के रूप में हमारी पहचान केवल मौलिक अधिकारों की माँग करने से नहीं, बल्कि अपने मौलिक कर्तव्यों (Fundamental Duties) के निष्ठापूर्ण निर्वहन से स्थापित होती है।
 
कार्यक्रम के समापन सत्र में, इस आयोजन के उपलक्ष्य में आयोजित 'निबंध लेखन प्रतियोगिता' के विजेताओं को मंच पर अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया। साथ ही, आयोजन को सफल बनाने में पर्दे के पीछे से अतुलनीय योगदान देने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया।
इस गरिमामयी आयोजन में 150 से अधिक छात्रों ने भाग लिया और संविधान के प्रति एक नई समझ व दृष्टिकोण के साथ प्रस्थान किया। संस्थान के शिक्षकों और छात्रों की सक्रिय भागीदारी ने इस कार्यक्रम को एक ऐतिहासिक सफलता में बदल दिया।

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