Edited By Tanuja,Updated: 06 Jun, 2026 03:15 PM

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने कहा कि भारत प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में एक संप्रभु राष्ट्र की तरह फैसले लेता है। उन्होंने दावा किया कि भारत पर दबाव या प्रतिबंध लगाने की कोशिशें उलटी पड़ सकती हैं और भारत-रूस संबंध...
International Desk: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता और प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत हमेशा एक संप्रभु राष्ट्र की तरह निर्णय लेता है। St. Petersburg International Economic Forum में बोलते हुए पुतिन ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और किसी भी बाहरी दबाव के आधार पर नीतियां नहीं बनाता। उन्होंने कहा कि भारत को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि कौन-सी तकनीक, उत्पाद और साझेदारी उसके लिए सबसे अधिक लाभकारी हैं।
मोदी के नेतृत्व का किया उल्लेख
पुतिन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी लंबे समय से नियमित बातचीत होती रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा भारतीय नेतृत्व के तहत भारत आत्मविश्वास के साथ अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रहा है।रूसी राष्ट्रपति के अनुसार, भारत पर दबाव बनाने या प्रतिबंधों के जरिए नीति बदलवाने की कोशिशें अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकतीं। पुतिन ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध भी लगातार विकसित हो रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि भारत विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखते हुए आगे बढ़ रहा है और किसी एक खेमे तक सीमित नहीं है।
ब्रह्मोस परियोजना का विशेष उल्लेख
रूसी राष्ट्रपति ने भारत और रूस के रक्षा सहयोग को दोनों देशों की साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने विशेष रूप से BrahMos Missile परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ संयुक्त रूप से उन्नत रक्षा तकनीकों पर काम कर रहे हैं। पुतिन ने स्पष्ट कहा कि भारत और रूस के रिश्ते किसी अस्थायी राजनीतिक माहौल पर निर्भर नहीं हैं। पुतिन के अनुसार:
- भारत और रूस केवल खरीद-बिक्री के रिश्ते तक सीमित नहीं हैं।
- दोनों देश संयुक्त अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों में भी भागीदार हैं।
- रक्षा और तकनीकी सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
- 'भारत-रूस संबंध राजनीतिक परिस्थितियों से ऊपर'
उन्होंने कहा कि"कोई भी देश रूस को यह निर्देश नहीं दे सकता कि उसे भारत के साथ सहयोग करना चाहिए या नहीं।" यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं और भारत ने रूस, अमेरिका तथा यूरोपीय देशों के साथ समानांतर संबंध बनाए रखे हैं। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस अपने साझेदारों से किए गए वादों का सम्मान करता है और भारत जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के साथ भविष्य में भी सहयोग बढ़ाता रहेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि:
- ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग जारी रहेगा।
- रक्षा साझेदारी मजबूत होगी।
- तकनीकी और औद्योगिक परियोजनाओं में नई संभावनाएं खुलेंगी।
- दोनों देशों के बीच विश्वास आधारित संबंध आगे भी कायम रहेंगे।
विश्लेषकों के अनुसार पुतिन का यह बयान केवल भारत-रूस संबंधों की प्रशंसा नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में भारत की बढ़ती भूमिका की भी स्वीकारोक्ति है। रूस यह संदेश देना चाहता है कि भारत एक स्वतंत्र वैश्विक शक्ति के रूप में अपने फैसले स्वयं लेता है और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखता है।