मां-बाप की लड़ाई में क्यों पिसे बच्चा? (PICS)

Edited By Updated: 22 Apr, 2016 11:24 AM

why crushed child s parents in the fight

बच्चों के व्यवहार पर उसके माता-पिता के व्यवहार की छाप दिखाई देती है। यह बात बहुत सारी रिसर्च में भी कहीं गई है कि बच्चे के व्यवहार में 90 प्रतिशत असर उसके अभिभावकों के व्यवहार का ही होता है।

बच्चों के व्यवहार पर उसके माता-पिता के व्यवहार की छाप दिखाई देती है। यह बात बहुत सारी रिसर्च में भी कहीं गई है कि बच्चे के व्यवहार में 90 प्रतिशत असर उसके अभिभावकों के व्यवहार का ही होता है। उनके स्वभाव और सोच पर आपको वैसी ही झलक दिखाई देगी जैसा माहौल उसे बचपन से लेकर बड़ा होने तक मिला होगा। अगर माहौल खुशनुमा हैं तो बच्चा खुश मिजाज होगा लेकिन अगर माहौल लड़ाई-झगड़े से भरा पड़ा हैं तो बच्चे का स्वभाव गुस्सैल, चिड़चिड़ा और ईर्ष्या वाला होगा। बहुत सारे मातापिता ऐसे हैं जो अपने बच्चों के सामने ही लड़ाई, बहस और मारपीट शुरू कर देते हैं लेकिन क्या उन मां-बाप ने कभी सोचा है कि ऐसा करने पर बच्चे के मन पर क्या बीतती होगी या इस लड़ाई का उनके दिमाग पर कैसा असर पड़ता होगा। ऐसे माहौल से बच्चे की लाइफ में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। वह मानसिक रूप से बीमार पड़ सकते हैं। 

* माता-पिता के झगड़ों का बच्चों पर बुरा असर

-डिप्रैशन

बच्चे डिप्रैशन का शिकार हो जाते हैं क्योंकि उन्हें खुशहाल माहौल और प्यार नहीं मिलता।

-सहमें रहना 

बच्चों के सामने मारपीट, बहस और गाली-ग्लौच करते हुए पैरेंट्स इस बात को भूल जाते हैं कि उनकी इन हरकतों की वजह से उनके बच्चे सारी उम्र डरे सहमें रहते हैं। उन्हें किसी भी रिश्ते को निभाने में डर लगता है। 

-मानसिक रूप से परेशान

ऐसे माहौल में रहने वाले बच्चों को मानसिक विकास अच्छे से नहीं हो पाता। वह बचपन की मस्तियों को खो देते हैं। कई बार तो बच्चा खुद को ही उन झगड़ों की वजह मानने लगता है।

-चिड़चिड़ा और गुस्सैल

झगड़े को देखकर उसका स्वभाव भी चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो जाता हैं, जिसका असर जीवन भर उसकी जिंदगी में देखने को मिलता हैं। यही स्वभाव आगे चलकर उसकी लाइफ में बहुत सारी प्रॉब्लम खड़ी कर देता है।

- पढ़ाई में कमजोर

ऐसे बच्चे का दिमाग कभी फ्रैश नहीं होता। वह न तो ढंग से किसी दूसरे बच्चे से बात कर पाता हैं और न ही पढ़ाई।

*इन बातों का रखें ध्यान

-माता-पिता अापसी मन-मुटाव की बातें बंद कमरे में ही निपटाएं।

-बच्चों के सामने ऐसी कोई बात न करें जो उन्हें तनाव दें।

- बच्चों को बड़ों की आपसी बातचीत से दूर रखें।

- बच्चे को खुशनुमा माहौल दें।

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