सुखना झील को कितना सुखाओगे?’ अरावली मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी

Edited By Updated: 21 Jan, 2026 02:22 PM

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अरावली पहाड़ियों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील के लगातार सूखने पर गंभीर चिंता जताई।

पंजाब डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अरावली पहाड़ियों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील के लगातार सूखने पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने इस स्थिति को अवैध निर्माण से जोड़ते हुए हरियाणा सरकार को अतीत की गलतियां दोहराने से सख़्त चेतावनी दी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राज्य के अधिकारियों और बिल्डर माफिया की मिलीभगत के कारण सुखना झील को भारी नुकसान पहुंचा है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा, “सुखना झील को कितना सुखाओगे? अधिकारियों और बिल्डर माफिया की सांठगांठ से झील को पूरी तरह नुकसान पहुंच चुका है।”

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सामने आई। नई परिभाषा को लेकर देशभर में विरोध के बाद कोर्ट ने पिछले वर्ष अपने ही आदेश पर रोक लगाते हुए इस विषय की विस्तृत जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति (CEC) का गठन किया था। इससे पहले शीर्ष कोर्ट ने सरकार द्वारा प्रस्तावित अरावली की परिभाषा को स्वीकार किया था, जिसके अनुसार 100 मीटर ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ‘अरावली पहाड़ी’ माना गया है। वहीं, 500 मीटर के दायरे में स्थित दो या उससे अधिक ऐसी पहाड़ियां तथा उनके बीच का क्षेत्र ‘अरावली पर्वतमाला’ के अंतर्गत आएगा।

बुधवार की सुनवाई के दौरान CJI ने कोर्ट की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर को निर्देश दिया कि वे सभी पक्षों और हितधारकों के सुझावों को शामिल करते हुए चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत नोट दाखिल करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अपने आगामी आदेश में ‘वन’ और ‘अरावली’ की परिभाषाओं को अलग-अलग रखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि अपने नए आदेश में "जंगलों" और "अरावली" की परिभाषा को अलग-अलग रखा जाएगा। "जंगल क्या है, इसकी परिभाषा की जांच अलग से की जाएगी। हम इसे एक व्यापक शब्द मानेंगे। अरावली के मुद्दे को सीमित रखा जाएगा"।

 

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