Edited By Pardeep,Updated: 10 Mar, 2026 10:49 PM

ईरान युद्ध के चलते पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में कुकिंग गैस के बाद हवाई यात्रा पर भी पड़ने लगा है। जेट ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण Air India और Air India Express ने अपने टिकटों पर अतिरिक्त...
नेशनल डेस्कः ईरान युद्ध के चलते पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में कुकिंग गैस के बाद हवाई यात्रा पर भी पड़ने लगा है। जेट ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण Air India और Air India Express ने अपने टिकटों पर अतिरिक्त ईंधन शुल्क लगाने का फैसला किया है।
एयरलाइन के मुताबिक 12 मार्च से हर घरेलू उड़ान के टिकट पर 399 रुपये का अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगाया जाएगा। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी ईंधन अधिभार बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
घरेलू और SAARC देशों की उड़ानों पर लगेगा 399 रुपये का चार्ज
एयर इंडिया समूह ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि नई फ्यूल सरचार्ज प्रणाली चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। पहले चरण में 12 मार्च से घरेलू उड़ानों और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी South Asian Association for Regional Cooperation देशों के लिए जाने वाली उड़ानों पर प्रति टिकट 399 रुपये का अतिरिक्त ईंधन शुल्क जोड़ा जाएगा। एयरलाइन का कहना है कि जेट फ्यूल की कीमतों में अचानक आई बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लेना जरूरी हो गया है।
कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर भी बढ़ा अधिभार
एयरलाइन के बयान के अनुसार अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर अलग-अलग फ्यूल सरचार्ज लगाया जाएगा।
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पश्चिम एशिया जाने वाली उड़ानों पर 10 अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त शुल्क
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अफ्रीका जाने वाली उड़ानों पर 90 अमेरिकी डॉलर का अधिभार
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दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए उड़ानों पर 60 अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त चार्ज
ये सभी बदलाव 12 मार्च से लागू हो जाएंगे।
सिंगापुर की उड़ानें भी होंगी प्रभावित
एयरलाइन ने यह भी बताया कि नए नियमों के तहत Singapore जाने वाली उड़ानों पर भी फ्यूल सरचार्ज लगाया जाएगा। अभी तक सिंगापुर की सेवाओं पर कोई ईंधन अधिभार नहीं लिया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन उड़ानों पर भी अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
पश्चिम एशिया के तनाव का असर
एयर इंडिया समूह के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण जेट ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में ईंधन महंगा हो गया है। इसका सीधा असर एयरलाइंस की परिचालन लागत पर पड़ रहा है।
एयरलाइंस की लागत का बड़ा हिस्सा होता है जेट फ्यूल
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी एयरलाइन के कुल संचालन खर्च में जेट फ्यूल का हिस्सा लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक होता है। जब ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं तो एयरलाइंस को अतिरिक्त लागत का बोझ उठाना पड़ता है। ऐसे में कंपनियां अक्सर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाकर उस लागत की भरपाई करने की कोशिश करती हैं।
यात्रियों पर पड़ेगा सीधा असर
नए फ्यूल सरचार्ज लागू होने के बाद अब यात्रियों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों के लिए ज्यादा किराया देना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहा और जेट फ्यूल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले समय में हवाई यात्रा और महंगी हो सकती है।