ज्ञानवापी मामला: न्यायालय ने हिंदू एनजीओ के प्रमुख के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया

Edited By Updated: 17 May, 2022 10:17 PM

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नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद कमेटी की याचिका में हस्तक्षेप करने और उसका विरोध करते हुए याचिका दायर करने वाले एक हिंदू संगठन के प्रमुख के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया।

नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद कमेटी की याचिका में हस्तक्षेप करने और उसका विरोध करते हुए याचिका दायर करने वाले एक हिंदू संगठन के प्रमुख के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया।
मस्जिद कमेटी ने ज्ञानवापी-श्रृंगार गौर परिसर के सर्वे को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरिसम्हा की पीठ ने सवाल किया, ‘‘आप कौन हैं’’। पीठ ने कहा कि किसी दीवानी वाद में इस तरह के हस्तक्षेप के लिए शायद ही कोई गुंजाइश होती है।
गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता बरुण कुमार सिन्हा ने कहा, ‘‘मैं एक श्रद्धालु हूं। ’’
हालांकि, पीठ ने अधिवक्ता से कहा, ‘‘आपको पता होना चाहिए कि यह एक दीवानी वाद है और किसी हस्तक्षेपकर्ता की कोई भूमिका नहीं है। ’’
गुप्ता ने हस्तक्षेप याचिका में कहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर को उपासना स्थल अधिनियम,1991 से छूट प्राप्त है। याचिका में कहा गया है कि ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी परिसर प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम,1958 के तहत आता है और उपासना स्थल अधिनियम,1991 के तहत नहीं आता।
इसमें कहा गया है, ‘‘हिंदू संस्कृति और सभ्यता विदेशियों का शिकार बनती रही है। यह सच्चाई है कि इस देश में खिलजी वंश से लेकर मुगल वंश तक मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा मंदिरों को मस्जिदों में तब्दील कर दिया गया। ’’
वहीं, मुस्लिम पक्षकार का कहना है कि इस स्थान का उपयोग पुरातन काल से एक मस्जिद के रूप में किया जाता रहा है।


यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।
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