यूक्रेन से भारत लाए गए बच्चे का कल्याण सुनिश्चित करना अनिवार्य : अदालत

Edited By Updated: 29 Nov, 2022 08:30 PM

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नयी दिल्ली, 29 नवंबर (भाषा) रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान एक व्यक्ति द्वारा अपने बच्चे को वहां से भारत लाए जाने के मामले में सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि तीन साल का बच्चा कोई "वस्तु" नहीं है और उसका कल्याण एवं भलाई...

नयी दिल्ली, 29 नवंबर (भाषा) रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान एक व्यक्ति द्वारा अपने बच्चे को वहां से भारत लाए जाने के मामले में सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि तीन साल का बच्चा कोई "वस्तु" नहीं है और उसका कल्याण एवं भलाई सुरक्षित करना अनिवार्य है।

बच्चे की मां ने आरोप लगाया है कि बच्चे को उसके पिता द्वारा अवैध रूप से यहां लाया गया है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ ने माता-पिता और बच्चे के साथ बातचीत करने के लिए एक बाल परामर्शदाता नियुक्त किया और टिप्पणी की कि बच्चे को और अधिक आघात नहीं पहुंचाया जा सकता।

पीठ ने कहा कि इस अदालत को बच्चे के कल्याण के बारे में विचार करना है। पीठ ने कहा कि अदालत मां और पिता के पारस्परिक संबंधों पर विचार नहीं कर ही और उसके लिए अनिवार्य है कि वह बच्चे के कल्याण और भलाई का ख्याल रखे।

पीठ ने कहा कि एक बार रिपोर्ट मिल जाने के बाद अदालत को बेहतर जानकारी हो सकेगी कि बच्चे का कल्याण कहां होगा।

अदालत ने कहा कि जाहिरा तौर पर यूक्रेन में संकट है और वह इससे "आंखें नहीं मूंद सकती।" उसने याचिकाकर्ता मां से सवाल किया कि क्या वह कुछ और समय भारत में रह सकती हैं ताकि वह अधिक समय तक बच्चे के संपर्क में रह सकें।

पीठ ने कहा “आपका कहना है कि आप जहां रहती हैं, वहां (युद्ध) नहीं है। हम उस धारणा पर आगे नहीं बढ़ सकते। यह (युद्ध) कुछ समय से चल रहा है और दुर्भाग्य से इसका कोई अंत नहीं दिख रहा है।’’
अदालत ने कहा कि वह इस बात को समझती है कि बच्चे को अपने माता-पिता और अपनी बहन दोनों की जरूरत है।

इस मामले में अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।



यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

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