रवाना हुआ नासा का उपग्रह, धरती के चुबंकीय क्षेत्र का करेगा अध्ययन

Edited By ,Updated: 13 Mar, 2015 08:00 PM

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धरती के चुंबकीय क्षेत्र की धाराओं के परस्पर टकराने से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा और उससे आवेशित होने वाले कणों का गहन अध्ययन करने के लिए अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के ...

केप केनेवरल, फ्लोरिडा: धरती के चुंबकीय क्षेत्र की धाराओं के परस्पर टकराने से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा और उससे आवेशित होने वाले कणों का गहन अध्ययन करने के लिए अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के चार उपग्रहों को आज यहां वायुसैनिक अड्डे से सफलातपूर्वक प्रक्षेपित कर दिया गया।  

इन उपग्रहों को लेकर 20 मंजिले राकेट एलटस 5 ने अंतरराष्ट्रीय समयानुसार 8 बजकर 14 मिनट पर उडान भरी। राकेट में चारों उपग्रहों को इस तरह लगाया गया था जिससे अंतरिक्ष में जाते ही चारों उपग्रह पिरामिड के आकार में धरती की कक्षा में स्थापित हो सकें। ऐसा इसलिए किया गया ताकि धरती के चुबंकीय क्षेत्र की धाराओं के परस्पर टकराने से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा और उससे आवेशित होने कणों की त्रिआयामी तस्वीरें उतारी जा सकें। 

प्रक्षेपण के दो घंटे से भी कम समय के भीतर ही चारों उपग्रहों को धरती की पूर्व निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया गया। प्रत्येक उपग्रह में 25 संवेदक लगे हुए हैं जो धरती के चुबंकीय क्षेत्र में आवेशित कणों की प्रति सेंकंड की गतिविधियां भी रिकार्ड कर सकते हैं।  

सभी ग्रहों, तारों और मंदाकिनियों और यहां तक की श्याम विविरों के भी अपने चुबंकीय क्षेत्र होते हैं। जब इस क्षेत्र की चुंबकीय धाराएं एक दूसरे से टकराती हैं तो इससे बड़ी ऊर्जा उत्पन्न होती है और इस क्रम में लाखों आवेशित कण अंतरिक्ष में दूर दूर तक फैल जाते हैं। ब्रह्मांड में ये गतिविधियां अनंत काल से जारी हैं लेकिन अभी तक इनके बारे मे बहुत कम ही पता चल पाया है। नासा ने इस बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल करने के लिए एक अरब डालर की लागत से मैग्नेटोस्फेरिक मल्टीस्केल परियोजना शुरू की है। आज प्रक्षेपित किए गए उपग्रह इस योजना का ही हिस्सा हैं।

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