साल में एक बार आता है धन के देवी-देवता को प्रसन्न करने का खास मौका

  • साल में एक बार आता है धन के देवी-देवता को प्रसन्न करने का खास मौका
You Are HereVastu Shastra
Thursday, October 20, 2016-3:30 PM

पंच पर्व में आने वाली त्रयोदशी को धनतेरस (28 अक्टूबर, शुक्रवार) व अमावस्या (30 अक्टूबर, रविवार) पर पड़ने वाली दीपावली का बहुत महत्व है। यह साल के दो ऐसे दिन हैं, जब धन के देवी-देवता को प्रसन्न करने का खास मौका प्राप्त होता है। धनतेरस पर कुबेर देव और दीवाली पर देवी लक्ष्मी के पूजन का विधान है।


अनुश्रुति के अनुसार धनतेरस और दीपावली को किया गया दान, हवन, पूजन व उपाय करने से अक्षय गुणा फल प्राप्त होता है। तंत्र शास्त्र में कहा गया है इन दो दिनों में कुछ खास उपाय करने से अथवा वस्तुओं को घर में स्थान देने से कभी आर्थिक अभाव का सामना नहीं करना पड़ता।



आईए जानें कौन सी हैं वो वस्तुएं और उपाय
* धनतेरस या दीपावली को सूर्यास्त के बाद कौड़ियां रखकर धन कुबेर और देवी लक्ष्मी का पूजन करें। आधी रात के उपरांत कौड़ियां घर के किसी कोने में गाड़ दें। धन प्राप्ति के योग बनने लगेंगे।



* कुबेर यंत्र लाएं, उसे दुकान के गल्ले या तिजोरी में स्थापित करें। फिर 108 बार इस मंत्र का जाप करें। 



मंत्र
ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन्य धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि में देहित दापय स्वाहा


धन संबंधित परेशानियों का अंत होगा।


* महालक्ष्मी यंत्र को घर अथवा कार्य स्थान पर स्थापित करें। जनश्रुति के अनुसार यह यंत्र जहां स्थापित होता है वहां स्वर्ण वर्षा होने लगती है।


* घर में रखी चांदी, सिक्के और रुपयों का केसर और हल्दी लगाकर पूजन करें। बरकत बढ़ेगी।


* लक्ष्मी मंदिर में कमल के फूल चढ़ाएं, सफेद रंग के मिष्ठान का भोग लगाएं। धन से संबंधित सभी परेशानियों का नाश होगा।


* जीवन में धन का प्रवेश करवाने के लिए संध्या समय घर के ईशान कोण में गाय के शुद्ध घी का दीपक लगाएं। बाती के लिए मौली का प्रयोग करें। जब दिया प्रज्वलित हो जाए तो उसमें थोड़ा सा केसर भी डालें।



* चांदी से निर्मित लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं लाएं। प्रतिदिन इनका पूजन करने से घर में धन, सुख और वैभव वास करते हैं।


* अष्टसिद्धि व नवनिधि की चाह करने वाले जातक श्रीकनकधारा यंत्र की स्थापना घर अथवा दुकान में करें।


* श्रीमंगल यंत्र को घर में स्थापित करें, प्रतिदिन इसका पूजन करने से अपार संपत्ति की प्राप्ति होती है।  


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