लक्ष्मी आगमन से पूर्व करें कुबेर के स्वागत की तैयारी

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You Are HereVastu Shastra
Thursday, October 27, 2016-12:41 PM

धनतेरस पर धन के देवता कुबेर और मृत्यु के देवता यमराज की पूजा करने का विधान है। उत्तर दिशा को कुबेर का स्थान माना जाता है। इस स्थान को जितना हो सके खाली रखें और प्रतिदिन सुबह पानी से धोकर साफ करें। फिर तांबे के बर्तन में गंगा जल लेकर उत्तर दिशा और तिजोरी में छिड़काव करें, इस उपाय से कुबेर के स्वागत की तैयारी होती है।


- आम के पत्ताें अथवा बिल्व पत्र का बंधन बना कर मुख्य द्वार पर लगाएं। 


- मां लक्ष्मी और कुबेर जी का चित्र अथवा श्री रूप उत्तर दिशा की ओर स्थापित करें। इससे उत्तर दिशा सक्रिय होगी एवं धन आगमन में आने वाली समस्त बाधाओं का नाश होगा। 


- घर के बाहर तथा घर के भीतर चार काेनाें वाला दीया अवश्य जगाएं। राेशनी की ये चार लाै माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर देवता एवं इन्द्र देवता का प्रतीक मानी गई है।  


- रंग-बिरंगी रंगाेली से घर को सजाने के लिए पहले ही रंग बना कर रख लें और उन्हें अच्छी धूप दिखाएं।


- वास्तु के हिसाब से घर में कम से कम 3 दिन की सफाई जरूरी है एक दिन दीपावली से पहले, दीपावली के दिन तथा काली चाैदस यानि दीपावली के दूसरे दिन। सफाई करते समय सेंधा नमक पानी में डाल कर पोछा लगाएं तथा घर के प्रत्येक काेने में नमक मिले पानी से साफ-सफाई करें ताकि घर में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा काे खत्म किया जा सकें।


- घर के मुुख्य प्रवेश द्वार पर लाल रंग के सिंदूर से स्वास्तिक का चिन्ह आगे व पीछे दाेनाें तरफ बनाएं। सुख एवं समृद्धि का प्रवेश हाे एवं दुख आैर दरिद्रता घर से बाहर प्रस्थान करें। 


-वास्तु सिद्धांत के अनुसार दीपावली पर अपने घर की 27 चीजाें का स्थान परिवर्तन अवश्य करें। इसका उद्देश्य आपके जीवन में आई हुई रूकावटाें काे दूर करना है आैर कमाल की बात है कि हमारे नक्षत्राें की गिनती भी 27 ही हाेती है। यदि आप घर के बर्तन काे उठाकर दूसरी जगह पर रखते हैे ताे उसे भी स्थान परिवर्तन ही माना जाता है। इस तरह 27 वस्तुआें का स्थानातरण करके अपने रूके हुए जीवन काे प्रगतिशील बनाया जा सकता है।
 


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