गौ माता

Edited By Updated: 28 Mar, 2018 05:15 PM

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हिंदू धर्म में गाय को मां के समतुल्य माना जाता है गाय के शरीर में हजारों देवी देवताओं का प्रवेश माना जाता है गौ माता के मल-मूत्र मैं भी शुद्धता पाई जाती है गाय का दूध बहुत ही पौष्टिक व बहुमूल्य होता है विज्ञान ने भी गाय के महत्व को स्वीकार किया है...

हिंदू धर्म में गाय को मां के समतुल्य माना जाता है गाय के शरीर में हजारों देवी देवताओं का प्रवेश माना जाता है गौ माता के मल-मूत्र मैं भी शुद्धता पाई जाती है गाय का दूध बहुत ही पौष्टिक व बहुमूल्य होता है विज्ञान ने भी गाय के महत्व को स्वीकार किया है इस वर्ष के बजट में माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी ने गाय संरक्षण को लेकर बजट में विशेष प्रावधान देखकर गौ माता को कोटि कोटि प्रणाम किया है इसके लिए प्रदेश की समस्त जनता बजट निर्माता टीम ब यशस्वी मुख्यमंत्री श्री जय राम ठाकुर जी का धन्यवाद करती है।

 

इस वर्ष के बजट में गोवंश के संरक्षण पर फोकस किया गया है प्रदेश सरकार ने गौ सेवा आयोग का गठन करने जा रही है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गोवंश संरक्षण मुहिम को मुख्यमंत्री ने धरातल पर उतारने की कोशिश की है गौ सेवा आयोग द्वारा गोवंश संरक्षण को कृषि से जोड़कर इसमें किसानों की आर्थिकी सुधारने का काम किया जाएगा प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है तथा प्रदेश सरकार द्वारा शून्य बजट पर जैविक खेती की मुहिम को भी चलाया जा रहा है इन दोनों लक्ष्यों की पूर्ति के लिए गौ संरक्षण करना अति अनिवार्य है गौ संरक्षण बड़ी-बड़ी बातें करके या पोस्टर- बैनर लगाकर नहीं किया जा सकता इसके लिए एक निर्धारित व योग्य नीति का निर्धारण करना होगा तथा एक ऐसी कमेटी का गठन भी करना होगा जोकि पशुओं से संबंधित वास्तविक समस्याओं से अवगत हो इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए फंड की आवश्यकता महसूस होती है।

 

हिमाचल के इतिहास में किसी ने भी गौ संरक्षण के लिए फंड की व्यवस्था नहीं की लेकिन इस बजट में गौ संरक्षण के लिए फंड की व्यवस्था की गई है जिसमें शराब की बोतल पर एक रुपए गोवंश सेंस लगाया गया है जो कि पूरे देश में गौ संरक्षण को लेकर एक अनूठा प्रयास है इसके अतिरिक्त गोमूत्र आधारित उद्योगों को 50% उपदान दिया जाएगा मंदिर न्याय अधिनियम में संशोधन कर चढ़ावे का 15% से गोवंश संरक्षण किया जाएगा यह ऐतिहासिक निर्णय है हिमाचल प्रदेश के मंदिरों में चढ़ावे के रूप में हर बरस करोड़ों की संपत्ति एकत्रित होती है यदि इस संपत्ति में से 15% गौ माता के संरक्षण पर सेवा में लगाया जाएगा तो निश्चित तौर पर यह उम्मीद जताई जा सकती है कि प्रदेश में अब गौमाता आवारा सड़कों पर नहीं घूमेगी तथा भूख-प्यास से नहीं मरेगी।

 

गोसदन स्थापित करने के लिए सरकारी भूमि एक रुपए पर पट्टे पर देने की घोषणा की गई है तथा बेसहारा पशु रहित पंचायत को 1000000 पुरस्कार देने की घोषणा भी की गई है किसी भी कार्य की सफलता के लिए स्टिक नीति का निर्धारण तथा उसके संचालन व कार्यान्वयन के लिए एक दूरदर्शी सोच का होना भी आवश्यक है इसके अतिरिक्त पर्याप्त धन व उसकी धरातलीय पहुंच का आंकलन करने के लिए एक संस्था या संगठन का होना भी अति आवश्यक होता है तथा अच्छे कार्य को सरकारी संरक्षण व पुरस्कार के तड़के से और भी निखार आ जा सकता है माननीय मुख्यमंत्री जी ने गौ संरक्षण के लिए एक आयोग के गठन करने की घोषणा उसके संचालन की व्यवस्था करना तथा पर्याप्त धन के स्त्रोतों की पहचान करना व इस संदर्भ में अच्छे कृत्य करने पर पुरस्कृत करना सोच को दर्शाता है।

 

आज गौमाता की स्थिति बहुत दयनीय है हिमाचल प्रदेश को वैश्विक पटल पर देवभूमि की उपमा से पुकारा जाता है प्रदेश की अधिकतर जनता हिंदू धर्म में विश्वास रखती है और हिंदू धर्म वैदिक संस्कृति में गौ माता के पूजन व समृद्धि का गुणगान देखने को मिलता है एक समय ऐसा भी था की गाय प्रदेश के हर घर में गाय को बड़े गौरव ब सम्मान से पाला जाता था गाय से ही मनुष्य के जीवन की सुबह होती थी दिनभर गौ माता की सेवा करने पर उसी के दूध से परिवार के बच्चों, बड़ों तथा वृद्धों का भरण पोषण होता था उसी के गोबर से खेती-बाड़ी को खाद मिलती थी तथा फसल सौ प्रतिशत जैविक तरीके से की जाती थी लेकिन धीरे-धीरे समय बदला पाश्चात्य संस्कृति की अंधी दौड़ में मानव को इतना अंधा बना दिया कि वह गौ माता जैसे बहुमूल्य व उपयोगी पशु को भी हमारा छोड़ने पर मजबूर हो गया बाजार में उपलब्ध केमिकल से बने हुए दूध फलों व सब्जियों का भोगी बन गया इसका खामियाजा आज की जनरेशन को भुगतना पड़ रहा है आज की जनरेशन विभिन्न तरह की बीमारियों से पीड़ित है है जिसके पीछे उनका खान पान केमिकल से युक्त खाद्य सामग्री का उपयोग माना जा सकता है।

 

अक्सर सड़कों पर गौमाता की दयनीय स्थिति को देखकर हर किसी के मन में दया का भाव तो आता ही होगा लेकिन आज का मानव इतना लाचार दिखता है कि उसके पास सब कुछ होने के बावजूद भी वह गौ माता के संरक्षण को लेकर कुछ नहीं कर पा रहा है आज सूचना प्रौद्योगिकी के आविष्कार से मानव जीवन को सरल बना दिया है सुविधाओं का घर द्वार में आगमन हुआ है फिर भी किसी के पास फुर्सत के 2 मिनट भी नहीं है ऐसी दिनचर्या ने गौ माता को दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर किया है प्रदेश में करीब 90 फ़ीसदी संता ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है और लगभग 80 से 90% जनता कृषि को करने में समर्थ है गांव में हर घर में एक गाय को पाला जा सकता है उसी के गोबर ब मुंत्र से से जैविक खेती की जा सकती है माननीय राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी द्वारा शून्य बजट पर जैविक खेती की जो युक्ति सुझाई गई है उसके द्वारा गौ संरक्षण से भी किया जा सकता है तथा उसी गाय के गोबर ब मुत्र से जैविक खेती करके उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है तथा बाजार में उपलब्ध जहरीले पदार्थों से अपने स्वास्थ्य को बचाया जा सकता है।

 

यह सब कुछ बिना किसी खर्चे से किया जा सकता है प्रदेश का किसान गाय के गोबर से ही जैविक खेती करना सीख जाए तो वर्ष 2022 में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के किसानों की आय को दुगना करने के सपने को साकार किया जा सकता है अब समय आ चुका है आज के मानव को समझना होगा अपने स्वास्थ्य को बचाने के लिए हमें अपने घरों में गाय को पालना होगा तथा गौ माता की सेवा से ही अपने जीवन को समृद्ध व फलीभूत करने की प्राचीन परंपरा को अपनाना होगा पूरे भारतवर्ष में गौ संरक्षण को लेकर कई संस्थाएं काम कर रही है जो कि गौ सदनों के माध्यम से तथा दान कर्ताओं द्वारा धनराशि उपलब्ध करवा कर गौ सेवा में लीन है लेकिन हिमाचल प्रदेश में इस बजट में एक ऐसी दूरदर्शी सोच की उपज दिख रही है जो कि पूरे भारत में कहीं पर भी नहीं है गौ रक्षा के लिए आंदोलन चाहे जितने मर्जी कर लिए जाएं जितनी मर्जी बड़ी-बड़ी बातें कर ली जाए सब व्यर्थ है यदि इंसान इंसान की मंशा अच्छी नहीं है गौमाता तभी सुरक्षित रह पाएगी जब उसको सरकारी नीति निर्धारण का सजग व ईमानदार विजन मिलेगा तथा जन जन को गौ माता की पवित्रता के बारे मे जागरूकता से ही गाय माता को बचाया जा सकता है।

 

प्रदेश को एक ऐसे मुख्यमंत्री मिल चुके हैं जो कि गौ माता की भूमिका को भली भांति समझते हैं तथा उसके सरंक्षण के प्रति सचेत भी है यही कारण होगा कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने अपने पहले ही बजट में गौमाता को विशेष महत्व दिया तथा एक सुस्पष्ट विजन को भी प्रस्तुत किया यह सराहनीय कार्य है इस कृत्य की सफलता के लिए प्रदेश की जनता से भी भरपूर सहयोग की उपेक्षा की जाती है ताकि आने वाले समय में हमें गौ माता सड़कों पर आवारा पशुओं की तरह घूमती हुई पेट की ब भूख को मिटाने के लिए लिफाफे गंदगी को खाते हुए ना दिखे इसके लिए जितना भी संभव हो सके हमें सरकार का सहयोग करना चाहिए।

 

कर्म सिंह ठाकुर सुंदर नगर
 

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