Edited By ,Updated: 30 Aug, 2026 02:12 AM

भाजपा सांसद और अभिनेत्री ‘कंगना रनौत’ द्वारा 28 जुलाई, 2026 को जंतर-मंतर पर ‘काक्रोच जनता पार्टी’ द्वारा आयोजित नीट परीक्षा सम्बन्धी विरोध प्रदर्शन में शामिल लड़कियों बारे आपत्तिजनक बयान देने पर विवाद खड़ा हो गया था जिसमें कंगना ने उन्हें ‘गटर...
भाजपा सांसद और अभिनेत्री ‘कंगना रनौत’ द्वारा 28 जुलाई, 2026 को जंतर-मंतर पर ‘काक्रोच जनता पार्टी’ द्वारा आयोजित नीट परीक्षा सम्बन्धी विरोध प्रदर्शन में शामिल लड़कियों बारे आपत्तिजनक बयान देने पर विवाद खड़ा हो गया था जिसमें कंगना ने उन्हें ‘गटर जैनरेशन’ (गटर छाप) बताते हुए उन पर यौन सम्बन्ध बनाने आदि के कई आरोप लगाए थे।
कंगना ने कहा था कि‘‘स्वतंत्र जीवन हासिल करना पड़ता है। अगर आप बिना कोई जिम्मेदारी उठाए आजाद जीवन जीने की कोशिश करती हैं तो आप बस एक विकृत सोच वाली व्यक्ति या ‘गटर छाप’ शख्स बन कर रह जाती हैं। वे ड्रग्स लेने, शराब पीने या कई लोगों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने की अपनी आजादी का गर्व से दिखावा करते हैं जबकि असल में अपने माता-पिता की कमाई पर बेशर्मी से जीते हैं। आजाद जिंदगी कमानी पड़ती है। यह तथाकथित पश्चिमी सोच वाली भारतीय महिलाओं की नई पीढ़ी है जिन्हें मैं ‘जैनरेशन गटर’ कहती हूं।’’
फिल्म उद्योग के कई लोगों के अलावा राजनीतिक हस्तियों ने भी ‘कंगना रनौत’ के उक्त बयान की आलोचना की।
अपने इस बयान को लेकर ‘कंगना’ ने कोई माफी नहीं मांगी बल्कि उसका बचाव किया तथा इस बयान पर विवाद तब शुरू हुआ जब एक न्यूज चैनल ने ‘स्वामी रामदेव’ से ‘कंगना’ के बयान के बारे में पूछने पर ‘रामदेव’ ने उसकी कड़ी निंदा की व कहा : ‘‘उनकी क्वालीफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के युवाओं को जेन जैड को गटर-पटर बोलना बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनकी पार्टी के सीनियर लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।’’
स्वामी रामदेव से यह पूछने पर कि, ‘‘वह आपके योग की प्रशंसक रही हैं।’’ उन्होंने उत्तर दिया, ‘‘मेरी प्रशंसा करें, योग की प्रशंसा करें तो (क्या) मैं उनके गुनाहों पर यहां लीपापोती कर दूं!’’ बाबा रामदेव का यह बयान आते ही ‘कंगना’ ने कहा कि ‘स्वामी रामदेव’ उन्हें चरित्र का पाठ न पढ़ाएं और उनकी चिंता न करें। ‘कंगना’ ने अपनी ‘इंस्टाग्राम स्टोरी’ पर स्वामी रामदेव पर सीधा हमला बोलते हुए लिखा, ‘‘बाबा जी, मेरी जवानी या बैडरूम के बारे में दिन में सपने मत देखो।’’ ‘‘क्या ‘रामदेव’ मेरे बैडरूम में चमगादड़ बन कर लटके थे? मुझे समझ नहीं आता कि उन्होंने क्या देखा? उन्होंने जो भी देखा, बताना चाहिए था जिस तरह वह नारंगी वस्त्र पहनते हैं, उन्हें ‘रामदेव’ ने शर्मसार किया है।’’ एक टी.वी. चैनल को इंटरव्यू में ‘कंगना’ ने कहा,‘‘उन्होंने लोगों की जमीन हथिया ली है। लोग बिलख रहे हैं। सुप्रीमकोर्ट से भी उनको फटकार लगती है। कम से कम मुझे झूठे या फ्राड मैडीकल दावों की वजह से कभी सुप्रीम कोर्ट से फटकार नहीं लगी। उन्हें हमारे आयुर्वेद, जड़ी-बूटी औषधि योग को लेकर प्रोत्साहन मिला था पर अब वह पूरी तरह व्यापारी बन गए हैं।’’
‘‘व्यापारी बनने में कोई दिक्कत नहीं है पर आपको सनातनी का चोला नहीं पहनना चाहिए। ‘रामदेव’ जो बनियान व अंडरगार्मैंट्स बेच रहे हैं इसमें उनका ढोंग और पाखंड दिखता है। यह फैक्ट्स पर बेस्ड है, गॉसिप पर नहीं तो मुझे करैक्टर पर ज्ञान मत दीजिए। मेरा चरित्र आपसे कहीं अधिक बेहतर है और यहां कोई धोखाधड़ी नहीं है। ‘बाबा रामदेव’ जैसे लोग यदि सनातनियों को शर्मिंदा करेंगे तो उन्हें कौन बर्दाश्त करेगा! हिंदू धर्म के अनुसार चलना बड़ी तपस्या है।’’दोनों के बीच यह जुबानी जंग 28 अगस्त को एक नाटकीय घटनाक्रम के बाद समाप्त हो गई जब ‘स्वामी रामदेव’ ने ‘कंगना रनौत’ को मिठाई और उपहार व 500-500 रुपए के नोटों की एक गड्डी के साथ संदेश भेजा कि ‘‘रिश्तों में मिठास बनी रहनी चाहिए व पुराने गिले-शिकवे भूल कर प्रेम से आगे बढऩा चाहिए।’’
‘कंगना रनौत’ ने भी ‘स्वामी रामदेव’ का शांति प्रस्ताव स्वीकार करके इस विवाद को विराम दे दिया है और उन्होंने अपने मोबाइल पर स्टेटस लगाकर लिखा है कि ‘‘त्यौहार का दिन होता है सब भूल-चूक माफ करने के लिए। मेरे बड़े भाई रामदेव जी ने बहुत अच्छी बात कही है कि विवाद नहीं संवाद होना चाहिए। आज रक्षा बंधन के दिन मैं उनकी मिठाई और बड़े भाई का प्रेम दोनों स्वीकार करती हूं। बहुत धन्यवाद! ईश्वर आपको लंबी आयु दें।’’ जो भी हो, राजनीतिक विश्लेषकों ने अब इसके पीछे राजनीतिक अर्थ खोजने शुरू कर दिए हैं कि इतनी तीखी जुबानी जंग के बाद अचानक एकदम से हुई शांति के पीछे निहित अर्थ क्या हो सकते हैं। रक्षा बंधन भाई-बहन के निश्छल प्रेम और सद्भाव का त्यौहार है और ऐसे में कंगना ने स्वामी रामदेव को बड़े भाई के रूप में और उनका उपहार स्वीकार करके बुद्धिमत्ता का ही प्रदर्शन किया है।—विजय कुमार