Edited By ,Updated: 23 Feb, 2026 03:55 AM

अमरीका के सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से सुनाए एक फैसले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को तगड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा विभिन्न देशों पर टैरिफ लगाने के लिए एमरजैंसी शक्तियों के इस्तेमाल को अमान्य करार देकर उस पर रोक लगाने के साथ ही टैरिफ दर के...
अमरीका के सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से सुनाए एक फैसले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को तगड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा विभिन्न देशों पर टैरिफ लगाने के लिए एमरजैंसी शक्तियों के इस्तेमाल को अमान्य करार देकर उस पर रोक लगाने के साथ ही टैरिफ दर के अंतर्गत इकट्ठी की गई रकम सम्बन्धित देशों को लौटाने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले से भड़के ट्रम्प ने फैसला सुनाने वाले जजों को अपशब्द कहते हुए मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं और उन्हें मूर्ख तथा गोद में बैठे हुए कुत्ते करार दे दिया जो दूसरे देशों को बचाने के लिए विदेशी प्रभाव के आगे झुक गए। इसके साथ ही ट्रम्प ने आॢटकल 232 के कानून के अंतर्गत टैरिफ लगाने की धमकी भी दे डाली है।
बहरहाल, टैरिफ हटाने की इस सारी प्रक्रिया के पीछे अमरीकी सुप्रीम कोर्ट में भारतीय मूल के एडवोकेट ‘नील कत्याल’ की मुख्य भूमिका रही है। शिकागो में जन्मे ‘नील कत्याल’ के माता-पिता भारत से आकर अमरीका में बसे थे। उनकी मां बच्चों की डाक्टर तथा पिता इंजीनियर थे। नील कत्याल को 2011 में अमरीकी न्याय विभाग द्वारा आम नागरिकों को दिए जाने वाले सबसे बड़े अवार्ड ‘एडमंड रैडोल्फ’ से भी सम्मानित किया गया है। 50 केस लड़ चुके ‘नील कत्याल’ ने पूर्व एकिं्टग सोलिसिटर जनरल के तौर पर इस केस में छोटे बिजनैस समूहों का प्रतिनिधित्व किया तथा कहा कि इस प्रकार के लगााए जा रहे टैरिफ वैध नहीं हैं। उनके तर्कों को सुप्रीम कोर्ट ने सही और तथ्यपूर्ण माना। इसी फैसले से बौखलाए ट्रम्प ने 10 प्रतिशत (और शाम तक उसे 15 प्रतिशत कर दिया) टैरिफ की धमकी भी दे डाली है।
बहरहाल जजों द्वारा 6-3 के अंतर से सुनाया गया फैसला ट्रम्प की बड़ी हार के रूप में देखा जा रहा है और यह उनके दूसरे कार्यकाल में प्रैसिडैंशियल पावर बढ़ाने की कोशिशों पर रोक लगाने का एक बहुत बड़ा प्रयास है। कोर्ट में उनकी हार का असर न सिर्फ ट्रेड पर बल्कि उनकी पूरी आॢथक और विदेश नीति पर भी पड़ेगा। उन्होंने बार-बार टैरिफ और उनकी धमकी का इस्तेमाल दुश्मनों और साथियों, दोनों को हराने के लिए किया है। एक वर्ष पूर्व जब से ट्रम्प ने पद संभाला है सुप्रीमकोर्ट ने उन्हें कई विजय दिलाई हैं जिससे कम से कम कुछ समय के लिए इमिग्रेशन, सरकारी एजैंसियों की आजादी और ट्रांसजैंडर मिलिट्री ट्रुप्स पर उनके प्रशासन की कई सबसे आक्रामक नीतियों का रास्ता साफ हो गया है। यह पहला मौका था जब कोर्ट ने टैरिफ पर ‘मैरिट्स डिसीजन’ जारी किया जो ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान की गई कार्रवाइयों में से एक की वैधता पर सीधा फैसला और न्यायपालिका की स्वतंत्रता का एक सशक्त प्रदर्शन था। ध्यान रहे कि न्यायाधीशों में से 6 रिपब्लिकन पार्टी के थे।
ट्रम्प ने कोर्ट के एक्शन की आलोचना तो की है लेकिन इसे न मानने का कोई संकेत नहीं दिया। इसका कीमतों पर तुरंत या बड़ा असर पडऩे की संभावना नहीं है। कोर्ट द्वारा हटाए गए टैरिफ ने दूसरे देशों में बने कई तरह के सामानों की कीमतों पर दबाव डाला था, जिनमें फर्नीचर, कपड़े और इलैक्ट्रानिक्स शामिल थे लेकिन इकोनॉमिस्ट ने लिखा है कि इस फैसले से कीमतें तुरंत कम होने की उम्मीद कम है। कनाडा और मैक्सिको अभी नार्थ अमेरिकन पैक्ट के कारण सबसे कम इफैक्टिव टैरिफ रेट का आनंद ले रहे हैं।
इसे बाद में चुनौती दी जाती है या नहीं यह तो समय ही बताएगा। एक ओर तो यह चर्चा है कि ट्रम्प द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ की रकम वापस मिलेगी या नहीं और दूसरी ओर ट्रम्प का कहना है कि सुनाए गए सभी फैसले बेकार हैं। ट्रम्प अभी विभिन्न देशों पर टैरिफ लगाने के मामले में पीछे हटने वाले नहीं हैं परंतु इसमें कुछ अड़चनें हैं। भारत और चीन की डील अभी आधे रास्ते में ही है। यूरोप के देशों ने थोड़ी-बहुत डील की है परंतु वे पूरी तरह इसके लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्पष्ट है कि अमरीका में लोकतंत्र जिंदा है क्योंकि किसी भी लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है कि वहांं विधायिका, कार्यपलिका, न्यायपालिका व मीडिया स्वतंत्रतापूर्वक काम करें।