ब्रज में अक्षय तृतीया की धूम: साल में सिर्फ एक बार होंगे बिहारी जी के चरणों के दर्शन, चंदन की ठंडक से दूर होगी ठाकुर जी की तपन

Edited By Updated: 16 Apr, 2026 09:40 AM

akshay tritiya 2026 braj dham

Akshay Tritiya 2026 Braj Dham: जानें ब्रज में अक्षय तृतीया पर होने वाली चंदन यात्रा के बारे में। बांके बिहारी मंदिर में चरण दर्शन का समय, महत्व और ठाकुर जी को गर्मी से बचाने की विशेष परंपराएं।

Akshay Tritiya 2026 Braj Dham: कान्हा की नगरी ब्रज में भीषण गर्मी के बीच ठाकुर जी को शीतलता प्रदान करने के लिए विशेष तैयारियां जोरों पर हैं। आगामी 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर समूचा ब्रजमंडल 'चंदन यात्रा' के रंग में रंगा नजर आएगा। इस दिन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में वर्ष में केवल एक बार ठाकुर जी के 'श्री चरणों' के दर्शन होते हैं, जिसके बारे में मान्यता है कि इनके दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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कई किलो चंदन से महकेगा गर्भ गृह, हाथ से तैयार हो रहे हैं गोले
पंजाब केसरी के रिपोर्टर विक्की शर्मा ने वृंदावन के सेवाधिकारी श्री राजू गोस्वामी से अक्षय तृतीया की तैयारियों को लेकर खास बातचीत की। श्री राजू गोस्वामी ने बताया की ठाकुर जी को गर्मी से निजात दिलाने के लिए ब्रज मंडल में स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में  कई किलो चंदन के लेप की तैयारी चल रही है। चूंकि एक दिन में इतना लेप तैयार करना संभव नहीं है, इसलिए सेवायत अभी से चंदन घिसकर उसके तरल गोले बनाकर शीतल वातावरण में रख रहे हैं। अक्षय तृतीया के दिन इसी चंदन से ठाकुर जी के सर्वांग (पूरे शरीर) पर लेप किया जाएगा। इतना ही नहीं, बिहारी जी को चंदन के लेप से तैयार विशेष बगलबंदी और धोती भी धारण कराई जाएगी।

बांके बिहारी पहनेंगे चांदी की पायल, सत्तू और शरबत का लगेगा भोग
श्री राजू गोस्वामी ने विक्की शर्मा को बताया की परंपरा के अनुसार, इस विशेष दिन बांके बिहारी महाराज को रजत (चांदी) की पायल पहनाई जाती है और उनके चरणों में सृष्टि के प्रतीक के रूप में चंदन का गोला रखा जाता है। गर्मी को देखते हुए ठाकुर जी को सत्तू, खरबूजे, ककड़ी और ठंडे शरबत का विशेष भोग लगाया जाएगा।

वृंदावन के प्राचीन सप्त देवालयों और अन्य मंदिरों में इसी दिन से 'फूल बंगला' बनाने की शुरुआत भी हो जाती है।

स्वामी हरिदास और बद्रीनाथ दर्शन की अनोखी कथा
चरण दर्शन की परंपरा के पीछे एक प्राचीन कथा है। एक बार स्वामी हरिदास के शिष्य ने बद्रीनाथ जाने की जिद की, तब स्वामी जी ने उसे बिहारी जी के चरणों के दर्शन करने को कहा। अक्षय तृतीया की रात जब वह सोया, तो उसे साक्षात बद्रीनाथ के दर्शन हो गए, जिसके बाद उसे अहसास हुआ कि बिहारी जी के चरणों में ही सारे तीर्थ समाहित हैं।

इन मंदिरों में होगी विशेष रौनक
अक्षय तृतीया पर न केवल बांके बिहारी, बल्कि राधा वल्लभ, राधारमण, श्रीकृष्ण जन्मस्थान, द्वारकाधीश, और गोवर्धन के दानघाटी मंदिर समेत सभी प्रमुख मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ेगा। छटीकरा स्थित गरुड़ गोविन्द मंदिर में गरुड़ पर विराजमान गोविन्द के चरण दर्शन का भी विशेष महत्व है। श्रद्धालु इस दिन गिरिराज जी की सप्तकोसी परिक्रमा कर पुण्य लाभ कमाएंगे और पूरा ब्रज 'राधे-राधे' की गूंज से भक्तिमय हो जाएगा।

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