Edited By Niyati Bhandari,Updated: 16 Apr, 2026 10:50 AM

Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या 2026 (17 अप्रैल) पर पितृ दोष से मुक्ति के लिए करें ये विशेष उपाय। जानें, तर्पण की सही विधि, शुभ मुहूर्त और पीपल पूजा का धार्मिक महत्व।
Vaishakh Amavasya 2026 date: सनातन धर्म में वैशाख माह की अमावस्या का एक विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। कुंडली से पितृ दोष को जड़ से मिटाने और पितरों की शांति के लिए यह तिथि सबसे उत्तम मानी गई है। इस तिथी पर किया जाने वाला विधि-विधान से स्नान, दान और तर्पण पूर्वजों की आत्मा को तृप्त व प्रसन्न कर देता है। जिस जातक के जीवन में किसी भी तरह की बाधा या परेशानी चल रही हो उसे वैशाख अमावस्या पर तर्पण अवश्य करना चाहिए।
Vaishakh Amavasya 2026 Date & Time शुभ मुहूर्त और तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में वैशाख अमावस्या की तिथि का आरंभ 16 अप्रैल की रात 8 बजकर 11 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन 17 अप्रैल 2026 को शाम 5 बजकर 21 मिनट पर होगा। उदयातिथि के महत्व को ध्यान में रखते हुए, वैशाख अमावस्या और उससे जुड़े धार्मिक अनुष्ठान 17 अप्रैल 2026 को करना सर्वोत्तम रहेगा।
Symptoms and Remedies for Pitra Dosha पितृ दोष के लक्षण और समाधान
यदि आपके घर में बिना वजह गृह क्लेश रहता है, परिवार में तनाव बना रहता है। धन होते हुए भी फाइनेंशियल प्रॉब्लम बनी हुई है। संतान सुख प्राप्त करने में समस्याएं आ रही हैं। बच्चे आपके कहने में नहीं हैं। जॉब में किसी भी तरह की ऊंच-नीच चल रही है या प्रमोशन में रुकावट आ रही है तो यह पितृ दोष का संकेत हो सकता है। ऐसे में वैशाख अमावस्या पर किया गया तर्पण विशिष्ट रुप से फलदायी होता है।

तर्पण की शास्त्रीय विधि:
सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर पर ही किसी पावन नदी का जल नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके आसन बिछाकर बैठें। तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें काला तिल, कुश और चावल मिलाएं। अपने पितरों का ध्यान करते हुए 'ॐ पितृदेवाय नमः' मंत्र का जाप करें और जल अर्पित करें।
पीपल की पूजा का महायोग
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु के साथ-साथ पितरों का भी वास होता है। अमावस्या के दिन पीपल की जड़ में जल अर्पित करना और सरसों के तेल का दीपक जलाना पितृ दोष निवारण का अचूक तरीका है। शाम के समय दीपक जलाकर पीपल की 7 बार परिक्रमा करने से घर में सुख-शांति का संचार होता है।
इस दिन सूर्योदय के कुछ समय पूर्व एवं सूर्यास्त के तुरंत बाद अपनी इच्छा पूर्ति की कामना से दोनों ही समय पीपल वृक्ष के पास जाकर सरसों के तेल का एक दीपक व सुंगंधित धुप जलाएं। इसके बाद हल्दी, कुमकुम, चावल, पुष्प से पूजन कर शक्कर मिला मीठा जल एक लोटा चढ़ाएं।
पीपल की पूजा के लाभ
कहा जाता है कि पीपल की रोज़ाना पूजा से अपार सुख-समृद्धि की प्राप्ति व धन वैभव की प्राप्ति होती है। तो वहीं नियमित पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा करने के बाद श्री हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले समस्त संकटों से मुक्ति मिलती है। जो जातक पीपल के वृक्ष के नीचे मीठा जल चढ़ाने के बाद सरसों के तेल का दीपक जलाकर 7 परिक्रमा करते हैं उनकी हर इच्छा पूरी होती है। मान्यता है कि खासतौर पर वैसाख अमावस्या की पीपल वृक्ष के नीचे दीपक जलाकर पंच मेवा (पांच प्रकार की मिठाई) अर्पित करने से पितृ दोष में मुक्ति मिलती है।
