Meaning of Delimitation: क्या है परिसीमन? जिससे लोकसभा में 543 से बढ़कर 850 हो जाएंगी सीटें, आसान भाषा में समझें

Edited By Updated: 16 Apr, 2026 11:51 AM

what is delimitation it will increase the number of lok sabha seats

परिसीमन शब्द इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। शायद बहुत कम लोग परिसीमन शब्द का अर्थ जानते हैं। परिसीमन का सीधा अर्थ है—जनसंख्या के आधार पर लोकसभा या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण। यह कामे एक स्वतंत्र 'परिसीमन आयोग' द्वारा...

 Meaning of Delimitation: परिसीमन शब्द इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। शायद बहुत कम लोग परिसीमन शब्द का अर्थ जानते हैं। परिसीमन का सीधा अर्थ है—जनसंख्या के आधार पर लोकसभा या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण। यह कामे एक स्वतंत्र 'परिसीमन आयोग' द्वारा किया जाता है, जिसका गठन राष्ट्रपति के नोटिफिकेशन के जरिए होता है। इस आयोग  के पास इतनी ताकत होती है कि इसके फैसलों को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। आइए आसान भाषा में इसका अर्थ समझते हैं। 

परिसीमन का अर्थ- आसान शब्दों में

जैसे-जैसे किसी शहर या इलाके की आबादी बढ़ती है, वहां की जरूरतों को संभालने के लिए नए वार्ड या चुनाव क्षेत्र बनाने पड़ते हैं। इसी तरह, पूरे देश में जनसंख्या के हिसाब से लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय करने की प्रक्रिया को 'परिसीमन' (Delimitation) कहते हैं। इसका मकसद यह है कि हर सांसद या विधायक लगभग बराबर आबादी का प्रतिनिधित्व करे, ताकि लोकतंत्र में 'एक वोट, एक मूल्य' का सिद्धांत बना रहे। परिसीमन से जुड़ी 5 मुख्य बातें जो आपको जाननी जरुरी हैं।

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परिसीमन से जुड़ी 5 मुख्य बातें :

1.      सीटें क्यों बढ़ रही हैं? अभी हम 1971 की आबादी के हिसाब से चल रहे हैं। पिछले 55 साल में देश में 2.25 गुना जनसंख्या बढ़ी है। आबादी बढ़ने से काम में बढ़ोतरी भी होगी। इसी वजह से सांसदों की संख्या भी 543 से बढ़ाकर लगभग 850 करने की तैयारी है।

2.      आयोग की ताकत: इसके लिए एक 'परिसीमन आयोग' बनता है। यह इतनी पावरफुल बॉडी है कि इसके फैसले को आप किसी कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकते।

3.      किसे होगा फायदा? सीटें आबादी के हिसाब से तय होती हैं, इसलिए उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में सीटों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। यानी संसद में इन राज्यों के सांसदों का दबदबा बढ़ेगा।

4.      दक्षिण भारत को क्यों है डर? तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों ने जनसंख्या कंट्रोल करने में बहुत अच्छा काम किया है। अब उन्हें ऐसा डर है कि आबादी कम होने के कारण उनकी सीटों में बढ़ोतरी कम होगी, जिससे केंद्र में उनकी आवाज कमजोर पड़ जाएगी। वे इसे अच्छे काम के लिए मिली सजा मान रहे हैं।

5.      विपक्ष का विरोध: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि यह राज्यों के बीच संतुलन बिगाड़ सकता है और इससे केवल उन राज्यों को फायदा होगा जहाँ भाजपा मजबूत है।

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