Edited By ,Updated: 29 Jun, 2026 03:24 AM

अभी हाल ही में ‘सिंगापुर एयरलाइन्स’ के विमान में यात्रा कर रहे आकाश तिवारी नामक 30 वर्षीय भारतीय यात्री द्वारा विमान की एयर होस्टैस से अभद्र व्यवहार करने का मामला सामने आया है।
अभी हाल ही में ‘सिंगापुर एयरलाइन्स’ के विमान में यात्रा कर रहे आकाश तिवारी नामक 30 वर्षीय भारतीय यात्री द्वारा विमान की एयर होस्टैस से अभद्र व्यवहार करने का मामला सामने आया है। पीड़िता ने सिंगापुर की अदालत को बताया कि आकाश तिवारी ने उसे च्यूंटी काटी और गलत ढंग से छुआ। एयर होस्टैस द्वारा विमान के उच्चाधिकारी से शिकायत करने पर उसने एयर होस्टैस की ड्यूटी विमान के दूसरे हिस्से में लगा दी लेकिन आकाश तिवारी फिर भी बाज नहीं आया तथा उसने वहां भी जाकर उसका यौन उत्पीडऩ करने की कोशिश की और उसके 3 दोस्त यह देख कर हंसते रहे।
एयर होस्टैस की शिकायत पर विमान के सिंगापुर पहुंचने पर अधिकारियों ने उसे वहां की पुलिस के हवाले कर दिया तथा आकाश तिवारी को पीड़िता को देने के लिए 982 अमरीकी डालर जुर्माना लगाने के अलावा 6 महीनों के लिए जेल भेज दिया गया। विदेशों में भी भारत की बदनामी का कारण बन रही ऐसी ही घटनाओं से यह प्रश्न उठता है कि हम अपने बच्चों को अच्छे संस्कार क्यों नहीं दे रहे जो वे इस तरह का आचरण कर रहे हैं? क्या बच्चों में अच्छे संस्कार भरने की जिम्मेदारी अभिभावकों की है या स्कूलों की या दोनों की?
समाज और कानून की भी कुछ सीमा तक बच्चों और युवाओं को यह समझाने की जिम्मेदारी है कि महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार नहीं बल्कि उनका सम्मान करना चाहिए।
आखिर हम अपने बच्चों को महिलाओं से सभ्य व्यवहार करने की सीख देना कब शुरू करेंगे? वर्तमान घटना में आरोपी युवक 30 वर्ष आयु का है जिसे अभी तक यह बात समझ नहीं आई, उसके लिए यह 6 महीने की सजा तो कुछ भी नहीं है। हम संसद में महिलाओं को पुरुषों के बराबर सीटें देने तथा अन्य सब मामलों में समानता का अधिकार देने की बातें तो कर रहे हैं परंतु हम अपने बच्चों को बौद्धिक स्तर पर महिलाओं से समानता और सम्मानजनक व्यवहार करने की बात कब तक समझा सकेंगे?