Edited By ,Updated: 05 Jan, 2026 03:41 AM

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को घोषणा की कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी, सिलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी के परिणामस्वरूप अमरीका द्वारा चलाए गए एक असाधारण अमरीकी अभियान के बाद, अमरीका वेनेजुएला का ‘शासन’ चलाएगा।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को घोषणा की कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी, सिलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी के परिणामस्वरूप अमरीका द्वारा चलाए गए एक असाधारण अमरीकी अभियान के बाद, अमरीका वेनेजुएला का ‘शासन’ चलाएगा। यह स्पष्ट नहीं है कि अमरीका वेनेजुएला को किस तरह ‘नियंत्रित’ करने का इरादा रखता है और क्या इसमें लंबे समय तक सैन्य कब्जा शामिल हो सकता है?
ट्रम्प ने इस बारे में अस्पष्ट जानकारी दी, यह कहते हुए कि वह इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए कुछ लोगों को नियुक्त करेंगे, जिससे यह संकेत मिलता है कि अमरीकी अधिकारी सीधे तौर पर शामिल होंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने हाल ही में मादुरो के स्थान पर शपथ ली है। ट्रम्प ने कहा कि अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रोड्रिगेज से बात की और वह अमरीका के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। ट्रम्प ने वेनेजुएला में सैन्य उपस्थिति की संभावना से भी इंकार नहीं किया और संकेत दिया कि अमरीका कई वर्षों तक देश के शासन में शामिल हो सकता है।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वेनेजुएला पर हमला करके, उसके राष्ट्रपति को बंधक बनाकर और अनिश्चित काल तक देश पर अपना शासन चलाने का वादा करके (बिना किसी संसदीय या संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के) संभवत: अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के बचे-खुचे अंशों को भी चकनाचूर कर दिया है और विश्व मंच पर अमरीका के प्रतिद्वंद्वी चीन और रूस द्वारा आक्रामकता के नए कृत्यों का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। हालांकि यह सच है कि वेनेजुएला के अधिकांश लोग राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को वैध नहीं मानते थे और मादुरो पर अमरीका में मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में मुकद्दमा चलाया जा चुका है लेकिन कुछ आलोचकों और विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रम्प ने अब एक संभावित रूप से विनाशकारी मिसाल कायम कर दी है।
अमरीकी डैमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वार्नर, जो सीनेट की खुफिया मामलों की चयन समिति के उपाध्यक्ष हैं, ने एक बयान में कहा, ‘‘यदि संयुक्त राज्य अमरीका वेनेजुएला के राष्ट्रपति का अपहरण करने के अधिकार का दावा करता है, तो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन के राष्ट्रपति का अपहरण करने के लिए इसी तरह का औचित्य बताने से क्यों रोकता है? एक बार जब यह सीमा पार हो जाती है, तो वैश्विक अराजकता को नियंत्रित करने वाले नियम टूटने लगते हैं और सत्तावादी शासन व्यवस्थाएं इसका सबसे पहले फायदा उठाएंगी।’’ ट्रम्प के इस कदम का सबसे करीबी उदाहरण शायद पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश का 1989 में पनामा में तानाशाह मैनुअल नोरीगा को पकडऩे के लिए अमरीकी सेना भेजना था। लेकिन इतिहास बताता है कि इसके परिणाम आशाजनक होने की बजाय अधिक निराशाजनक हो सकते हैं। 1961 में बे ऑफ पिग्स की घटना के बाद से लैटिन अमरीका में लगभग हर अमरीकी सैन्य हस्तक्षेप विफल रहा है।
जहां तक वेनेजुएला की बात है, अमरीका पिछले 20 साल से वेनेजुएला को अपने कब्जे में लेने की कोशिश करता रहा है। इसकी वजह है 17 ट्रिलियन डालर कीमत का तेल (3,03,221 मिलियन बैरल), जितना दुनिया में और किसी देश के पास नहीं और इससे अमरीका का सारा कर्जा साफ हो जाएगा! ट्रम्प ने जनवरी 2025 में अपना दूसरा कार्यकाल संभालने के बाद वैश्विक संघर्षों को समाप्त करवा कर शांति कायम करने की शपथ ली थी, मगर तब से अमरीका 7 देशों पर हमला कर चुका है और वेनेजुएला इनमें से अभी तक अंतिम है। सभी सातों देश तेल समृद्ध हैं। इसका एक सीधा अर्थ है वैश्विक तेल भंडारों पर कब्जा और चीन के लिए तेल की आपूर्ति बाधित करना, जिससे रूस के तेल निर्यात पर भी सीधा असर पड़ेगा। ट्रम्प के अनुसार, यह वेनेजुएला का तेल बेच कर अमरीकी कर्ज को उतारने और अमरीका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक रास्ता है। परंतु अब अगर रूस यूक्रेन पर और चीन ताइवान पर कब्जा कर लेता है तो अमरीका उन्हें कैसे रोक पाएगा?