एक उथल-पुथल भरा वर्ष और आगे की चुनौतियां

Edited By Updated: 01 Jan, 2026 05:14 AM

a turbulent year and the challenges ahead

बीता हुआ साल, जो इस सदी की पहली तिमाही का अंत भी था, अर्थव्यवस्था, राजनीति, अंतर्राष्ट्रीय मामलों, रक्षा, उद्योग, शिक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक साल साबित हुआ। इसने भविष्य की नींव भी रखी और यह भी दिखाया कि यह हमारे जीवन पर कैसे असर...

बीता हुआ साल, जो इस सदी की पहली तिमाही का अंत भी था, अर्थव्यवस्था, राजनीति, अंतर्राष्ट्रीय मामलों, रक्षा, उद्योग, शिक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक साल साबित हुआ। इसने भविष्य की नींव भी रखी और यह भी दिखाया कि यह हमारे जीवन पर कैसे असर डालेगा। साल की शुरुआत धमाकेदार रही, जब डोनाल्ड ट्रम्प ने अमरीका के राष्ट्रपति का पद संभाला और ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के अपने मकसद में ऊंचे टैरिफ लगाकर दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया।

भारत को इसका सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, क्योंकि रूस से तेल खरीदने पर उस पर सबसे ज्यादा टैरिफ और पैनल्टी लगाई गई। हालांकि अमरीका चीन और कई दूसरे देशों के साथ ट्रेड डील करने में कामयाब रहा है लेकिन भारत के साथ डील अभी भी पैंङ्क्षडग है। अमरीका को होने वाले भारतीय एक्सपोर्ट पर असर पड़ा है, हालांकि दूसरे देशों में एक्सपोर्ट को डायवर्ट करने की कोशिशें की गई हैं।दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर टकराव से यह सबक मिलता है कि जब राष्ट्रीय हित शामिल होते हैं, तो ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मामले की तरह पर्सनल ‘कैमिस्ट्री’ काम नहीं आती।

इस साल दोनों देशों के बीच टकराव ने भारत को रूस और चीन के करीब ला दिया है। पांच साल के आपसी अविश्वास के बाद भारत और चीन के बीच तनाव कम होना एक अच्छा संकेत था। हालांकि, दूसरे पड़ोसी पाकिस्तान के साथ रिश्ते लगातार खराब हो रहे हैं। पहलगाम में पर्यटकों पर हुए भयानक हमले के बाद ऑप्रेशन सिंदूर शुरू हुआ और निकट भविष्य में दुश्मनी खत्म होने के कोई संकेत नहीं हैं। राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले के पास हुए बम धमाके ने दिखाया कि जहां पाकिस्तान लगातार परेशानी खड़ी कर रहा है, वहीं भारत को भी घरेलू आतंकवाद से निपटने की जरूरत है। दूसरे पड़ोसी देशों के साथ भी भारत के रिश्ते सहज नहीं रहे। बंगलादेश में शेख हसीना सरकार का तख्तापलट और वहां ङ्क्षहदुओं पर लगातार हमलों के कारण 1971 में भारत द्वारा बंगलादेश को आजादी दिलाने में मदद करने के बाद से दोनों देशों के बीच अब तक के सबसे खराब रिश्ते हो गए हैं। श्रीलंका और नेपाल के साथ भी हमारे रिश्ते सौहार्दपूर्ण नहीं हैं।

घरेलू मोर्चे पर, भाजपा पिछले साल हरियाणा में अप्रत्याशित जीत से लेकर दिल्ली, महाराष्ट्र और बिहार विधानसभा चुनावों में भारी जीत के साथ आगे बढ़ रही थी। कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष पूरी तरह खत्म हो गया और ऐसा लगता है कि उसने अपनी गलतियों से कोई सबक नहीं सीखा। जाहिर है, विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दे, जैसे ‘वोट चोरी’ के आरोप, मतदाताओं के बीच कोई असर नहीं डाल पाए। ट्रम्प टैरिफ के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने तुलनात्मक रूप से अच्छा प्रदर्शन किया और जी.डी.पी. दर उम्मीद से बेहतर रही। हालांकि, औद्योगिक विकास ङ्क्षचता का एक गंभीर विषय बना रहा और बढ़ती बेरोजगारी एक विस्फोटक स्थिति पैदा कर रही है। सरकार द्वारा उठाया गया एक सकारात्मक कदम गुड्स एंड सॢवसेज टैक्स (जी.एस.टी.) को तर्कसंगत बनाना था, जिसमें अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं को 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत स्लैब में रखा गया। जहां तक न्यायपालिका की बात है, अदालतों में लंबित मामले बढ़ते जा रहे हैं।

भारत के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने विवादों के समाधान में तेजी लाने के लिए कदम उठाने का वादा किया है लेकिन इसके लिए सरकार और न्यायपालिका दोनों को मिलकर प्रयास करने होंगे। सुप्रीम कोर्ट में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश गवई पर जूता फैंकना एक नई निम्न स्तर की घटना थी। दिल्ली में एक हाई कोर्ट जज के आवास से बड़ी मात्रा में जले हुए करेंसी नोट मिलने का मामला रहस्य बना रहा, जिसमें न्यायपालिका ने पारदॢशता लाने के लिए बहुत कम प्रयास किया। पिछले साल कुछ विवादास्पद फैसलों के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव बलात्कार मामले के आरोपी को दी गई जमानत और अरावली पहाड़ी शृंखला में खनन अधिकार देने से संबंधित दो बड़े गलत फैसलों को रद्द करके अपनी प्रतिष्ठा वापस हासिल की।

सांप्रदायिक माहौल पूरे साल जारी रहा, जिसमें अल्पसंख्यकों के खिलाफ ङ्क्षलङ्क्षचग और ङ्क्षहसा के मामले सामने आए। क्रिसमस पर ईसाइयों पर हमले और उत्तराखंड में त्रिपुरा के एक लड़के की हत्या समाज में फैल रहे सांप्रदायिक जहर का उदाहरण थे। नया साल देश को विभिन्न स्तरों पर परखेगा। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, अमरीका के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना और चीन और रूस के साथ संबंधों में सुधार पर बारीकी से नजर रखी जाएगी। राजनीति के लिहाज से यह एक महत्वपूर्ण साल है, जिसमें पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु में हाई-वोल्टेज विधानसभा चुनाव होने हैं। ये चुनाव भाजपा के ङ्क्षहदुत्व एजैंडे की पहुंच और सीमा का परीक्षण करेंगे और देश में विपक्षी दलों के भविष्य की नींव रखेंगे। यह कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व के लिए भी एक महत्वपूर्ण साल साबित होगा। सरकार पर इस बात को लेकर बारीकी से नजर रखी जाएगी कि वह बढ़ते सांप्रदायिक विभाजन और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे से कैसे निपटती है। ये दोनों मुद्दे देश के भविष्य की दिशा तय करेंगे, क्योंकि यह सदी की दूसरी तिमाही में विकसित भारत के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।-विपिन पब्बी
 

Related Story

    Trending Topics

    IPL
    Royal Challengers Bengaluru

    190/9

    20.0

    Punjab Kings

    184/7

    20.0

    Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

    RR 9.50
    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!