अधर में लटका हुआ है अमरीका का भविष्य

Edited By Updated: 18 Nov, 2025 06:05 AM

america s future hangs in the balance

‘डैमोक्रेट्स की उधेड़ बुन’ डैमोक्रेटिक पार्टी के लिए अपने आंतरिक और बाहरी संघर्षों को दर्ज करने का एक सदाबहार शीर्षक रहा है। लेकिन क्या होगा जब डोनाल्ड ट्रम्प की देशभक्ति और पूर्ण प्रभुत्व के बावजूद रिपब्लिकन पार्टी का पतन हो जाए? दोनों पक्षों की...

 ‘डैमोक्रेट्स की उधेड़ बुन’ डैमोक्रेटिक पार्टी के लिए अपने आंतरिक और बाहरी संघर्षों को दर्ज करने का एक सदाबहार शीर्षक रहा है। लेकिन क्या होगा जब डोनाल्ड ट्रम्प की देशभक्ति और पूर्ण प्रभुत्व के बावजूद रिपब्लिकन पार्टी का पतन हो जाए? दोनों पक्षों की अव्यवस्था को औद्योगिक स्तर पर सफाई की जरूरत है। लेकिन और भी रिसाव की उम्मीद है। गहरे भू-राजनीतिक उतार-चढ़ाव के दौर में यह आत्मविश्वास जगाने वाला नहीं है लेकिन अमरीकी राजनीति में एक बिल्कुल नए युग की शुरुआत हो सकती है। दोनों दलों की आत्मा की लड़ाई खतरनाक रूप से वास्तविक होती जा रही है क्योंकि सीमांत झगड़े केंद्र में आ रहे हैं। अमरीका का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

युवा वामपंथी डैमोक्रेट्स पुराने मध्यमार्गियों को चुनौती दे रहे हैं। 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले उन्हें परास्त करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि वर्जीनिया और न्यू जर्सी में मध्यमार्गियों ने गवर्नरशिप जीती लेकिन न्यूयॉर्क मेयर चुनाव में जोहरान ममदानी की जीत ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी। समाजवादी बड़े शहरों के कॉलेज-शिक्षित उदारवादियों के साथ हैं। लेकिन क्या वे देश के अन्य ‘कम विकसित’ हिस्सों में टिक पाएंगे? क्या ममदानी, अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज उर्फ ए.ओ.सी. और उनके गॉडफादर बर्नी सैंडर्स आगे चलकर डैमोक्रेट्स की पहचान बनेंगे? क्या मध्यमार्गी रद्द हो जाएंगे? यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन आशावादी लोग जोर देकर कहते हैं कि डैमोक्रेट्स ‘घटाव का नहीं, जोड़ का खेल’ खेल रहे हैं। हर जिला, हर लड़ाई अनोखी होती है और स्थानीय मुद्दों पर ही तय होगी। जितने ज्यादा लोग होंगे, उतना ही अच्छा होगा और तंबू भी बड़ा होगा। नीले रंग की जीत दर्ज होने और जश्न शुरू होने में बमुश्किल ही समय लगा था कि गृहयुद्ध तेज हो गया। पार्टी का एक बड़ा हिस्सा शटडाऊन के ‘विश्वासघात’ पर गुस्से से भड़क उठा । 7 डैमोक्रेट सीनेटरों ने इसे खत्म करने के लिए रिपब्लिकन के साथ वोट दिया। सरकार को फि र से घेरने के उनके वोट से उन्हें स्वास्थ्य सेवा सबसिडी पर कोई गारंटी नहीं मिली, यही मुख्य कारण था कि डैमोक्रेट्स ने यह रुख अपनाया। इसीलिए गुस्सा और आरोप-प्रत्यारोप दिखे।

मीडिया से मिली भारी मदद के बावजूद, ट्रम्प के बहाने काम नहीं आ रहे हैं। 33 प्रतिशत तक गिर चुकी अनुमोदन रेटिंग के साथ, वह जो बाइडेन के ‘सीमा नियंत्रण में है’ वाले भ्रम के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वह व्हाइट हाऊस में बॉलरूम और बाथरूम बनवाने, ग्रेट गैट्सबी थीम वाली पाॢटयां करने और दुनिया भर में हवाई यात्रा करने में ज्यादा व्यस्त हैं, नोबेल शांति पुरस्कार की उनकी चाहत की तो बात ही छोड़ दीजिए। वह जानते हैं कि उनके नीचे की जमीन हिल रही है, भले ही वह दावा करें कि ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। प्रमुख आवाजें एच.1बी वीजा, इसराईल को सहायता, पूर्व आतंकवादी से सीरियाई राष्ट्रपति बने अहमद अल-शरा को व्हाइट हाऊस में आमंत्रित करने और घरेलू मुद्दों पर विदेश नीति को तरजीह देने के उनके रुझान को लेकर ट्रम्प को चुनौती दे रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये प्रमुख आवाजें खुद भी आपस में कई तरह की लड़ाइयों में उलझी हुई हैं। मागा (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन)की रानी लॉरा लूमर, जिनकी खुशी ही तय करती है कि दरबार में किसे बैठना है, टकर कार्लसन के साथ एक तरह की ‘सर्वाइवर’ प्रतियोगिता में हैं जो ‘मागा’ के भविष्य का मालिक बनना चाहता है। कार्लसन पर यहूदी-विरोधी होने का आरोप लगाया गया है जब उन्होंने पूछा था कि क्या इसराईल के लोग वाकई चुुने हुए लोग  हैं  या यह ‘ईसाई पाखंडों में सबसे पुराना’ है। 

 ‘मागा’ वल्र्ड कम तीव्रता वाले भूकंपों का सामना कर रहा है और ऐसे सवालों पर बिखर रहा है जिन्हें कई लोग खुले तौर पर उठाना मुश्किल समझते हैं।  अमरीका को इसराईल का समर्थन क्यों करना चाहिए? आप्रवासन समाज पर क्या असर डाल रहा है?  विरासत वाले अमरीकी  (श्वेत नागरिक) कितना ‘भूरापन’ झेल सकते हैं? क्या हिटलर ‘कूल’ था? ‘ग्रॉयपर्स’ की दुनिया में आपका स्वागत है, यह शब्द निक फ्यूएंट्स के अनुयायियों के लिए है। निक फ्यूएंट्स एक अति-दक्षिणपंथी, श्वेत राष्ट्रवादी पॉडकास्टर हैं, जिनके बयानों ने न केवल विनम्र रूढि़वादियों को  बल्कि कट्टरपंथी  ‘मागा’ के भीतर भी कई लोगों को झकझोर दिया है। कुछ हद तक प्रचार की चाहत में, कुछ हद तक सत्ता-विरोधी साख साबित करने की निरंतर जरूरत से प्रेरित और कुछ हद तक जो भी घटिया कीचड़ मिल सके उसमें हाथ डालने वाले फ्यूएंट्स इस जटिल दुनिया को समझने की चाह रखने वाले कई लोगों के लिए एक ऑनलाइन गुरु हैं। वह इस बात से इंकार करते हैं कि गाजा में नरसंहार हुआ ही नहीं और यहूदियों को बेवफा मानते हैं। हां, यहूदी-विरोधी वही शब्द है जिसकी आपको तलाश है।-सीमा सिरोही

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