अमित शाह की मोगा रैली: एक तीर से कई निशाने

Edited By Updated: 20 Mar, 2026 05:06 AM

amit shah s moga rally killing several birds with one stone

भारतीय जनता पार्टी द्वारा मोगा में आयोजित विशाल रैली के दौरान भारत के गृह मंत्री और भाजपा के बड़े नेता अमित शाह का संबोधन पंजाबियों के लिए कई साफ संदेश छोड़ गया है। अमित शाह ने यह साफ कर दिया है कि पंजाब के 2027 के चुनाव जीत कर भारतीय जनता पार्टी...

भारतीय जनता पार्टी द्वारा मोगा में आयोजित विशाल रैली के दौरान भारत के गृह मंत्री और भाजपा के बड़े नेता अमित शाह का संबोधन पंजाबियों के लिए कई साफ संदेश छोड़ गया है। अमित शाह ने यह साफ कर दिया है कि पंजाब के 2027 के चुनाव जीत कर भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर सरकार बनाएगी। अमित शाह ने यह ऐलान करके एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। उन्होंने जहां भाजपा द्वारा अकेले चुनाव लडऩे का इशारा किया, वहीं पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार की नाकामियों और कांग्रेस की पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाबियों ने कांग्रेस, ‘आप’ और अकाली दल की सरकारों की कार्यप्रणाली देख ली है, इसलिए अब भारतीय जनता पार्टी को मौका दिया जाए। 

अमित शाह द्वारा पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा की पहली चुनावी रैली को संबोधित करने की भाषा और हाव-भाव ये संकेत दे रहे थे कि शाह ने इस रैली को संबोधित करने से पहले पंजाब की स्थिति का गंभीर जायजा लिया है। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत सिख पंथ के जयकारे ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ से की। उन्होंने ‘आप’ की सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने के लिए वे नुक्ते चुने, जिनके कारण आज पंजाब के लोग ‘आप’ की सरकार पर नाराजगी जता रहे हैं। खासकर नशा, गैंगस्टरवाद, 25 लाख नौकरियां देने का वादा, 16 मैडीकल कॉलेज बनाना, बुढ़ापा पैंशन 2500 रुपए करना, फसलों की एम.एस.पी. और कानून व्यवस्था को लेकर ‘आप’ सरकार को घेरा। इस तरह उन्होंने ‘आप’ की सरकार को एक असफल सरकार के रूप में पेश किया। 

कांग्रेस द्वारा भाजपा पर सिखों के लिए कुछ न करने के आरोपों का जवाब देते हुए, उन्होंने कांग्रेस पर श्री अकाल तख्त पर हमला करने और दिल्ली में सिखों के कत्लेआम का आरोप लगाते हुए राहुल के पिता, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का बयान भी याद करवाया, जिसमें उन्होंने सिख कत्लेआम को जायज ठहराते हुए कहा था कि ‘जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है’। उन्होंने कांग्रेस को सिखों की दुश्मन साबित करते हुए दावा किया कि भाजपा ने ही सिखों का कत्ल करने वालों को सजाएं देने की शुरुआत की, जबकि कांग्रेस लंबे समय तक उनका बचाव करती रही। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत की आजादी के समय कांग्रेस के नेताओं को सिखों की भावनाओं और सिख गुरुओं की महानता का अहसास नहीं था, जिस कारण उन्होंने करतारपुर साहिब को, सरहद के बिल्कुल पास होने के बावजूद, भारत में रखने की कोई कोशिश नहीं की, जिस कारण सिख पंथ के साथ बेइंसाफी हुई। 

उन्होंने मोदी सरकार द्वारा सिख पंथ के लिए किए गए काम गिनाए और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को सिख पंथ के लिए काम करने का मौका गुरु साहिब की कृपा के कारण ही मिला है। उन्होंने दावा किया कि मोदी की सरकार द्वारा सिख कत्लेआम के दोषियों को सजा दिलाना, करतारपुर साहिब में कॉरिडोर बनाना, अफगानिस्तान से गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप लेकर आना, हरिमंदिर साहिब के लंगर से जी.एस.टी. हटाना, एफ.सी.ए.आर. की रजिस्ट्रेशन करना, वीर बाल दिवस मनाने की शुरुआत करना, नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस लाल किले पर बड़े स्तर पर मनाना शुरू किया और कहा कि अगर पंजाबी उनकी अपील मानकर पंजाब में भाजपा की सरकार बना दें, तो पहला बिल धर्म परिवर्तन के खिलाफ बनाया जाएगा और नशा खत्म किया जाएगा। 

इसके अलावा, अमित शाह ने पंजाबियों, खासकर सिखों को विश्वास में लेने का पूरा प्रयास किया और भाजपा के पंजाबियों की पार्टी होने का अहसास करवाने के लिए वह पगड़ी बांधकर रैली में शामिल हुए और कहा कि उनके सिर पर जो पगड़ी है, वह सिख गुरुओं का कर्ज है। उन्होंने पंजाबियों को नानकशाही कैलेंडर के अनुसार नए साल के शुरू होने की बधाई भी दी। अमित शाह ने कांग्रेस और ‘आप’ को तो निशाने पर लिया ही लेकिन भाजपा द्वारा अपने दम पर सरकार बनाने का ऐलान करके यह साफ कर दिया कि अकाली दल बादल के साथ गठबंधन नहीं किया जाएगा।

इसके साथ ही, जहां अमित शाह ने भाजपा के कैडर को पक्का विश्वास दिला दिया कि वे अपने-अपने हलकों में पूरे उत्साह से पार्टी की मजबूती के लिए काम करें और उन्हें भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार ही मिलेगा और यह दुविधा खत्म कर दी कि कहीं गठबंधन होने से उनका हलका अकाली दल के हिस्से में न चला जाए। इसके अलावा, कुछ नेता, जो यह पक्का समझे बैठे थे कि गठबंधन तो हो ही जाएगा और अकाली दल को ज्यादा सीटें मिलनी हैं, इस कारण वे पाला बदलकर टिकट की चाह में अकाली दल बादल में शामिल होने की सोच रहे थे, जैसे कि पहले अरविंद खन्ना और अमित गोसाईं ने पाला बदलकर अकाली दल का हाथ थाम लिया था। वैसे नेता भी अब चुपचाप पार्टी में रहकर काम करने को प्राथमिकता देने के बारे में सोचने लगे हैं। 

अमित शाह के इस ऐलान ने अकाली दल बादल को अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। अमित शाह ने अपने भाषण से जहां गवर्नैंस के मामले में बाकी सरकारों को नाकाम बताया, वहीं भारतीय जनता पार्टी द्वारा किए गए कामों के बारे में जानकारी देकर पंजाबियों को अहसास करवाया कि भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार ही पंजाब को तरक्की की राह पर ला सकती है और पंजाब पर जो कई तरह की मुसीबतें छाई हुई हैं, उनसे भी भाजपा ही छुटकारा दिला सकती है। इसके अलावा, इस रैली में लोगों की बड़ी हाजिरी ने विरोधियों से यह कहने का मौका भी छीन लिया कि पंजाब के गांवों में भारतीय जनता पार्टी को दाखिला नहीं मिलेगा और सबसे बड़ी बात, इस रैली ने प्रधानमंत्री के लिए अगली विशाल रैली का रास्ता साफ कर दिया है, जिसमें प्रधानमंत्री फिरोजपुर रैली के समय से पंजाब के लिए बड़े ऐलानों की लगाई गई उम्मीद को पूरा कर सकते हैं।-इकबाल सिंह चन्नी

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