ऊंची ब्याज दरें झेलने के लिए तैयार रहें

Edited By ,Updated: 17 May, 2022 05:42 AM

be prepared to bear high interest rates

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में बढ़ कर 8 साल के उच्च स्तर 7.79 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जो खाद्य और ईंधन की कीमतों में

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में बढ़ कर 8 साल के उच्च स्तर 7.79 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जो खाद्य और ईंधन की कीमतों में वृद्धि से प्रेरित थी। खाद्य तेलों और सब्जियों में 2 अंकों की मुद्रास्फीति के कारण पहले वाला (खाद्य) बढ़ कर 8.38 प्रतिशत हो गया, जबकि गेहूं की ऊंची कीमतों के कारण अप्रैल में अनाज की मुद्रास्फीति बढ़ी। मुद्रास्फीति अब लगातार 4 महीने से आर.बी.आई. की 6 प्रतिशत की ऊपरी सहनशीलता सीमा से ऊपर बनी हुई है।

ईंधन की ऊंची कीमतों का दूसरे क्रम का प्रभाव भी दिखाई दे रहा है, क्योंकि परिवहन और संचार में मुद्रास्फीति पिछले महीने के 8 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 11 प्रतिशत हो गई है। अप्रैल के आंकड़ों ने फिर से दिखाया कि ग्रामीण मुद्रास्फीति ने शहरी मुद्रास्फीति को पीछे छोड़ दिया, क्योंकि ग्रामीण उपभोग क्षेत्र भोजन को अधिक महत्व देता है। ग्रामीण मांग के लिए यह अच्छी खबर नहीं है, जिसमें अभी तक निरंतर तेजी नहीं आई। 

ताजा आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि मुद्रास्फीति व्यापक आधार वाली होती जा रही है। कोविड प्रतिबंध हटाने और मांग में तेजी के साथ, सेवा क्षेत्र की मुद्रास्फीति ‘विविध’ श्रेणी द्वारा कब्जा ली गई है, जो बढ़ कर 8.03 प्रतिशत हो गई है। और मांग में उछाल के साथ, उच्च इनपुट लागत की निकासी भी गति प्राप्त कर रही है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि सेवाओं की तुलना में माल की मांग में तेजी से सुधार हुआ, माल उत्पादकों ने इनपुट लागतें उपभोक्ताओं पर डाल दीं। लेकिन जैसे-जैसे सेवाओं में सुधार होगा, आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को कीमतों का अधिक से अधिक लाभ होगा। भारत के सेवा क्षेत्र के लिए अप्रैल के एस. एंड पी. ग्लोबल परचेजिंग मैनेजर्स इंडैक्स सर्वे में बढ़ती सेवाओं की मुद्रास्फीति के बारे में चिंताएं भी दिखाई दीं। 

हालांकि इसमें थोड़ी नरमी आ सकती है, लेकिन आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति के आर.बी.आई. की 6 प्रतिशत की सीमा से ऊपर रहने की उम्मीद है। जबकि एफ.ए.ओ. के खाद्य मूल्य सूचकांक द्वारा मापी गई वैश्विक खाद्य कीमतों में अप्रैल में मामूली कमी आई, वे अभी भी अप्रैल 2021 में 30 प्रतिशत अधिक हैं। यूक्रेन संघर्ष खाद्यान्न और वनस्पति तेलों के बाजारों को प्रभावित करना जारी रखे है। उर्वरक की बढ़ती कीमतों से किसानों की उत्पादन लागत बढऩे की संभावना है, जिससे खाद्य कीमतों में वृद्धि होगी। सरकार ने उच्च सबसिडी के माध्यम से मूल्य समर्थन बढ़ाया है, क्या यह कीमतों को ठंडा करने के लिए पर्याप्त होगा, यह देखने की जरूरत है। 

कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और चीन में कोविड-प्रेरित लॉकडाऊन द्वारा निरंतर आपूर्ति-पक्ष व्यवधानों के साथ, आर.बी.आई. ने मुद्रास्फीति लक्ष्य पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। इसकी आवश्यकता है, क्योंकि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति का मुकाबला करने के लिए सख्त मौद्रिक नीतियों का पालन कर रहे हैं। यू.एस. फैड ने मई में अपने 25 आधार अंकों की वृद्धि के बाद 50 आधार अंकों की वृद्धि की। इसके बाद आने वाले महीनों में समान परिमाण में बढ़ौतरी होगी। बैंक ऑफ इंगलैंड ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि की है, जो 13 वर्षों में सबसे अधिक है। अन्य देशों के केंद्रीय बैंक भी दरों में बढ़ौतरी पर विचार कर रहे हैं। 

अपनी अप्रैल की नीति में, आर.बी.आई. ने अतिरिक्त तरलता को वापस लेने की घोषणा की, लेकिन नीति दर में वृद्धि नहीं की। मुद्रास्फीति में तेज उछाल की उम्मीद ने इसे नीतिगत रेपो दर में 40 आधार अंकों की बढ़ौतरी की घोषणा की। कीमतों में सॢपल वृद्धि रोकने के लिए आर.बी.आई. अब आक्रामक बढ़ौतरी दरों के साथ जवाब दे सकता है। अनियंत्रित उम्मीदें मुद्रास्फीति के दबाव को और बढ़ा देंगी। डॉलर इंडैक्स की निरंतर मजबूती और पिछले कुछ दिनों में रुपए का तीव्र मूल्यह्रास उच्च आयातित मुद्रास्फीति के माध्यम से कीमतों पर और दबाव डाल सकता है। यह ब्याज दरों में वृद्धि की आवश्यकता को पुष्ट करता है। 

कैलिब्रेटेड रेट हाइक के अलावा, आर.बी.आई. द्वारा महामारी के दौरान प्रदान की गई अल्ट्रा-समायोज्य तरलता सहायता को तेजी से वापस लेने की आवश्यकता है। बढ़ती मुद्रास्फीति विवेकाधीन खर्च में कटौती करेगी और खपत पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी, जो अभी शुरू हुई थी। उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में मंदी के बारे में ङ्क्षचताएं हैं, क्योंकि बढ़ती कीमतों ने क्रय शक्ति और उपभोक्ता भावनाओं में गिरावट को प्रकट करना शुरू कर दिया है। मांग में कमी से कीमतों में नरमी आ सकती है। बेस मैटल्स की कीमतें पिछले कुछ महीनों में अपने उच्चतम स्तर से कम हुई हैं। 

वित्तीय सहायता उपायों के साथ मौद्रिक नीति समर्थन की आवश्यकता है। राजकोषीय समेकन की अनिवार्यता को संतुलित करते हुए नीतिगत प्रतिक्रिया को उभरती भू-राजनीतिक स्थिति और वस्तुओं और खाद्य कीमतों के रास्तों के अनुरूप बनाना होगा।-राधिका पांडे 

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