Edited By ,Updated: 13 Feb, 2026 03:36 AM

विकसित भारत बजट 2026-27 वैश्विक अनिश्चितता के दौर में आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और स्पष्ट सुधारोन्मुख दृष्टिकोण की ओर इंगित करता है। भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढऩे वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है तथा निकट भविष्य में तीसरी सबसे बड़ी...
विकसित भारत बजट 2026-27 वैश्विक अनिश्चितता के दौर में आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और स्पष्ट सुधारोन्मुख दृष्टिकोण की ओर इंगित करता है। भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढऩे वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है तथा निकट भविष्य में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में मजबूती से अग्रसर है। माननीय प्रधानमंत्री के रणनीतिक नेतृत्व में, बीता वर्ष वस्त्र क्षेत्र के लिए एक निर्णायक मोड़ रहा है। 18 एफ.टी.ए. के माध्यम से, भारत को अब 800 बिलियन डॉलर के वैश्विक आयात बाजार में से लगभग 466 बिलियन डॉलर मूल्य के कपड़ा बाजारों तक विशेष पहुंच प्राप्त है, जिसे 110 बिलियन डॉलर के अमरीकी बाजार तक नए सिरे से पहुंच मिलने से और विस्तार मिला है। हाल ही में घोषित भारत-अमरीका व्यापार समझौते से निर्यात के पिछले वर्ष की तुलना में काफी बढऩे की उम्मीद है।
बाजार तक पहुंच को सुदृढ़ करने के साथ-साथ, क्यू.सी.ओ. को हटाए जाने से अनुपालन संबंधी बोझ में कमी आई है, जबकि जी.एस.टी. सुधारों ने लंबे समय से चली आ रही उलटी शुल्क संरचना की समस्या का समाधान किया है, जिससे यह क्षेत्र निर्णायक रूप से फाइबर-न्यूट्रल ढांचे की ओर अग्रसर हुआ है। बजट 2026 को महत्वपूर्ण बनाने वाली बात इसकी निरंतरता और व्यापकता है। कपास उत्पादकता मिशन जैसी पहलें और व्यापक आर्थिक सुधार अब पायलट चरण से आगे बढ़कर स्थायी मंचों में परिवर्तित किए जा रहे हैं, जो संरचनात्मक सुधारों के वास्तविक स्वरूप को दर्शाता है। दशकों तक वस्त्र क्षेत्र को मुख्यत: कल्याणकारी दृष्टिकोण से देखा जाता रहा। यह बजट वस्त्र क्षेत्र को अब विस्तार, प्रतिस्पर्धात्मकता और दीर्घकालिक राष्ट्रीय विकास के लिए एक मुख्य औद्योगिक रणनीति के रूप में पुन: स्थापित करते हुए उस सोच में एक निर्णायक परिवर्तन का संकेत देता है।
भारत का वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र देश के जी.डी.पी. में लगभग 2.3 प्रतिशत का योगदान देता है, औद्योगिक उत्पादन का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा है और 5.2 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है, जिससे यह अर्थव्यवस्था का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ बन जाता है। हालांकि वैश्विक वस्त्र एवं परिधान निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत है, जो इस क्षेत्र में विस्तार की अपार संभावनाओं को रेखांकित करती है। सरकार ने इस दिशा में एक स्पष्ट और महत्वाकांक्षी मध्यम अवधि का लक्ष्य निर्धारित किया है। 2030 तक वस्त्र क्षेत्र का आकार 350 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना और निर्यात को 100 बिलियन डॉलर तक विस्तारित करना।
वस्त्र क्षेत्र की प्रगति को लंबे समय से बाधित करने वाला एक प्रमुख कारण पुराने उत्पादन क्लस्टरों पर इसकी निर्भरता रहा है, जो उत्पादकता और विस्तार को सीमित करता है। विनिर्माण संबंधी दक्षता बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स लागतों को कम करने के लिए इकोसिस्टम का आधुनिकीकरण अनिवार्य है। बजट 2026 देशभर में 200 औद्योगिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण का प्रावधान करते हुए इस आवश्यकता का सीधे तौर पर समाधान करता है। साक्ष्य दर्शाते हैं कि क्लस्टर-आधारित विनिर्माण से श्रम उत्पादकता में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है और प्रति इकाई लॉजिस्टिक्स लागत में 30 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है। मैगा टैक्सटाइल पार्कों, सांझा प्रसंस्करण सुविधाओं तथा प्लग-एंड-प्ले इकोसिस्टम में किए गए निवेश बड़े पैमाने पर स्थायी लागत को कम करते हैं।
वस्त्र क्षेत्र के रूपांतरण के केंद्र में रोजगार सृजन और कार्यबल की तैयारी हैं। वस्त्र उद्योग, पूंजी-प्रधान उद्योगों की तुलना में प्रति करोड़ रुपए के निवेश पर लगभग 3 गुना अधिक रोजगार सृजित करता है और क्रमिक पहलों के माध्यम से पूरी मूल्य शृंखला में कौशल विकास और रोजगार-योग्यता को सुदृढ़ करने पर निरंतर ध्यान दिया गया है। इस क्लस्टर-आधारित विकास के समर्थन से, वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना के तहत अगले 5 वर्षों में 2 से 3 करोड़ अतिरिक्त आजीविकाओं को सहारा मिलने की संभावना है। इस गति को समर्थ 2.0 के माध्यम से और बल दिया गया है, जिसके अंतर्गत 2026 से 2031 के बीच 2,800 करोड़ रुपए का प्रावधान कर 15 लाख उद्योग-तैयार श्रमिकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस रोजगार और कौशल वृद्धि को सतत् विकास में बदलने के लिए, वस्त्र मूल्य शृंखला में काम करने वाली सभी इकाइयों के पास विस्तार और प्रतिस्पर्धा करने की वित्तीय क्षमता होनी आवश्यक है। वस्त्र इकोसिस्टम की रीढ़ एम.एस.एम.ई. को पहचानना बजट 2026 का मुख्य फोकस है, जो उनकी सबसे बड़ी रुकावट-तरलता को सीधे तौर पर दूर करता है। 10,000 करोड़ रुपए का एस.एम.ई. ग्रोथ फंड, मजबूत टी.आर.ई.डी.एस. प्लेटफॉर्म के माध्यम से विस्तारित चालान वित्तपोषण और सरकारी भुगतान चक्रों में तेजी कार्यशील पूंजी पर दबाव को कम करते हैं क्योंकि अकेला विलंबित भुगतान ही प्रति वर्ष लगभग 15 प्रतिशत एम.एस.एम.ई. पूंजी को अवरुद्ध कर देता है। बजट 2026 में मूल्य शृंखला में पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार प्रथाओं का समावेश और स्थिरता को भविष्य में निर्यात प्रतिस्पर्धा के प्रमुख चालक के रूप में स्वीकार करते हुए टैक्स ईको पहल के जरिए वस्त्र क्षेत्र में स्थिरता को एक डिजाइन सिद्धांत के रूप में भी शामिल किया गया है।
बजट के गणित से राष्ट्रीय दिशा तक-विकसित भारत का मार्ग : पहली बार वस्त्र क्षेत्र को केवल एक पारंपरिक उद्योग के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के रोजगार और उद्यमिता इंजन के रूप में स्थापित किया जा रहा है। 2020 से 2030 के बीच लगभग 5 करोड़ नए रोजगार सृजित करने की क्षमता के साथ, यह क्षेत्र भारत की श्रम-प्रधान विकास रणनीति के केंद्र में है। यह बजट विकसित भारत 2047 और उससे आगे के स्वरूप को आकार देते हुए भारत को उत्पादक रोजगार और प्रतिस्पर्धात्मक उद्यमिता के क्षेत्र में ‘सोने की चिडिय़ा’ के रूप में लौटने का आधार देता है।-गिरिराज सिंह(वस्त्र मंत्री, भारत सरकार)