Edited By Niyati Bhandari,Updated: 06 Feb, 2026 05:57 PM

Ekadashi Vrat February 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, एकादशी का व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है। हर महीने आने वाली दो एकादशियों में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी...
Ekadashi Vrat February 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, एकादशी का व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है। हर महीने आने वाली दो एकादशियों में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘विजया एकादशी’ कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से शत्रुओं पर विजय, बाधाओं से मुक्ति और सफलता का प्रतीक माना गया है।

विजया एकादशी का धार्मिक महत्व
पद्म पुराण और अन्य ग्रंथों में विजया एकादशी के व्रत का महात्म्य विस्तार से बताया गया है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियम से यह व्रत करता है, उसे जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी विजय प्राप्त होती है। यह व्रत न केवल सांसारिक सफलता देता है, बल्कि आत्मिक शांति और धर्म मार्ग पर आगे बढ़ने की शक्ति भी प्रदान करता है।
श्रीराम और विजया एकादशी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम माता सीता को मुक्त कराने के लिए लंका की ओर बढ़े, तो उनके सामने अथाह समुद्र सबसे बड़ी बाधा बन गया। समुद्र पार करना आसान नहीं था। तब लक्ष्मण के कहने पर श्रीराम मुनि बकदाल्भय के आश्रम पहुंचे।
मुनि ने श्रीराम को विजया एकादशी का व्रत करने की सलाह दी और कहा कि इस व्रत के प्रभाव से न केवल समुद्र पार होगा, बल्कि रावण पर भी निश्चित विजय मिलेगी। भगवान श्रीराम ने विधि-विधान से यह व्रत किया। इसके प्रभाव से समुद्र पार करने का मार्ग प्रशस्त हुआ और अंततः रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया गया।
यह कथा बताती है कि जब स्वयं श्रीराम ने इस व्रत से विजय पाई, तो साधारण भक्तों के लिए इसका महत्व कितना महान होगा।

विजया एकादशी व्रत 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 फरवरी 2026 को सुबह 11:32 बजे प्रारंभ। 13 फरवरी 2026 को दोपहर 1:30 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार विजया एकादशी व्रत 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार) को रखा जाएगा।
विजया एकादशी व्रत का फल
शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों पर विजय।
जीवन की बाधाओं से मुक्ति।
मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि।
भगवान विष्णु की विशेष कृपा।
