एक संत के राज्य में संतों का अपमान

Edited By Updated: 07 Feb, 2026 05:32 AM

in the kingdom of a saint saints are insulted

हिंदू धर्म में शंकराचार्य का पद आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख पीठों, ज्योतिर्मठ, द्वारका, पुरी और शृंगेरी मठ के प्रमुखों का है जो अद्वैत वेदांत और सनातन धर्म के संरक्षक माने जाते हैं।

हिंदू धर्म में शंकराचार्य का पद आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख पीठों, ज्योतिर्मठ, द्वारका, पुरी और शृंगेरी मठ के प्रमुखों का है जो अद्वैत वेदांत और सनातन धर्म के संरक्षक माने जाते हैं। यह पद पूरी तरह धार्मिक है लेकिन यह पद बार-बार राजनीतिक विवादों का केंद्र बनता रहा है। इनमें पीठ के उत्तराधिकार के झगड़े, धार्मिक बयानों का राजनीतिक उपयोग, सरकारी हस्तक्षेप और राजनीतिक दलों से जुड़ाव प्रमुख कारण रहे हैं। ये विवाद धार्मिक स्वायत्तता बनाम राजनीतिक प्रभाव का कारण बनते हैं। राजनेताओं ने संतों को सम्मान व समर्थन के बदले अपने वोट बैंक में बढ़ोतरी की चाह रखी है। यहां तक तो ठीक था, लेकिन गत18-19 जनवरी 2026 को प्रयागराज के माघ मेला में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को त्रिवेणी संगम में स्नान के लिए उनकी पालकी को जाने से रोका गया। 

पुलिस ने भीड़ और अनुमति का हवाला दिया जिससे शंकराचार्य के शिष्यों से पुलिस की झड़प हो गई। गुस्साए पुलिस कर्मियों ने शंकराचार्य के शिष्यों से घोर दुव्र्यवहार किया। विवाद बढऩे पर मेला प्रशासन ने संतों से क्षमा याचना करने व दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की बजाय शंकराचार्य को 20 जनवरी को 24 घंटे का नोटिस जारी करके सुप्रीम कोर्ट के सन 2022 के आदेश का हवाला देकर पूछा कि वह शंकराचार्य शब्द शीर्षक कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि उनके उत्तराधिकार का मामला कोर्ट में है। इस नोटिस से नाराज होकर शंकराचार्य ने अनशन शुरू कर दिया और कहा कि न मुख्यमंत्री न राष्ट्रपति तय कर सकते हैं कि शंकराचार्य कौन है और कौन नहीं। इसके बाद मामले को लेकर राजनीति शुरू है। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार पर हमलावर कांग्रेस ने इसे भाजपा का धर्मद्रोह और साधुओं का अपमान करना बताया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि स्वामी को निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा, केदारनाथ में 228 किलो सोने की चोरी और कोविड के समय में गंगा में तैरते शवों पर सवाल उठाए थे।

दूसरी ओर भाजपा ने इसे प्रशासनिक मुद्दा कहकर पल्ला झाडऩे की कोशिश की। वहीं शंकराचार्य के समर्थकों ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार जानबूझकर शंकराचार्यों और संतों का अपमान तथा सनातन परंपराओं को तोड़ रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य संत समाज का गौरव हैं और अनगिनत श्रद्धालु आशीर्वाद लेने उनके पास जाते हैं जो सनातन धर्म की परंपराओं का हिस्सा है और भाजपा इन परंपराओं को तोड़ रही है। संतों और शंकराचार्यों का जानबूझ कर अपमान किया जा रहा है। भाजपा सरकार ने अपने अधिकारियों के जरिए शंकराचार्य के साथ दुव्र्यवहार किया है।

हालांकि उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज से उनके अपमान को लेकर माफी मांगते हुए उनसे ससम्मान गंगा स्नान करने व विवाद समाप्त करने की अपील की थी लेकिन संत होते हुए भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उक्त मुद्दे पर चुप्पी को लेकर आमजन में आक्रोश व्याप्त है। इस मुद्दे पर योगी सरकार से नाराज भाजपा के कुछ लोगों ने पार्टी छोडऩे का भी ऐलान किया है।-डा. रमेश सैनी
 

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