बड़े गंभीर दौर से गुजर रहा भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र

Edited By Updated: 26 Jun, 2026 05:13 AM

india s health sector is going through a very critical phase

जब शासक और प्रशासक अपने अधिकार क्षेत्र में सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए अपनी जिम्मेदारियों को खूबसूरत तरीके से अंजाम देने की बजाय निजी स्वार्थों की दलदल में फंसते जाएं, धार्मिक स्थानों में संस्कृति के उच्च कोटि के...

जब शासक और प्रशासक अपने अधिकार क्षेत्र में सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए अपनी जिम्मेदारियों को खूबसूरत तरीके से अंजाम देने की बजाय निजी स्वार्थों की दलदल में फंसते जाएं, धार्मिक स्थानों में संस्कृति के उच्च कोटि के आदर्शों एवं मानवतावादी संदेशों के प्रचार-प्रसार के स्थान पर केवल माथा टेकना, चढ़ावा इकट्ठा करना और प्रसाद खाने तक सीमित हो जाएं, न्यायाधीश मामूली फैसले करने में 20 से 25 वर्ष लगा दें, जिससे फरियादी की खून-पसीने की कमाई और कीमती समय बर्बाद हो रहा हो और ईश्वर का रूप माने जाने वाले डाक्टर इलाज के नाम पर अपने मरीजों की नादिरशाह की तरह लूट-खसूट में लग जाएं तो समझ लो कि समाज पतन की गहरी खाई की तरफ बढ़ रहा है। इन परिस्थितियों में लोग निराश, मायूस और सहमे हुए नजर आने लगते हैं। 

स्वास्थ्य क्षेत्र में चल रहे लूट-खसूट के गोरखधंधे को बेपर्दा करने से हकीकत की मालूमात हो सकती है। भारत में  24 हजार सरकारी और 44 हजार के करीब प्राइवेट अस्पताल हैं। 2 लाख  लैब हैं, परंतु प्रमाणित केवल 1000 हैं। देश में एलोपैथी के 13.86 लाख डाक्टर हैं और 7.51 लाख आयुष चिकित्सक हैं। हर वर्ष 1.20 लाख डाक्टर सेवा को समॢपत होते हैं और 50 हजार आयुष डाक्टर बनते हैं। देश में 10 से 15 प्रतिशत लोग साधन सम्पन्न हैं, जो किसी भी समय अपनी जरूरत के मुताबिक चीजें खरीदने में समर्थ हैं जबकि शेष मध्य वर्ग और गरीब हैं, जो इलाज कराने में भी असमर्थ हैं। हकीकत में यह एक खतरनाक स्थिति है।

देश में कुछ विश्वसनीय एजैंसियों ने कई बड़े अस्पतालों में लूट-खसूट की शोध रिपोर्ट को संसद की संसदीय समिति के आगे रखा, जिसने अध्ययन के बाद इसे स्वीकार किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार  देश में लगभग 44 प्रतिशत सर्जरियां फर्जी, धोखाधड़ीपूर्ण और पूरी तरह अनावश्यक होती हैं। इस आंखें खोलने वाले तथ्य से स्पष्ट है कि लगभग आधे आप्रेशन केवल मरीजों या सरकार को लूटने के मकसद से किए जाते हैं। 55 प्रतिशत ह्रदय सर्जरी, 48 प्रतिशत गर्भाशय निकालना, 47 प्रतिशत  कैंसर सर्जरी, 48 प्रतिशत घुटना प्रत्यारोपण, 45 प्रतिशत सी सैक्शन, कंधा प्रत्यारोपण, रीढ़ की हड्डी के आप्रेशन फर्जी और अनावश्यक होते हैं।

महाराष्ट्र के कई नामी अस्पतालों में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, वरिष्ठ डाक्टरों को 1-1 करोड़ रुपया मासिक वेतन और महंगी गाडिय़ां मुहैया की जाती हैं। एक गरीब देश में इतना अधिक वेतन न तो महंगाई के इंडैक्स के अनुसार है और न ही तर्कसंगत। हकीकत में यह एक बहुत बड़ा प्रलोभन है ताकि डाक्टर मरीजों के इलाज के नाम पर अधिक से अधिक धन इकट्ठा कर सकें। कई अस्पतालों में मृत मरीजों को जिंदा दिखाकर धन इक_ा किया जाता है। यह एक अत्यंत हैरतअंगेज, अफसोसनाक और दुखदायी कृत्य है। कई बार मृत मरीज को जिंदा बताकर लंबे समय तक अस्पताल में रखा जाता है और मोटी रकम वसूल करके उसे मृत घोषित कर दिया जाता है। कई बार डाक्टर मृत मरीजों को आप्रेशन थिएटर में ले जाते हैं और परिवार से धन वसूल करके मृत घोषित कर देते हैं। भारत में 68 प्रतिशत लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा है। बीमा कम्पनियां आंशिक भुगतान करती हैं, जबकि शेष रकम परिवार वालों को देनी पड़ती है। अब तक 3 हजार अस्पताल बीमा कम्पनियों द्वारा फर्जी दावों के कारण ब्लैक लिस्ट किए जा चुके हैं। कई बार मानव अंग तस्करी के भी केस सामने आए हैं,  जिस पर सरकार ने सख्त कार्रवाई की है।

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ है कि कुछ डाक्टर मरीज को गंभीर रोग बताकर बड़े अस्पतालों में रैफर करते हैं और उनसे प्रत्येक मरीज के हिसाब से कमिशन वसूल करते हैं। डायग्नोस का धंधा अरबों में जाता है। बेंगलुरु में आयकर विभाग ने एक लैब से 100 करोड़ रुपए नकद और 3.5 किलो सोना बरामद किया, जो डाक्टरों को रिश्वत देने के लिए रखा गया था। देश की 20 से 25 दवा कम्पनियां हर वर्ष डाक्टरों पर 1000 करोड़ रुपए खर्च करती हैं और कई कम्पनियां डाक्टरों को विदेश यात्रा पर भी भेजती हैं। कई कंपनियां अस्पतालों को सस्ती दवाइयां देती हैं, जबकि अस्पताल मरीजों को वही दवाई महंगे दामों पर बेचता है। कई अस्पतालों में पूर्व सैनिकों को मामूली बीमारी पर भर्ती किया जाता है और नकली इलाज दिखाकर सरकारी योजनाओं का नाजायज फायदा उठाया जाता है।

भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र बड़े गंभीर दौर से गुजर रहा है। महंगा इलाज जनसाधारण के लिए चिंताजनक और परेशानी का सबब बनता जा रहा है।  सरकार को अस्पतालों में हो रही धोखाधड़ी और महंगे इलाज पर नियंत्रण करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिएं, ताकि लोग आसानी से इलाज भी करा सकें और मैडीकल कौंसिल आफ इंडिया द्वारा की गई सिफारिशों को सभी अस्पतालों में बिना रुकावट लागू किया जाए।-प्रो. दरबारी लाल(पूर्व डिप्टी स्पीकर पंजाब) 

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