अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर मामले में दर्ज FIR पर सवाल उठाए, कहा-  बड़े लोगों को बचाया जा रहा है

Edited By Updated: 26 Jun, 2026 04:17 PM

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ज्योतिर्मठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित वित्तीय अनियमितता मामले में दर्ज प्राथमिकी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसमें सिर्फ छोटे कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि...

नेशनल डेस्क: ज्योतिर्मठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित वित्तीय अनियमितता मामले में दर्ज प्राथमिकी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसमें सिर्फ छोटे कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि इसके लिए जिम्मेदार बड़े लोगों को छोड़ दिया गया है। संभल में अपनी 'गौ धर्म यात्रा' के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद ने कहा, "चंदे की चोरी के बारे में क्या कहा जाए? राम मंदिर के मामले में शुरू से ही मनमाने फैसले लिए गए। न तो शास्त्रों, न वेदों और न ही धार्मिक गुरुओं की सलाह का पालन किया गया। 

ट्रस्ट में राजनीतिक नेताओं द्वारा चुने गए लोगों को शामिल किया गया, जबकि संतों, ऋषियों और पुजारियों को दूर रखा गया।" उन्होंने कहा कि "अगर सब कुछ निष्पक्ष तरीके से करना होता, तो ट्रस्ट की ज़िम्मेदारी चारों शंकराचार्यों, रामानंदाचार्य और अन्य धार्मिक गुरुओं को सौंपी जा सकती थी। इसके बजाय, भरोसेमंद राजनीतिक सहयोगियों को नियुक्त किया गया, जिससे शुरू से ही उनकी मंशा साफ हो गई थी।" राम मंदिर दान में कथित हेराफेरी के मामले में दर्ज प्राथमिकी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "हमने सुना है कि प्राथमिकी उन लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है जिन्होंने नोट गिने थे।

उन्होंने तो बस नोटों को सीधा किया, गिना और उनकी गड्डियां बनाईं। हमें उस बड़ी चोरी के बारे में बताइए जो बाद में हुई। नोट गिनने वाला व्यक्ति अगर चोरी भी करे, तो ज़्यादा से ज़्यादा कुछ नोट ही ले सकता है। बड़े पैमाने पर चोरी तो प्रभावशाली लोग करते हैं। उनके खिलाफ कोई प्राथमिकी नहीं है।" उन्होंने कहा कि विपक्ष ने बिना किसी आधार के यह मुद्दा नहीं उठाया है। 

उन्होंने कहा, "अगर आरोपों में दम था, तो पहले ही दिन प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए थी, भले ही अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ ही क्यों न हो। जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज होने से ही पता चलता है कि जांच करने लायक कुछ तो था। विपक्ष गड़बड़ियों को उजागर करके सिर्फ़ अपना फ़र्ज़ निभा रहा है।" भाजपा पर निशाना साधते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि पार्टी का हिंदुत्व "नकली" है और उसके सदस्य "नकली हिंदू" हैं।

 उन्होंने कहा, "हो सकता है कि पार्टी असली हो क्योंकि यह चुनाव आयोग में पंजीकृत है, लेकिन इसका हिंदुत्व असली नहीं है। जो लोग वेदों को नहीं मानते, वे नकली हिंदू हैं। असली हिंदू वेदों, धर्मग्रंथों और अपने गुरुओं में विश्वास करते हैं, जबकि ये लोग ऐसा नहीं करते।" उन्होंने संभल की कल्कि नगरी में प्राचीन तीर्थ स्थलों को फिर से बनाने की उत्तर प्रदेश सरकार की पहल का स्वागत तो किया, लेकिन वाराणसी में मंदिरों को तोड़े जाने को लेकर सरकार की आलोचना भी की और कहा कि इतिहास सरकार के इस कदम को गलत मानेगा।

अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि वे तीन मई से 'गौ धर्म यात्रा' कर रहे हैं। वे गोरखपुर से लगभग 170 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुज़र रहे हैं ताकि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में मतदाताओं को गौ-संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित कर सकें। इस आरोप को खारिज करते हुए कि यात्रा का मकसद किसी राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाना है, उन्होंने कहा कि कोई भी इस अभियान से राजनीतिक फायदा उठा सकता है।

उन्होंने कहा, "अगर भाजपा गाय को 'राजमाता' घोषित करती है तो उसे सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रही है। अगर कोई दूसरी पार्टी राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है, तो हम उन्हें रोक नहीं रहे हैं।" संत ने यह भी कहा कि मतदाताओं को सनातन धर्म के प्रति प्रतिबद्ध "असली" उम्मीदवारों का ही समर्थन करना चाहिए, क्योंकि इस तरह के नजरिए से आखिरकार एक वैकल्पिक राजनीतिक नेतृत्व तैयार होगा। 

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