Edited By Niyati Bhandari,Updated: 26 Jun, 2026 10:17 AM

Shani Pradosh Vrat 2026: 27 जून 2026 को शनि प्रदोष व्रत का शुभ संयोग बन रहा है। जानें, भगवान शिव और शनि देव की पूजा का सबसे उत्तम समय, व्रत विधि, शुभ योग और व्रत पारण की पूरी जानकारी।
Shani Pradosh Vrat 2026: 27 जून 2026 को शनि प्रदोष व्रत का शुभ आगमन हो रहा है। इस दिन विधि-विधान से यह व्रत करना शनिदेव की कृपा प्राप्त करने का एक शास्त्रसम्मत आसान उपाय है। ऐसा करने से न सिर्फ शनि के कारण होने वाली परेशानियां दूर होती हैं, बल्कि शनिदेव का आशीर्वाद भी मिलता है जिससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शनिदेव नवग्रहों में से एक हैं और शास्त्रों में वर्णन है कि इनका कोप अत्यन्त भयंकर होता है। शास्त्रानुसार शनि प्रदोष व्रत करने से शनि देव का प्रकोप शान्त हो जाता है। जिन लोगों पर साढ़ेसाती और ढैया का प्रभाव हो, उनके लिए शनि प्रदोष व्रत करना विशेष हितकारी माना गया है।
शिव पूजन के लिए ये हैं सबसे शुभ मुहूर्त
धर्म ग्रंथों के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल (संध्या समय) में करना विशेष फलदायी होता है। 27 जून को पूजा के लिए निम्नलिखित शुभ समय रहेंगे:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:46 बजे से सुबह 05:18 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 01:21 बजे से दोपहर 02:26 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: रात 09:56 बजे से रात 10:12 बजे तक।

शनि प्रदोष पर बन रहे हैं कई दुर्लभ योग
इस शनि प्रदोष पर ग्रहों की स्थिति भी बहुत शुभ रहने वाली है। इस दिन साध्य, शुभ और रवि योग का त्रिवेणी संगम हो रहा है।
साध्य योग: सुबह 09:02 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शुभ योग शुरू होगा।
रवि योग: शाम 06:41 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 28 जून सुबह 05:49 बजे तक रहेगा।

व्रत पारण का सही समय
शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन 28 जून सूर्योदय के पश्चात करें। सुबह 05:49 बजे के बाद अपना व्रत खोल सकते हैं।

शनि प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष काल (सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और बाद का समय) में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, उनके लिए शनि प्रदोष व्रत अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस दिन शिव आराधना के साथ शनिदेव की पूजा करने से ग्रह दोष शांत होते हैं।
शास्त्रों के अनुसार शनि प्रदोष व्रत विधि
शास्त्रों के अनुसार शनि प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि की प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास) में भगवान शिव की पूजा के लिए किया जाता है। इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन सात्विक रहें और यथासंभव फलाहार या निर्जल व्रत रखें। अगले दिन व्रत का पारण करें। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत सुख, शांति और कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
शनि प्रदोष पर करें इन वस्तुओं का दान
शनि प्रदोष वाले दिन जो जातक शनि की वस्तुओं जैसे लोहा, तैल, तिल, काली उड़द, कोयला और कम्बल आदि का दान करता है, शनि-मंदिर में जाकर तेल का दिया जलाता है तथा उपवास करता है, शनिदेव उससे प्रसन्न होकर उसके सारे दुःखों को हर लेते हैं।
