प्रौद्योगिकी व तकनीकी विकास से भारत आत्मनिर्भरता की ओर

Edited By Updated: 11 May, 2022 05:29 AM

india towards self reliance through technology and technological development

आज  के युग में कोई भी देश प्रौद्योगिकी व नई तकनीक के बलबूते ही कृषि, सामरिक, आर्थिक व शिक्षा के क्षेत्र में विकास कर सकता है। वर्तमान में भारत हर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी व तकनीकी के नए मोड को अपनाते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी

आज  के युग में कोई भी देश प्रौद्योगिकी व नई तकनीक के बलबूते ही कृषि, सामरिक, आर्थिक व शिक्षा के क्षेत्र में विकास कर सकता है। वर्तमान में भारत हर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी व तकनीकी के नए मोड को अपनाते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, जो हम हर साल 11 मई को मनाते हैं, हमें वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीकी रूप से सशक्त होने के हमारे सामूहिक कत्र्तव्यों व जिम्मेदारियों की याद दिलाता है। इस दिन भारत ने राजस्थान के पोखरण में ‘ऑप्रेशन शक्ति’ के तहत सफलतापूर्वक 3 परमाणु परीक्षण करके परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों के समूह में शामिल होने में सफलता पाई। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी और सामरिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत बनने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। 

आज भारत ने स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा तक, रक्षा से लेकर कृषि तक के क्षेत्र में अभूतपूर्व तरक्की की है। प्रौद्योगिकी विकास से अधिक रोजगार तो सृजन हो ही रहे हैं, साथ ही उत्पादन व निर्यात के क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है। लोगों का जीवन आसान बनाने में भी मदद मिली है। देश में मानवीय जरूरतों के अनुरूप तकनीकी विकास हो रहा है। 

रक्षा क्षेत्र में हमारी सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) का रोडमैप न केवल उन्नत देशों द्वारा उपयोग की जा रही समकालीन तकनीकों के, बल्कि हमारी सामरिक आवश्यकताओं के अनुरूप भी है। रक्षा के लिए आई.टी. क्षेत्र में चल रही भविष्य की त्रि-सेवा सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आई.सी.टी.) परियोजनाएं शामिल हैं, जो नैटवर्क केंद्रित संचालन, सूचना सुरक्षा, योजना, स्टोर प्रबंधन और सामान्य प्रशासन सुशासन जैसे क्षेत्रों में उपयोगी हैं। उन्नत इलैक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली ‘शक्ति’ को रक्षा इलैक्ट्रॉनिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला (डी.एल.आर.एल.), हैदराबाद द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया था, जिसे पिछले साल भारतीय नौसेना को सौंपा गया था। स्वदेशी विमानवाहक पोत विक्रांत ने पिछले साल अपनी पहली समुद्री यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की है। प्रौद्योगिकी में यह प्रगति आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देशवासियों के संकल्प व कत्र्तव्य को दोहराती है। 

यह खुशी की बात है कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी उद्देश्य को सामने रखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तैयार की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में सूचना एवं प्रौद्योगिकी पर विशेष बल दिया गया है। भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा हर साल होनहार वैज्ञानिकों को सम्मानित किया जाता है। एक समग्र अर्धचालक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि देश में इलैक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को उत्प्रेरित किया जा रहा है, केंद्र सरकार ने अर्धचालक और प्रदर्शन निर्माण के विकास के लिए कुल 76,000 करोड़ रुपए के ‘सेमीकॉन इंडिया’ कार्यक्रम को मंजूरी दी है।

प्रौद्योगिकी हमारी कल्पना से भी तेजी से बदल रही है। इसलिए हमारे शोधकत्र्ताओं, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के लिए आवश्यक है कि वे हर क्षेत्र में पूर्वाभास करें और उसी के अनुसार योजना बनाएं। हम सभी  कोविन को जानते हैं, एक डिजिटल प्लेटफॉर्म, जिसने कोविड-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई को सरल बना दिया है। इसी तरह आरोग्य सेतु ऐप ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में एक प्रभावी हथियार के रूप में काम किया है। आज हम कृषि सहित अन्य क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी के प्रयोग से ही आगे बढ़ सकते हैं। इसलिए प्रौद्योगिकी तंत्र को सरल, सुलभ व सस्ता बनाने पर ध्यान देना होगा।

कीटनाशक और पोषक तत्वों के प्रयोग में ड्रोन का बहुत बड़ा उपयोग होता है। लेकिन क्या सभी किसान ड्रोन खरीद सकते हैं? शायद नहीं! शोधकत्र्ताओं और वैज्ञानिकों को सस्ते ड्रोन और रोबोट बनाने पर काम करना होगा। इसी तरह हम आॢटफिशियल इंटैलीजैंस, मशीन लॄनग, रोबोटिक प्रोसैस ऑटोमेशन, एज कम्प्यूटिंग, क्वांटम कम्प्यूटिंग, वर्चुअल रियलिटी और ऑगमैंटेड रियलिटी, ब्लॉकचेन, इंटरनैट ऑफ थिंग्स और साइबर सिक्योरिटी आदि जैसी तकनीकों को व्यापक उपयोग में लाने के लिए और कार्य योजनाओं के संदर्भ में कितने तैयार हैं? हमें नई तकनीकों के उपयोग में तेजी से और अच्छी तरह से तैयार होने की जरूरत है। हमें हमेशा यह याद रखने की जरूरत है कि हमें दुनिया में सर्वश्रेष्ठ के साथ प्रतिस्पर्धा करनी है। 

मेरा दृढ़ मत है कि हम अपने सर्वोत्तम प्रयासों से ही ‘डिजिटल इंडिया’ के स्वप्न को पूरा कर सकेंगे। हमारे छात्रों, शोधकत्र्ताओं और वैज्ञानिकों को नई तकनीकों में पारंगत होने में एक बड़ी और सक्रिय भूमिका निभानी होगी। आज परम्परागत चलन का युग खत्म हो गया है। अब लीक से हट कर सोचने का युग है। यह विनिर्माण और उद्यमिता का युग है। हमारे युवाओं में प्रदर्शन और सुधार के संवाहक बनने की क्षमता और दृढ़ संकल्प है! जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था- उठो जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए! इसी दृढ़ निश्चय के साथ देश आगे बढ़ेगा और आत्मनिर्भर बनेगा।-बंडारू दत्तात्रेय (माननीय राज्यपाल, हरियाणा)

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