Edited By ,Updated: 06 Jan, 2026 05:54 AM

आमतौर पर खिचड़ी के बारे में कहा जाता है कि उसे बीमार लोग खाते हैं। वह पचने में आसान होती है और ऊर्जा से भरपूर भी। स्वास्थ्य के लिए भी इसे अच्छा माना जाता है। हालांकि यह सिर्फ बीमार का खाना ही नहीं है। मुम्बई की मशहूर डाइटीशियन रुजता दिवेकर कहती हैं...
आमतौर पर खिचड़ी के बारे में कहा जाता है कि उसे बीमार लोग खाते हैं। वह पचने में आसान होती है और ऊर्जा से भरपूर भी। स्वास्थ्य के लिए भी इसे अच्छा माना जाता है। हालांकि यह सिर्फ बीमार का खाना ही नहीं है। मुम्बई की मशहूर डाइटीशियन रुजता दिवेकर कहती हैं कि अपने रात के खाने में खिचड़ी को जरूर शामिल करें। इसमें देसी घी जरूर डालें। वह पेट की बीमारियों से जूझते गम्भीर रोगियों को इसे जरूर खाने की सलाह देती हैं। मशहूर अभिनेत्री करीना कपूर ने भी एक बार कहा था कि सप्ताह में कई दिन शाम को वह कटोरा भरकर खिचड़ी खाती हैं। उनके पति सैफ को भी यह बहुत पसंद है। उत्तर भारत में खिचड़ी के बारे में एक कहावत चलती है-खिचड़ी के चार यार, घी, पापड़, दही, अचार। हालांकि उत्तर भारत में रात को दही या छाछ खाने की मनाही होती है। इन्हें रात में खाने से गैस और जोड़ों में दर्द हो सकता है, ऐसा कहा जाता है। इसीलिए इन्हें नहीं खाया जाता।
खैर इस बार नए साल की पूर्व संध्या पर बेंगलुरु के बारे में एक दिलचस्प खबर सामने आई। आपको पता ही होगा कि बेंगलुरु को भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाता है। आई.टी. में यहां असंख्य युवा काम करते हैं। इस बार उनमें से बहुतों ने नए साल का जश्न घर से बाहर नहीं, बल्कि घर के अंदर रहकर ही मनाया। यह एक चौंकाने वाली बात भी थी। 9410 लोगों ने रात के खाने के लिए किसी जंक फूड के मुकाबले खिचड़ी को चुना। 4244 लोगों ने उपमा मंगाई और 1927 लोगों ने सलाद मंगाया। ये सारी जानकारियां स्विगी के एक्स अकाऊंट से दी गई हैं। यह भी कहा गया कि ये लोग पार्टी करने की बजाय, रात के 10 बजे तक सो भी जाएंगे। यह जानकारी मात्र एक शहर के बारे में है। हो सकता है कि बाकी शहरों के आंकड़े बाद में सामने आएं। इन आंकड़ों को जानकर लगता है कि क्या हमारे युवा अब जंक के मुकाबले स्वाथ्य वर्धक भोजन में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं? हो सकता है कि उन्होंने रुजता और करीना के वीडियोज देखे हों। रुजता का तो यह भी कहना है कि भोजन में घी को अवश्य शामिल करें। रोटी बिना घी के न खाएं। अर्से तक घी को मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बताया जाता रहा है। इसे कोलैस्ट्रोल बढ़ाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है।
जबकि एक बहुत मशहूर वजन घटाने वाली चेन के दफ्तर के बाहर में इस लेखिका ने देखा था कि वहां एक बोर्ड पर मोटे अक्षरों में लिखा था कि रिफाइंड तेल न खाएं। इनमें 99 प्रतिशत कैलोरीज होती हैं। एक जमाने तक हार्श मार्कीटिंग के जरिए इन तेलों को न केवल स्वास्थ्यवर्धक बल्कि जीरो कैलोरी वाला बताया जाता रहा है। किसी क्लीनीकल ट्रायल में इनकी उपयोगिता साबित हुई हो, ऐसी भी जानकारी इस लेखिका को नहीं है। लेकिन अब इन्हें खाने से मना किया जा रहा है। बहुत से स्वास्थ्य विशेषज्ञ यहां तक कह रहे हैं कि कुछ मात्रा में घी को तो हृदय रोगी भी खा सकते हैं। यह कोलैस्ट्रोल भी नहीं बढ़ाता। एक डाक्टर ने ही इस लेखिका से कहा था कि अगर घी को खुली हथेली पर रखो, तब भी वह पिघल जाता है, ऐसे में शरीर की गर्मी के कारण, वह शरीर के अंदर कैसे जम सकता है। यूं भी आज से 50 साल पहले घी के बिना गेहूं, मक्का, बाजरा की रोटी खाना वॢजत माना जाता था। लेकिन अब ऐसा लगता है कि घी जैसा खलनायक वापस आ रहा है। उसके दिन बहुर गए हैं। जिसे रसोई से विदा कर दिया गया था, अब आदरपूर्वक उसे फिर जगह मिल रही है। वैसे भी घी आमतौर पर उद्योग का हिस्सा नहीं रहा, घरों में ही बनाया जाता रहा है। हमारे कृषि समाज में घर-घर गाय, भैंस पाली जाती रही हैं और दूध से बनाए जाने वाले उत्पाद घर में ही बनते रहे हैं। भगवान कृष्ण की सारी कथाएं माखन से ही जुड़ी रही हैं।
अब घी बाजार में भी मिलता है। हालांकि यह भी सच है कि बाजार में मिलने वाले अधिकांश घी की शुद्धता की कोई गारंटी भी नहीं है। लेकिन किया भी क्या जाए। घर में कौन घी बनाए। जो स्त्री 24 & 7 की नौकरी करती हो, उसके पास खाना बनाने का समय ही नहीं है। जो खाना बनाती हैं, बच्चों और परिवार की देखभाल करती हैं, उनकी आफतों के कहने ही क्या। तब स्वास्थ्य कैसे बचे। शायद इसी तरह कि जब बहुत से लोग जंक खा रहे हों, तब खिचड़ी खा ली जाए, उपमा या सलाद। यूं भी खिचड़ी अनेक तरह से बन सकती है। अधिकांश दालों और चावलों को मिलाकर बनाई जा सकती है। सब्जियां भी डाली जा सकती हैं। साबूदाने और बाजरे की खिचड़ी भी खाई जा सकती है। 9000 से अधिक लोगों ने किस दाल की खिचड़ी खाई थी, यह तो पता नहीं लेकिन खिचड़ी खाना समाचार बना, यह एक अनोखी बात है। बीमार की थाली से निकलकर, खिचड़ी किसी उत्सव के दिन भोजन का हिस्सा बन रही हो, हजारों लोग उसे खा रहे हों, यह एक दिलचस्प बात है।-क्षमा शर्मा