Edited By Punjab Kesari,Updated: 31 Jan, 2018 03:39 AM

हार्वे विन्सस्टीन स्कैंडल की वजह से पूरे विश्व में सैक्स के बढ़ते विशुद्धवादी अनाचरण के विरुद्ध एक आवश्यक धक्के के रूप में और क्या सामने आ सकता है कि भारतीय महिलाएं बेशर्म कामुकता का आनंद लेने के लिए अपने वैध अधिकार की मांग कर रही हैं जिसमें उनकी...
हार्वे विन्सस्टीन स्कैंडल की वजह से पूरे विश्व में सैक्स के बढ़ते विशुद्धवादी अनाचरण के विरुद्ध एक आवश्यक धक्के के रूप में और क्या सामने आ सकता है कि भारतीय महिलाएं बेशर्म कामुकता का आनंद लेने के लिए अपने वैध अधिकार की मांग कर रही हैं जिसमें उनकी संवेदनशीलता को बढ़ाने के लिए देसी पोर्न इंडस्ट्री को बॉलीवुड की तर्ज पर प्रोत्साहित करना है।
दिल्ली एन.सी.आर. में महिलाओं के एक समूह से वार्ताकार की हुई एक वार्ता में महिलाओं ने उत्तेजक अथवा अश्लीलतापूर्ण साहित्य पढऩे अथवा कुछ नया अनुभव करने के लिए पोर्न देखना अपना मूल अधिकार बताया। यह वार्ता ऑनलाइन साइट पर एक प्रश्नोत्तर पर आधारित थी जिसमें रिपोर्ट दी गई थी कि पोर्न देखने वाली भारतीय महिलाओं की संख्या विश्व के अन्य देशों की बजाय 129 प्रतिशत तक बढ़ गई है जिसमें महिलाओं द्वारा विशेष पोर्न साइट सर्च करना भी शामिल है।
18 से 35 वर्ष की आयु समूह की महिलाओं से वार्ता दौरान यह प्रत्युत्तर आया कि उनमें से बहुत-सी महिलाएं सैक्स पर ज्यादा खुली और अधिक जोशीली थीं। उनमें से बहुत-सी महिलाएं जिनके प्रश्नों के उत्तरों से पता चला कि परम्परागत पोर्न में सैक्स और आनंद में स्त्रीय परिप्रेक्ष्य का अभाव था। गुरुग्राम से एक मार्कीटिंग एग्जीक्यूटिव नीलिमा के अनुसार आप हर पोर्न वीडियो में देखेंगे कि महिलाएं पुरुष को खुश कर रही हैं जबकि पुरुषों द्वारा महिला के मुंह पर वीर्य स्खलन करता दिखाए जाने की बजाय महिला का आनंदित होना दिखाया जाना चाहिए। यह कोई सैक्स क्रिया नहीं परन्तु इसे फिल्म की तरह बनाना है तो मेरा मानना है कि यह स्त्री से द्वेष करने जैसा है।
पोर्न फिल्मों में महिलाएं सदैव सैक्स के लिए तैयार रहती हैं और जैसे कि पलम्बर जो उनका बाथरूम का नल ठीक करने आता है वे उनसे सैक्स करती हैं। यह बहुत मूर्खतापूर्ण है। साकेत से पब्लिक रिलेशन अफसर पूर्वा का इस संबंधी कहना है कि आलिंगन करना, चरमोत्कर्ष वीडियो, शरीर की मालिश, फोर प्ले एवं सहमति से किया सैक्स जहां महिला की बुद्धिमता एवं इच्छा को जताता है, साथ ही महिला प्रधान पोर्न वीडियो का मानक भी बढ़ाता है और हां, ऐसा वीडियो देखने से महिलाओं का सैक्स क्रियाओं पर विषय बोध भी बढ़ता है। द्वारका निवासी एक महिला का कहना है कि आपके साथी का आपके पूरे शरीर पर हथेलियों से छूना भी बहुत काम करता है। महिला प्रधान वीडियो में बहुत-सी चुनौतियां हैं। वसंतकुंज से एक इंटीरियर डिजाइनर महिला बरशा का कहना है कि बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जो स्वयं को वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहतीं कि सभी के लिए सैक्स इच्छाएं अलग होती हैं। जब भी सैक्स की बात आती है तो वे सहमति पर ही इसका आनंद लेती हैं।
तकनीकी रूप से इसमें कोई अंतर नहीं होना चाहिए। सैक्स प्राथमिकताएं व्यक्ति दर व्यक्ति अलग-अलग हो सकती हैं। नोएडा की प्रमुख निजी यूनिवर्सिटी में लिंग अध्ययन कर रही अनुरेखा कहती हैं कि यदि महिला सैक्स क्रिया के दौरान अपने साथी से पिटते हुए आनंदित होती है तो यह उसकी अपनी निजी इच्छा है। लिंग (पुरुष व महिला) वास्तविक में कोई बैरोमीटर नहीं है कि किसी को कैसी पोर्न वीडियो देखनी चाहिए। उक्त हुई वार्ता में कई महिलाओं का मानना है कि पोर्न फिल्मों में महिलाओं को कम दिखाया जाता है। एक ग्राफिक डिजाइनर ताबिशी साहू का मानना है कि दिन प्रतिदिन महिलाओं का सैक्स के प्रति टेस्ट बदल रहा है। कई बार वे समलैंगिक वीडियो देखना पसन्द करती हैं तो कई बार 3 पुरुषों के साथ एक महिला को सैक्स का आनंद लेते हुए देखना पसन्द करती हैं। पोर्न फिल्मों की वैरायटी भी संगीत की तरह होती है जो मूड पर निर्भर करती है।
महिलाओं की सैक्स की इच्छा केवल पोर्न वीडियो पर ही सीमित नहीं है। ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जो वास्तव में ‘रफ’ सैक्स करना पसन्द करती हैं। मालवीय नगर से आलिया इस संबंध में कहती है कि भारतीय पोर्न सैक्स वीडियो बेकार हैं परन्तु इन्हें बहुत मजे लेकर बनाया जाता है। उनमें से आधों का मानना है कि उनमें काम करने वाले कलाकार इसे करने से पूर्व सैक्स वीडियो ही देखते होंगे। देश भर में महिला लैंगिकता की आजादी एवं बेहतर समझ की चहुं ओर मांग है क्योंकि आज से पहले तक सैक्स को महिलाओं के लिए घरेलू कार्य की तरह माना जाता था और अब महिलाओं के लिए पोर्नोग्राफी एक गेम चेंजर की तरह प्रमाणित हो सकती है।
महिलाओं की सैक्स इच्छापूर्ति को अपराधबोध से जोड़ा जाता है क्योंकि इससे पूर्व उन्हें ऐसा जताया जाता था कि यह समाज में अच्छा नहीं माना जाता है। महिलाओं के लिए भी सैक्स बहुत महत्वपूर्ण है। इस वार्ता में शामिल हुई सभी महिलाओं का एकमत से मानना है कि उनके लिए सैक्स वीडियो की बहुत जरूरत है। इसे एक प्रकार की सैक्स शिक्षा की तरह भी देखा जाना चाहिए। इसे और उन्मुक्त एवं खुलेपन की तरह देखना चाहिए।(महिलाओं के नाम बदल दिए गए हैं)