Edited By Pardeep,Updated: 16 May, 2026 08:58 AM

केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू उपलब्धता को पुख्ता करने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर का...
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू उपलब्धता को पुख्ता करने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर का अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) लगा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में संकट गहराया हुआ है।
डीजल और एटीएफ (ATF) के निर्यात पर बड़ी 'राहत'
एक ओर जहां पेट्रोल निर्यात पर टैक्स लगाया गया है, वहीं दूसरी ओर डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यातकों को बड़ी राहत दी गई है:
- डीजल: इस पर लगने वाले कर को 23 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
- विमान ईंधन (ATF): इसके निर्यात पर शुल्क 33 रुपये प्रति लीटर से घटाकर सीधा 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। ये नई दरें 16 मई से प्रभावी होंगी।
आम आदमी को डरने की जरूरत नहीं, घरेलू कीमतों में 'नो चेंज'
इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए स्वीकृत पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी, देश के भीतर आम जनता के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इस नए विंडफॉल टैक्स का कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाले 'सड़क और अवसंरचना उपकर' (Cess) को भी शून्य कर दिया गया है।
युद्ध के बीच घरेलू बाजार को 'सप्लाई' की चिंता
सरकार का यह कदम मुख्य रूप से अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति को देखते हुए उठाया गया है। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद पहली बार पेट्रोल पर यह विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) लगाया गया है ताकि भारतीय बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और कंपनियां मुनाफे के लिए सारा स्टॉक विदेश न भेज दें।