Edited By ,Updated: 21 Apr, 2026 05:24 AM

राष्ट्रपति ट्रम्प और पोप लियो 14वें के बीच का संघर्ष अभूतपूर्व है। हालांकि पोपों ने पहले भी राजनीति पर टिप्पणी की है लेकिन पोप के प्रति ट्रम्प का व्यक्तिगत अपमान असामान्य है। हालांकि रिपोर्टों से पता चलता है कि उनके लहजे में नरमी आई है, फिर भी उनकी...
राष्ट्रपति ट्रम्प और पोप लियो 14वें के बीच का संघर्ष अभूतपूर्व है। हालांकि पोपों ने पहले भी राजनीति पर टिप्पणी की है लेकिन पोप के प्रति ट्रम्प का व्यक्तिगत अपमान असामान्य है। हालांकि रिपोर्टों से पता चलता है कि उनके लहजे में नरमी आई है, फिर भी उनकी बेचैनी स्पष्ट है। अमरीकी इतिहास के 250 वर्षों में किसी भी राष्ट्रपति ने किसी पोप पर व्यक्तिगत रूप से हमला नहीं किया है। इस तरह के सार्वजनिक मतभेद केवल भ्रम पैदा करते हैं। ट्रम्प ने ईरान के संबंध में अमरीका और इसराईल की कार्रवाइयों की पोप द्वारा आलोचना किए जाने के बाद सार्वजनिक रूप से पोप लियो 14वें की निंदा की। इसने एक महत्वपूर्ण टकराव को चिन्हित किया। राष्ट्रपति ट्रम्प और पोप लियो 14वें के बीच का संघर्ष एक दुर्लभ टकराव को उजागर करता है, जिसमें राजनीतिक शक्ति और धार्मिक प्रतीकवाद का मिश्रण है, जो जनमत और धार्मिक समुदायों को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
ट्रम्प ने कहा, ‘‘मुझे पोप के साथ असहमत होने का अधिकार है।’’ उन्होंने दावा किया, ‘‘पोप ने एक बयान देते हुए कहा कि ‘ईरान के पास परमाणु हथियार हो सकता है।’ मैं कहता हूं ‘ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता।’’ हालांकि एक रिपोर्टर ने उल्लेख किया कि पोप लियो ने सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की है। पोप लियो ने व्यक्त किया कि उन्हें ‘ट्रम्प प्रशासन का कोई डर नहीं है’ और वह ईश्वर के संदेश के बारे में बोलना जारी रखेंगे। कैथोलिक, सबसे बड़े सिर्विंग वोटिंग समूह के रूप में, इस विवाद से प्रभावित हैं, जो उनके मतदान निर्णयों को प्रभावित कर सकता है और भविष्य के चुनाव परिणामों को आकार दे सकता है। पवित्र सप्ताह के दौरान तनाव चरम पर था। ट्रम्प ने कॉन्क्लेव की भी आलोचना करते हुए तर्क दिया कि लियो को चर्च द्वारा ‘ट्रम्प की उपस्थिति का मुकाबला करने’ के लिए ‘चुना’ गया था। इसके तुरंत बाद, ट्रम्प ने खुद को बीमारों को ठीक करने वाले क्राइस्ट के रूप में दिखाते हुए एक ए.आई.-जैनरेटेड छवि सांझी की लेकिन बाद में उन्होंने इसे ‘एक डॉक्टर के रूप में’ दिखाने के लिए कहकर हटा दिया।
बयान देने वाले सभी प्रमुख काॢडनल और बिशप पोप का समर्थन और ट्रम्प की आलोचना कर रहे हैं। श्वेत कैथोलिकों के बीच राष्ट्रपति की अप्रूवल रेटिंग फरवरी 2025 में 59 प्रतिशत से गिरकर जनवरी 2026 में 36 प्रतिशत हो गई और हिस्पैनिक कैथोलिकों के बीच यह 31 प्रतिशत से गिरकर 23 प्रतिशत हो गई। तनाव तब बढ़ गया जब ट्रम्प ने पोप लियो पर ‘अपराध के प्रति नरम और विदेश नीति में अप्रभावी’ होने का आरोप लगाया, जो संभवत: उनकी आप्रवासन नीतियों में अधिक करुणा के लिए कैथोलिक नेताओं की अपील के जवाब में था। ट्रम्प ने दावा किया कि लियो ने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं का समर्थन किया और सोशल मीडिया पर अपने हमले तेज कर दिए, यह कहते हुए कि ‘क्या कोई कृपया पोप लियो को बताएगा कि ईरान ने पिछले 2 महीनों में कम से कम 42,000 निर्दोष, निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मार डाला है?’
इससे पहले, कई पोपों ने राजनीतिक नेताओं की आलोचना की है, हालांकि यह दुर्लभ है। पोप लियो ने शांति का आह्वान किया है और ईरान के खिलाफ चल रहे अमरीकी नेतृत्व वाले युद्ध का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रम्प ऐसा क्यों दावा करते हैं कि लियो ईरान में परमाणु हथियारों का समर्थन करते हैं। पोप सेंट जॉन पॉल द्वितीय ने मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करते हुए 1979 में मध्य पूर्व और लेबनान में संघर्षों के समाधान का आह्वान किया था। 2013 में, पोप फ्रांसिस ने सीरिया के लिए शांति जागरण का नेतृत्व किया और सैन्य कार्रवाइयों का विरोध करने के लिए राष्ट्रपति पुतिन को पत्र लिखा। 2017 में एक रासायनिक हमले के बाद, जिसमें लगभग 70 लोग मारे गए थे, उन्होंने अपना आक्रोश व्यक्त किया और नेताओं से ङ्क्षहसा रोकने का आग्रह किया, यह कहते हुए कि वे युद्ध करने वालों की प्रार्थना नहीं सुनते। पोप लियो ने उन नेताओं की आलोचना की, जो युद्ध पर अरबों डालर बर्बाद करते हैं, यह कहते हुए कि दुनिया ‘मुट्ठी भर अत्याचारियों द्वारा तबाह की जा रही है।’ यह कड़ी टिप्पणी उन्होंने कैमरून की अपनी यात्रा के दौरान की थी, जहां उन्होंने उन लोगों की ङ्क्षनदा की, जो अपने लाभ के लिए ‘ईश्वर के नाम’ का दुरुपयोग करते हैं।
पोप लियो सामान्य रूप से युद्ध के कड़े आलोचक रहे हैं, विशेष रूप से 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमरीका और इसराईल द्वारा शुरू किए गए अचानक हमले और सैन्य अभियानों की ङ्क्षनदा करते हुए, उन्होंने ईरान की ‘पूरी सभ्यता’ को नष्ट करने की ट्रम्प की धमकी को ‘तुलनात्मक रूप से अस्वीकार्य’ भी बताया। इस बार बेचैनी और अधिक है। समर्पित मतदाताओं और धार्मिक समुदाय के सदस्यों के लिए मामला केवल राजनीतिक नहीं है, इसमें धार्मिक प्रतीकवाद भी शामिल है, जिसका बहुत महत्व है। पोप लियो ने राष्ट्रपति द्वारा उन्हें ‘कमजोर’ कहे जाने के बाद राजनीतिक विवादों के बीच विश्वास के लचीलेपन पर जोर देते हुए कहा, ‘‘मैं ट्रम्प से नहीं डरता।’’ 12 अप्रैल को राष्ट्रपति ने लियो की आलोचना करते हुए कहा कि वह ‘अपराध और परमाणु हथियारों पर कमजोर’ हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पोप को लगता है कि ईरान के लिए परमाणु हथियार रखना स्वीकार्य है।
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट है कि ईरान में युद्ध अमरीकियों के बीच अलोकप्रिय है। इस सप्ताह, डैमोक्रेट्स ने राष्ट्रपति की भागीदारी को सीमित करने का प्रयास किया, हाऊस और सीनेट में ज्यादातर दलीय आधार पर युद्ध शक्तियों के प्रस्ताव पारित किए, जबकि रिपब्लिकन ने इन प्रयासों का विरोध किया। पोप लियो 14वें राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ तनाव कम करना चाहते हैं, उन्होंने एक्स पर कहा कि ‘मसीह का शिष्य कभी भी उन लोगों के पक्ष में नहीं होता, जिन्होंने कभी तलवार चलाई थी और आज बम गिराते हैं।’ लियो ने 13 अप्रैल को अपनी अफ्रीका की यात्रा की शुरुआत में पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं युद्ध के खिलाफ बोलूंगा और शांति, संवाद तथा संघर्षों के बहुपक्षीय समाधान को बढ़ावा दूंगा।’’-कल्याणी शंकर