Skand Shashthi April 2026 Date: संतान सुख और ग्रहों की शांति के लिए इस दिन रखें स्कन्द षष्ठी व्रत, जानें मूर्ति बनाने का गुप्त अमृत बीज मंत्र

Edited By Updated: 21 Apr, 2026 01:50 PM

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Skand Shashthi April 2026 Date: साल 2026 में अप्रैल की स्कन्द षष्ठी का व्रत कब है? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और भगवान कार्तिकेय को प्रसन्न करने के लिए मिट्टी की मूर्ति बनाने की विशेष शास्त्रीय विधि।

Skand Shashthi April 2026 Date: स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से जीवन में हर तरह की कठिनाइयां दूर होती हैं। खासतौर पर इस दिन पूजा के परिणाम स्वरूप संतान के जीवन में आ रहे कष्ट कम होते हैं और नवग्रहों की शांति बनी रहती है। बता दें दक्षिण भारत में भगवान कार्तिकेय को सुब्रह्मण्यम के नाम से जाना जाता है, जिनका प्रिय पुष्प चंपा है, जिस कारण इस व्रत को चंपा षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है।

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर इस दिन शुभ मुहूर्त में भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाए तो बहुत सारे लाभ प्राप्त होते हैं। भगवान कार्तिकेय षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह के स्वामी हैं। जिस जातक की कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति कमज़ोर हो या किसी भी तरह से मंगल ग्रह पीड़ित हो। उन्हें अपनी कुंडली में मंगल को मज़बूत करने के लिए तथा ग्रहों का शुभ प्रभाव पाने के लिए इस दिन व्रत करना चाहिए तथा विधिपूर्वक स्कंद भगवान की पूजा करनी चाहिए। 

इनकी पूजा के शुभ फल से न केवल ग्रहों को शांति मिलती है बल्कि साथ ही साथ जीवन में आने वाली समस्त प्रकार की कठिनाईयां दूर हो जाती हैं। तो वहीं खासतौर पर इस दिन व्रत करने से तथा भगवान कार्तिकेय की पूजा अर्चना करने से संतान प्राप्ति के साथ-साथ, अगर किसी दंपत्ति को संतान की प्राप्ति न हो रही हो तो वो भी प्राप्त होती है। 

अप्रैल 2026 में आने वाली स्कन्द षष्ठी को लेकर यदि आप भी तारीख और मुहूर्त को लेकर उलझन में हैं, तो यह विशेष लेख आपके लिए है।

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22 या 23 अप्रैल? जानें सटीक तारीख और मुहूर्त
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, अप्रैल 2026 में स्कन्द षष्ठी का व्रत 22 अप्रैल, बुधवार को रखा जाएगा।
षष्ठी तिथि प्रारम्भ: 22 अप्रैल को रात 01:19 AM से
षष्ठी तिथि समाप्त: 22 अप्रैल को रात 10:49 PM पर

मिट्टी से मूर्ति बनाने की 'गुप्त विधि' और 'अमृत बीज' मंत्र
शास्त्रों में इस दिन भगवान कार्तिकेय की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजन का विशेष विधान है। इसकी विधि इस प्रकार है:
मिट्टी का चयन: किसी पवित्र स्थान से मिट्टी लाकर उसका पिंड बनाएं।

अमृत बीज मंत्र: उस पिंड पर 16 बार 'बम्' शब्द का उच्चारण करें। शास्त्रों में 'बम्' को सुधाबीज या अमृत बीज कहा गया है, जिससे मिट्टी जागृत हो जाती है।

प्रतिमा निर्माण: मूर्ति बनाते समय “ऊँ ऐं हुं क्षुं क्लीं कुमाराय नमः” मंत्र का जाप करें।

आह्वान और पूजन: मूर्ति बनने के बाद “ऊँ नमः पिनाकिने इहागच्छ इहातिष्ठ” मंत्र से भगवान का आह्वान करें और “ऊँ नमः पशुपतये” मंत्र पढ़ते हुए उन्हें स्नान कराएं।

अंतिम चरण: पूजा के बाद मूर्ति को आदरपूर्वक जल में विसर्जित कर दें।

Skanda Sashti mantra: ॐ ह्रीं षष्ठीदेव्यै स्वाहा मंत्र का उच्चारण करते हुए कमलगट्टे की माला पर 1100 बार इस मंत्र का जाप करते हुए अपने इच्छित वर की कामना करें। इसके बाद मां दुर्गा को पुष्प, धूप, दीप, अक्षत, नैवेद्य चढ़ाकर पूजा संपन्न करें। ऐसा करने से हर प्रकार से कार्य सिद्धि होगी। 

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