देश को चरित्रवान और देशभक्त नेता चाहिए

Edited By Updated: 31 May, 2024 05:59 AM

the country needs a leader with character and patriotism

स्वामी विवेकानन्द बार-बार यह कहा करते थे ‘‘मनुष्य मनुष्य और केवल मनुष्य, चरित्रवान, देशभक्त वज्र के समान धमनियों वाले चाहिएं बाकी सब हो जाएगा।’’ स्वामी जी मनुष्य निर्माण पर जोर देते रहे। बीमार हुए और केवल 39 वर्ष और 5 मास की आयु में स्वर्ग सिधार गए।

स्वामी विवेकानन्द बार-बार यह कहा करते थे ‘‘मनुष्य मनुष्य और केवल मनुष्य, चरित्रवान, देशभक्त वज्र के समान धमनियों वाले चाहिएं बाकी सब हो जाएगा।’’ स्वामी जी मनुष्य निर्माण पर जोर देते रहे। बीमार हुए और केवल 39 वर्ष और 5 मास की आयु में स्वर्ग सिधार गए। जीवन के अंतिम दिनों में कहा था, ‘‘मनुष्य निर्माण का काम मैं पूरा नहीं कर सका परन्तु मेरी मातृभूमि के उत्थान के लिए कोई और यह काम करेगा।’’ मनुष्य निर्माण की स्वामी विवेकानन्द की इस अधूरी अनुभूति को पूरा करने के लिए डा. हेडगेवार आए। 1902 में स्वामी विवेकानंद जी का स्वर्गवास हुआ और 1925 में डा. हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की। विश्व का यह सबसे बड़ा संगठन मनुष्य निर्माण का काम कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर देश में कितने ही मुख्यमंत्री तथा और संघ के लोग देश को संभाल रहे हैं। 

भारत के विकास में 10 वर्ष का ऐतिहासिक अध्याय जोडऩे के बाद इस बार के चुनाव की समाप्ति के बाद नरेंद्र मोदी ध्यान मग्न होने के लिए कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक में जा रहे हैं। यह साधारण घटना नहीं है। नए भारत के इतिहास का स्मरणीय पृष्ठ बनने जा रहा है। समुद्र में जिस चट्टान पर विवेकानन्द स्मारक बना है यह वही चट्टान है जिस पर 1892 में पूरे चार वर्ष भारत का भ्रमण करने के बाद स्वामी विवेकानन्द ध्यान मग्न हुए थे। 2 दिन 3 रात ध्यान लगाने के बाद उन्होंने ऐतिहासिक घोषणा की थी, ‘‘हे प्रभु नहीं चाहिए मुझे मोक्ष जब तक भारत का प्रत्येक व्यक्ति भर पेट भोजन नहीं कर लेता और पूरा भारत गुलामी की निद्रा से जाग नहीं जाता तब तक मैं  बार-बार जन्म लूं और मातृभूमि की सेवा करूं।’’ 1893 में शिकागो की धर्म सभा में स्वामी विवेकानंद को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई। विश्व इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है कि किसी देश के नेता का दूसरे देश में दिए गए केवल एक भाषण से उसके देश के सम्बंध में पूरी दुनिया के विचार बदल गए हैं। 

स्वामी विवेकानन्द ने शिकागो की धर्म सभा में अपना भाषण प्रारम्भ किया, ‘‘अमरीका के मेरे प्यारे भाइयो और बहनो।’’ सात समुन्द्र पार से आए हुए स्वामी जी द्वारा भाई बहन सुनते ही तालियां बजनी शुरू हो गईं। स्वामी जी के मुख्य भाषण के दूसरे दिन अमरीका के प्रसिद्ध समाचार पत्र नैशनल हेराल्ड के पृष्ठ पर स्वामी जी का चित्र छपा और उसके नीचे ये शब्द लिखे थे : 

‘‘विश्व धर्म सभा में स्वामी विवेकानन्द सबसे अधिक महत्वपूर्ण नेता थे। उनके भाषण को सुन कर हमें एहसास हुआ कि इतने विद्वान देश में धर्म प्रचारक भेजना कितनी मूर्खता की बात है।’’ स्वामी विवेकानन्द ने सदियों की गुलामी में सोए हुए भारत को जगाया। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने कहा है, ‘‘हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत की आजादी के संस्थापक स्वामी विवेकानन्द थे। उन्होंने भारत को जगाया और उसके बाद आजादी के लिए संघर्ष प्रारम्भ हुआ।’’ यह एक ऐतिहासिक संयोग है कि इस बार के महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी ऐतिहासिक चट्टान पर बने विवेकानंद स्मारक में ध्यान मग्र हो रहे हैं। 

वे नरेन्द्र स्वामी विवेकानन्द बने और ये नरेन्द्र भारत के प्रधानमंत्री बने। नरेन्द्र मोदी जी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं जिनका कोई व्यक्तिगत एजैंडा नहीं, कोई परिवार नहीं। देश, देश और केवल देश। कभी कोई छुट्टी लेते नहीं, पता नहीं कब सोते और कब आराम करते हैं। पिछले 10 वर्षों में एक नए भारत का नया चित्र बनाना शुरू किया। इस बार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद अगले 5 वर्षों में ऐतिहासिक विकास होगा। विश्व के 190 देशों में सबसे अधिक अमीर पांच देशों में भारत शामिल हो गया। 190 देशों के प्रधानमंत्रियों में सबसे अधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी बन गए। इस चुनाव के बाद विवेकानन्द स्मारक में ध्यान मग्न होने के बाद नरेन्द्र मोदी 5 वर्ष में वह विकास करेंगे जो भारत में पहले कभी नहीं हुआ था।-शांता कुमार (पूर्व मुख्यमंत्री हि.प्र. और पूर्व केन्द्रीय मंत्री)

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