तमिलनाडु का राजनीतिक परिदृश्य अभी धुंधला

Edited By Updated: 03 Feb, 2026 05:41 AM

the political landscape of tamil nadu is currently unclear

जैसे -जैसे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, मुख्य राजनीतिक दलों में 2 गठबंधन प्रमुख हैं-कांग्रेस और वाम दलों के साथ सत्तारूढ़ द्रमुक के नेतृत्व वाला गठबंधन और अन्नाद्रमुक गठबंधन। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन द्रमुक का नेतृत्व करना और इस गठबंधन...

जैसे -जैसे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, मुख्य राजनीतिक दलों में 2 गठबंधन प्रमुख हैं-कांग्रेस और वाम दलों के साथ सत्तारूढ़ द्रमुक के नेतृत्व वाला गठबंधन और अन्नाद्रमुक गठबंधन। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन द्रमुक का नेतृत्व करना और इस गठबंधन को बनाए रखना जारी रखे हुए हैं। जे. जयललिता के निधन के बाद अन्नाद्रमुक अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। यह आंतरिक संघर्षों का सामना कर रही है, जो इसकी स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। इस बीच, टी.टी.वी. दिनाकरण, ओ. पनीरसेल्वम और शशिकला के निष्कासन इन मुद्दों को उजागर और अन्नाद्रमुक को प्रभावित करते हैं। वहीं, अभिनेता विजय द्वारा शुरू की गई नई राजनीतिक पार्टियों पर सबका ध्यान जा रहा है।

2004 से सहयोगी होने के बावजूद, कांग्रेस और द्रमुक के बीच संबंधों में हाल ही में कुछ उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। अब, 2026 के चुनावों से पहले, कांग्रेस ने सत्ता में हिस्सेदारी की मांग की है, जो उन आंतरिक संघर्षों को उजागर करती है, जो उनकी रणनीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। ओ. पनीरसेल्वम को अभी तक ऐसी कोई पार्टी नहीं मिली, जो उन्हें स्वीकार करे। द्रमुक कभी भी सत्ता सांझी करने (पावर-शेयरिंग) पर सहमत नहीं हुई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और द्रमुक नेता कनिमोझी ने बुधवार को 10 जनपथ पर आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव तथा उनकी गठबंधन राजनीति पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की लेकिन सीट बंटवारे पर कोई समझौता नहीं हो सका।

कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने सत्ता में हिस्सेदारी की मांग करते हुए कहा, ‘‘हम सत्ता में हिस्सेदारी के लिए लडऩा जारी रखेंगे और हम इसे हासिल करेंगे।’’ यह कांग्रेस नेताओं के संकल्प को दर्शाता है। राहुल गांधी ने पिछले हफ्ते द्रमुक नेता कनिमोझी के साथ बैठक के दौरान भी यह मुद्दा उठाया था। हालांकि, द्रमुक ने इस विचार को खारिज कर दिया है। द्रमुक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह कांग्रेस को कैबिनेट सीट नहीं देगी। हालांकि, इसने गठबंधन जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। द्रमुक कांग्रेस को मनाने के लिए राज्यसभा सीट की पेशकश कर रही है। फिर भी, कांग्रेस को बेहतर की उम्मीद है। गठबंधन में अधिक सीटों और शक्ति के लिए पार्टी की मांगें स्थिरता के महत्व और चुनाव परिणामों को आकार देने में गठबंधनों की भूमिका को रेखांकित करती हैं। द्रविड़ पार्टियां अक्सर वोटों के लिए छोटे सहयोगियों पर निर्भर रहती हैं लेकिन सत्ता सांझी करने का विरोध करती हैं। उदाहरण के लिए, पिछले जून में, अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने कहा था कि कोई सत्ता-सांझाकरण समझौता नहीं होगा, उनका तर्क था कि गठबंधन सरकारें तमिलनाडु की राजनीतिक संस्कृति के अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने एकल-पार्टी शासन के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

एन.डी.ए. की सीट-सांझाकरण योजना नए विचारों की खोज से हटकर उन्हें लागू करने की दिशा में बदलाव दिखाती है। रणनीति में बदलाव करते हुए, एन.डी.ए. अब केवल विस्तार करने की बजाय अधिक सीटें जीतने पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। एन.डी.ए. द्रमुक विरोधी वोट हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसमें अन्नाद्रमुक मुख्य पार्टी और भाजपा प्रमुख समर्थक के रूप में होगी। एन.डी.ए. ने विधानसभा चुनावों के लिए अपनी संभावनाओं में सुधार किया है। सीटें जीतना उम्मीदवारों के चयन, उनकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता एवं बूथ रणनीति पर निर्भर करता है। अन्नाद्रमुक नेता ई. पलानीस्वामी ने पार्टी एकता के महत्व पर जोर देते हुए ओ. पनीरसेल्वम और टी.टी.वी. दिनाकरण को अस्वीकार करना जारी रखा है। ओ.पी.एस. एन.डी.ए. में शामिल होने के लिए उत्सुक हैं, चाहे वह ए.एम.एम.के. के माध्यम से हो या अन्नाद्रमुक में लौटकर। मुख्य सवाल यह है कि क्या अन्नाद्रमुक ओ.पी.एस. का वापस स्वागत करेगी या उन्हें किनारे कर देगी और क्या राजनीतिक स्थिरता और प्रासंगिकता को लेकर चिंताएं हैं?

एक अन्य दिलचस्प पहलू यह है कि लोकप्रिय अभिनेता विजय ने 2024 में अपनी राजनीतिक पार्टी, तमिलगा वेत्री कडग़म (टी.वी.के.) लॉन्च की और उसके तुरंत बाद घोषणा की कि वह राजनीति में पूर्णकालिक रूप से आने के लिए फिल्मों से संन्यास ले लेंगे। उन्होंने कहा कि इस महीने आने वाली उनकी फिल्म ‘जन नायकन’ उनकी विदाई रिलीज होगी। 51 साल की उम्र में, यह सितारा एक सफल फिल्मी करियर से पीछे हट रहा है, जिसे छोडऩे में कई अभिनेता संकोच करेंगे। वह भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय सितारों में से एक बने हुए हैं। वह त्यौहारों पर फिल्मों की रिलीज को बढ़ावा देने में मदद करते हैं और सैटेलाइट अधिकारों, संगीत और मर्चेंडाइज के माध्यम से वैश्विक तमिल समुदाय के लिए राजस्व उत्पन्न करते हैं। विजय की पार्टी आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में स्थापित दलों, द्रमुक और अन्नाद्रमुक के खिलाफ चुनाव लड़ेगी। उनकी पार्टी का लक्ष्य द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों को चुनौती देना और अकेले चुनाव लडऩे की योजना है। विजय का एक बड़ा प्रशंसक आधार है। उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात की थी लेकिन वे किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके।

कमल हासन एक प्रसिद्ध अभिनेता और राजनीतिक दल ‘मक्कल निधि मय्यम’ के नेता हैं। वह स्वतंत्र अभियानों से हटकर द्रमुक के साथ जुड़कर तमिलनाडु में अपनी राजनीतिक उपस्थिति बढ़ा रहे हैं। 2025-2026 तक, वह राज्यसभा के सदस्य हैं, जो जून 2025 में चुने गए थे। वह मध्यमार्गी, भ्रष्टाचार विरोधी राजनीति पर ध्यान केंद्रित करते हैं और द्रमुक के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोगी हैं, विशेष रूप से 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले। इस राज्य में कई फिल्मी सितारे राजनेता बने हैं। एम.जी.आर. के नाम से जाने जाते एम.जी. रामचंद्रन और जयललिता का राजनीतिक करियर बहुत सफल रहा। इससे पहले, सी.एन. अन्नादुराई और एम. करुणानिधि उल्लेखनीय हस्तियां थे। वे दोनों मुख्यमंत्री भी बने। रजनीकांत, कमल हासन, खुशबू और विजयकांत जैसे अन्य अभिनेताओं ने भी राजनीति में हाथ आजमाया लेकिन उनकी सफलता मिश्रित रही। स्टालिन ने गठबंधन की आवश्यकता को महसूस किया है और वह द्रमुक को गठबंधन में बनाए रखने का समर्थन करते हैं। कांग्रेस के कुछ नेता चाहते हैं कि उनकी पार्टी विजय की पार्टी में शामिल हो जाए लेकिन विजय की पार्टी अभी तक परखी नहीं गई है। तमिलनाडु का राजनीतिक परिदृश्य अभी भी धुंधला है और स्थिति स्पष्ट होने से पहले कुछ और दिनों का इंतजार करना होगा। लेकिन तमिलनाडु में चर्चा यह है कि द्रमुक गठबंधन की वापसी हो सकती है।-कल्याणी शंकर      

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