मां की ममता का मार्मिक जादू

Edited By Updated: 10 May, 2026 04:11 AM

the touching magic of a mother s love

10 मई, मदर्स डे। मां को समॢपत एक ही दिन क्यों, हमारे जीवन का हर पल मां की देन है। सभ्यता की शुरुआत से ही मां को हर संस्कृति में पूजा गया। चाहे दुर्गा के रूप में, सरस्वती के रूप में, या धरती माता के रूप में। यहां तो हम अपने देश को भी भारत माता पुकार...

10 मई, मदर्स डे। मां को समर्पित एक ही दिन क्यों, हमारे जीवन का हर पल मां की देन है। सभ्यता की शुरुआत से ही मां को हर संस्कृति में पूजा गया। चाहे दुर्गा के रूप में, सरस्वती के रूप में, या धरती माता के रूप में। यहां तो हम अपने देश को भी भारत माता पुकार गौरवान्वित होते हैं। हम दुनिया के शायद ऐसे पहले लोग हैं, जो अपने देश को ही नहीं, बल्कि अपनी बोली से लेकर नदियों, पौधों और गऊ को भी गौ माता कहते हैं। मां सिर्फ जन्म देने वाली हीं नहीं, बल्कि जो पोषण दे, रक्षा करे, ज्ञान दे, समृद्धि दे, उसे भी मां का दर्जा हासिल है। 

वह हाथ जो माथे पर रखा जाता : मुझे जब अपनी मां की यादें आती हैं कि कैसे वह घर में सबसे देर में सोती थी और सबसे पहले जगती थी, घड़ी के अलार्म से नहीं, बल्कि इसलिए कि उनके अंदर परिवार का फिक्र था जो उन्हें चैन से नहीं बैठने देता। किस तरह वह बच्चों के कुछ कहने से पहले ही उनके माथे पर हाथ रखकर बुखार टटोल लेती थी। किस तरह परिवार के प्रति उनकी चिंता कभी शोर नहीं करती थी, बस एक धीमी लौ की तरह हमेशा जलती रहती थी, जिसे उन्होंने कभी बुझने नहीं दिया। मैं अब समझती हूं, यही असली जादू है मां का। 

ये मांएं कुछ अलग हैं : इस मदर्स डे पर मैं कुछ खास मांओं का जिक्र करना चाहती हूं, जिनके प्रति प्यार किसी ग्रीटिंग कार्ड के जरिए जाहिर नहीं किया जा सकता, ये नारी शक्ति की असल मूर्त हैं, जिन्हें दुनिया ने शायद ही इतने करीब से देखा होगा। कुछ हफ्ते पहले मैं होशियारपुर में ‘ऑटिज्म’ पीड़ित यानी एक तरह की न्यूरोडिवैल्पमैंटल स्थिति, जो संवाद, सामाजिक व्यवहार और संवेदनाओं को प्रभावित करती है, ऐसे बच्चों के एक स्कूल में गई। मुझे लगा था कि बच्चे भावुक कर देंगे। उन्होंने मुझे किया भी। लेकिन जो बात मेरे मन में घर कर गई, वह मैं अभी तक भूल नहीं पाई, वह थी स्कूल के बाहर इन बच्चों के इंतजार में बैठी मांएं।

एक मां सुबह 7 बजे से वहां बैठी थी। उसने बेटे का नाश्ता एक खास टिफिन में रखा, नीला नहीं, बल्कि हरे रंग का, क्योंकि नीला रंग बच्चे को बेचैन कर देता था। सुबह घर से निकलने से पहले बच्चे के साथ स्कूल की दिनचर्या की प्रक्रिया 7 से 8 बार तक दोहराई जाती है। उस मां ने मुझे यह सब शिकायत नहीं की, बल्कि शांत, सहज गर्व से बताया जैसे किसी ने बस अलग तरह से अपने बच्चे से प्यार करना सीख लिया हो। एक और मां ने मुझे बताया कि उसने प्रोजैक्ट मैनेजमैंट का करियर छोड़ा, जिसके लिए उसने जी-तोड़ मेहनत की थी। नौकरी इसलिए छोड़ी कि बेटी को एक ऐसी पूरी-वक्त मौजूदगी चाहिए थी, जो नौकरी के किसी शैड्यूल में फिट नहीं होती। ‘उसे मेरी जरूरत थी कि मैं ही उसका शैड्यूल बन जाऊं’, उस मां ने बस इतना कहा और जमीन की तरफ देख कर मुस्कुराई।

मां जिसने नामुमकिन को मुमकिन किया : एक मां की कहानी मुझे याद है, जिसके दिव्यांग बेटे को कई डाक्टरों ने पढऩे-लिखने में लाचार बताया। दिल पर पत्थर रख कर मां ने डाक्टरों की बातें सुनीं, उन्हें सहा। बच्चे को लेकर जताई गई लाचारी को मानने से इंकार करते हुए वह मां ही अपने बच्चे की थैरेपिस्ट बनी, उसकी टीचर बनी, उसकी जुबान बनी और आखिर में उसकी सुरीली आवाज बनी। आज वह नौजवान अपनी गायन कला के हुनर से सुरों के रस घोलता है, जिसके बोलों से लोगों की आंखें भर आती हैं। 

विशेष जरूरतों वाले बच्चों की मांओं को : ‘आपका धैर्य साधारण नहीं है। यह असाधारण है। आप सिर्फ एक बच्चे को नहीं पाल रहीं, आप चुपचाप दुनिया की उस समझ को बड़ा कर रही हैं, जो प्यार को उसके हर रूप में पहचाने। यह सिर्फ मां का प्यार नहीं, यह एक मां का जनूनी, जिद्दी और दिल थाम देने वाला ईमान है’।

जश्न के साथ एहसास भी : मदर्स डे पर हमारा जश्न मां की दुआओं के बगैर अधूरा है। मां अगर दूर हैं तो फोन करो। वह बात कहो जो कभी कह नहीं पाते। साथ हैं तो कुछ पल उनके पास बैठो। पूछो कैसी हैं और फिर उनके पास इतना रुको कि सच में उनके दिल की बात सुन सको। उनके चेहरे की झुर्रियां व हाथों की गहरी लकीरें देखो और समझो कि वे क्या बयां करती हैं। सोचो उन हजारों अनदेखे कामों के बारे में, जो बगैर थके उन्होंने आप के बचपन से लेकर जवानी तक आपके लिए किए। आप पाएंगे कि कहीं आज भी आपके जीवन में मां के खामोश जादू का असर है। मां तुझे सलाम। (लेखिका स्प्रिचुअल-लाइफस्टाइल मैंटर एवं ‘अमृतम’ की संस्थापक हैं)-संगीता मित्तल 
 

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