किसी को गाली देने पर होगा जुर्माना

Edited By Updated: 21 Apr, 2026 05:38 AM

there will be a fine for abusing someone

हाल ही में मध्य प्रदेश के जिला बुरहानपुर के पास के गांव बोरसर के बारे में खबर पढ़ी।  इस गांव की आबादी 6 हजार से अधिक है। गांव के सरपंच अतर सिंह, उप सरपंच विनोद शिंदे और एक अभिनेता अश्विन पाटिल को लगता था कि उनके गांव में लोग गाली-गलौच बहुत करते हैं।...

हाल ही में मध्य प्रदेश के जिला बुरहानपुर के पास के गांव बोरसर के बारे में खबर पढ़ी।  इस गांव की आबादी 6 हजार से अधिक है। गांव के सरपंच अतर सिंह, उप सरपंच विनोद शिंदे और एक अभिनेता अश्विन पाटिल को लगता था कि उनके गांव में लोग गाली-गलौच बहुत करते हैं। इसके लिए उन्होंने अपनी पंचायत और गांव के लोगों से मिलकर ही एक अभियान शुरू किया है। इसके तहत यदि गांव में कोई व्यक्ति गाली देता पाया जाता है, तो उसे 500 रुपए जुर्माने के रूप में देने पड़ेंगे।  एक महीने तक गांव में झाड़ू भी लगानी पड़ेगी। यह एक अच्छी पहल है, अन्य जगहों पर भी शुरू की जानी चाहिए।

अपने यहां तो लोग बात-बेबात, कहीं भी गाली देते हैं-जैसे रास्ता चलते, बस, रेल, साइकिल, रिक्शा किसी की भी सवारी करते। घूमते-फिरते, घर, दफ्तर। कई बार गाली से बात इतनी बढ़ जाती है कि मारपीट और हत्या तक की नौबत आ जाती है।  इन दिनों तो फिल्मों और ओ.टी.टी. पर आने वाले तमाम कार्यक्रमों में भी प्रचुर मात्रा में गालियां दी जा रही हैं। कई बार तो इन कार्यक्रमों में इतनी गाली-गलौच होती है कि घर में परिवार के साथ बैठकर इन्हें देखा-सुना नहीं जा सकता। अगर इनकी आलोचना की जाए, तो कहा जाता है कि हम तो वही दिखा रहे हैं, जो समाज में हो रहा है। बच्चे भी खूब गालियां देते दिखते हैं, क्योंकि वे वही तो सीखते हैं, जो अपने परिवार और परिवार के बाहर देखते-सुनते हैं। आजकल तो साइबर क्राइम के भी ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां अपने शिकार को खूब गालियां दी जाती हैं। एक बार गोरखपुर विश्वविद्यालय में मौखिक परीक्षा के दौरान एक प्रोफैसर द्वारा भी गालियां दी गई थीं। 

एक बात और, स्त्री और पुरुषों की गालियों में भी भेद है। पुरुष तो जहां स्त्री संबंधी रिश्तों, स्त्री अंगों को गालियों में समाहित करते हैं, वहीं स्त्रियों द्वारा दी जाने वाली गालियां कुछ अलग होती हैं। जैसे कि तू राण (विधवा)  हो जाए। क्योंकि समाज में विधवा होना आज भी स्त्री के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है या कि तेरा नाश हो जाए, तुझे कांठी उठाने वाला भी कोई न मिले, तू कलमुंही, कुलच्छिनी, करमजली है। तू निपूती ही रहे (जिसका कोई पुत्र न हो)। तेरा खसम (पति) मिट जाए। ध्यान से देखें तो ये सब भी वही हैं, जो किसी न किसी तरह पुरुष वर्चस्व की दुनिया ने उन्हें सौंपी हैं। 

गाली कमजोर का अस्त्र कही जाती है। जो समाज में आपसे अधिक ताकतवर है, जिसका आप कुछ नहीं बिगाड़ सकते, उसे गाली देकर मन की तसल्ली करते हैं। दशकों पहले ब्रज प्रदेश में लड़की की शादी के वक्त जब बारात  घर की छत या घर के आंगन में दावत खा रही होती थी, उसे ज्योनार कहते थे। घर और अड़ोस-पड़ोस की सारी स्त्रियां, खाना पकाती जातीं और दूल्हे के माता-पिता, भाई, बहन, नाते-रिश्तेदारों को जी भरकर गालियां देती जातीं। इन गालियों का कोई बुरा नहीं मानता था। बल्कि बाराती गाली सुन-सुनकर मुस्कुराते, हंसते थे। यहां यह बात गौरतलब है कि लड़के वालों का दर्जा समाज में लड़की वालों से ऊंचा माना जाता है। शादी से पहले, शादी के बाद और यहां तक कि ताउम्र उनकी मांगों और नखरों को लड़की वालों को झेलना पड़ता है। ऐसे में उन्हें गाली देना अपने मन की भड़ास को भी निकालना है।
इन दिनों तो कई बार टी.वी. बहसों के दौरान गालियां दी जाती हैं, या मुंह पर आते-आते रह जाती हैं।

कई बार तो लोकसभा और सदन के अन्य हिस्सों के बारे में भी ऐसी खबरें आती हैं। और तो और, अमरीका के राष्ट्रपति, जो अपने को दुनिया का सबसे ताकतवर नेता कहते हैं, गाली देते देखे जा रहे हैं। पिछले दिनों यूगांडा के एक बड़े सैन्य अधिकारी का भी वीडियो देखा, जो तुॢकए  से एक अरब डालर और सुंदर लड़कियों की मांग कर रहा है। ऐसा न होने पर तुर्किएए के विनाश की धमकी और अपशब्द कह रहा है। गालियों के समाज शास्त्र में यह उलटा चलन दिखाई दे रहा है, जहां  ताकतवर कमजोर को गालियों से नवाज रहा है। यानी कि अपनी चिढ़ और झल्लाहट को निकाल  रहा है। इस दुनिया के वे देश, जो अमरीका के सामने कुछ नहीं हैं, वे बात नहीं मान रहे। 

गालियों के समाज शास्त्री अध्ययन भी हुए हैं। इनके अनुसार यह शक्ति संतुलन, ऊंच-नीच, जिसे पदानुक्रम कहते हैं, समूह की एकजुटता और गाली देकर किसी का अपमान करने और उसे छोटा करने से जुड़ा है। गाली देने वाला हमेशा उससे अपने को ऊंचा समझता है, जिसे गाली दे रहा है। अक्सर गालियां ङ्क्षलग, जाति या समाजिक स्थिति से जुड़ी होती हैं। ये किसी को उसकी कमतरी का अहसास कराने के लिए भी दी जाती हैं। ये उन समूहों द्वारा दी जाती हैं, जो सामाजिक रूप से किसी न किसी तरह से सत्ता में होते हैं। अधिकांश गालियों के केंद्र में स्त्रियां होती हैं क्योंकि उन्हें पुरुषों से नीचा माना जाता है। कई बार दोस्तों के बीच निकटता दिखाने के लिए भी गालियां दी जाती हैं। दुख या दर्द कम करने के लिए भी। 
गाली किसी भी वजह से दी जाए, है तो वह अपशब्द ही। इसलिए मध्य प्रदेश के गांव की पहल देश के अन्य स्थानों पर भी होनी चाहिए।-क्षमा शर्मा
 

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